चंडीगढ़(गुरप्रीत सिंह): पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने जेल में बंद उग्रवादी जगतार सिंह हवारा को 10 दिन की पैरोल देने के लिए राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से अनुरोध किया है। इस अनुरोध से राजनीतिक हलकों में हैरानी है, खासकर ऐसे समय में जब राज्य एक और चुनावी मौसम की ओर बढ़ रहा है।
पंजाब के राजनीतिक और सुरक्षा इतिहास में हवारा एक बेहद विवादित व्यक्ति रहा है। उसे 1995 में तत्कालीन पंजाब के मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या में भूमिका के लिए दोषी ठहराया गया था। इस हमले में चंडीगढ़ स्थित पंजाब सिविल सचिवालय के बाहर 16 अन्य लोगों की भी मौत हुई थी।
पैरोल के अनुरोध का समय विशेष रूप से ध्यान खींच रहा है। हत्या की बरसी इसी महीने के अंत में है और इस हमले को 31 साल पूरे हो जाएंगे। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह मुद्दा और अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है, क्योंकि विभिन्न पंथिक संगठन सिख मतदाताओं के कुछ वर्गों के बीच अपना समर्थन मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।
बेअंत सिंह हत्याकांड में हवारा की भूमिका
जांचकर्ताओं ने हवारा को हत्या की साजिश के प्रमुख षड्यंत्रकारियों में से एक बताया था। उस पर दिलावर सिंह को निर्देश देने का आरोप था, जिसने मानव बम के रूप में हमले को अंजाम दिया था।
इस मामले में प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल के कई सदस्य शामिल थे। जांच के दौरान गिरफ्तार किए गए लोगों में हवारा, बलवंत सिंह राजोआना, जगतार सिंह तारा, परमजीत सिंह भोरा, लखविंदर सिंह, शमशेर सिंह और गुरमीत सिंह शामिल थे।
हवारा, तारा और भोरा बाद में 2004 के बुड़ैल जेल फरारी कांड से भी जुड़े। यह मामला देश के सबसे चर्चित जेल-फरारी मामलों में शामिल है।
हवारा को शुरुआत में 2007 में मृत्युदंड सुनाया गया था। बाद में 2010 में उसकी सजा को उम्रकैद में बदल दिया गया। वह वर्तमान में दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद है।
सिख धार्मिक और राजनीतिक परिदृश्य के कुछ वर्गों में भी हवारा की पहचान महत्वपूर्ण हो गई है। 2015 में सरबत खालसा ने हवारा को अकाल तख्त का जत्थेदार घोषित किया था। हालांकि, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने इस फैसले का विरोध किया था।
बुड़ैल जेल फरारी
2004 की जेल फरारी ने हवारा की कुख्याति को और बढ़ा दिया। हवारा, तारा और भोरा कथित तौर पर जेल के अंदर से 90 फुट से अधिक लंबी सुरंग खोदकर बुड़ैल जेल से फरार हुए थे।
हवारा को 2005 में दिल्ली से गिरफ्तार किया गया, जबकि भोरा को 2006 में पकड़ा गया। तारा कई वर्षों तक फरार रहा और 2015 में थाईलैंड में गिरफ्तार किया गया।
बेअंत सिंह हत्याकांड के अन्य आरोपी भी अब तक जेल में बंद हैं। पूर्व पंजाब पुलिस कांस्टेबल राजोआना, जिसे वैकल्पिक आत्मघाती हमलावर बताया गया था, पटियाला सेंट्रल जेल में बंद है। उसने अपनी संलिप्तता स्वीकार की थी और कानूनी बचाव करने से इनकार कर दिया था। उसकी मृत्युदंड की सजा पर रोक लगी हुई है।
तारा चंडीगढ़ की बुड़ैल जेल में बंद है, जबकि भोरा तिहाड़ जेल में है। लखविंदर सिंह, शमशेर सिंह और गुरमीत सिंह बुड़ैल जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं।
पैरोल मांग का राजनीतिक महत्व
मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप से जेल में बंद सिख उग्रवादियों और उनके समर्थकों से जुड़े मुद्दे पर नई राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई है। मान सरकार ने यह संकेत नहीं दिया है कि पैरोल का अनुरोध 1995 के हत्याकांड पर उसके रुख में किसी बदलाव को दर्शाता है। इसके बावजूद इस कदम ने काफी राजनीतिक ध्यान आकर्षित किया है।
पंथिक राजनीतिक संगठनों के लिए यह मुद्दा चुनावी महत्व रखता है, क्योंकि सिख समुदाय के कुछ वर्गों में हवारा को अब भी समर्थन प्राप्त है। इसलिए यह अनुरोध राजनीतिक रूप से संवेदनशील समय में सामने आया है, जब राजनीतिक दल पंजाब के मतदाताओं के विभिन्न वर्गों को अपने पक्ष में करने के प्रयास तेज कर सकते हैं।
अब राज्यपाल को राज्य सरकार के अनुरोध पर विचार करना होगा। जब तक इस पर फैसला नहीं हो जाता, तब तक यह कदम पंजाब में तीखी राजनीतिक चर्चा का विषय बने रहने की संभावना है।
