चंडीगढ़(गुरप्रीत सिंह):पंजाब में निजी स्कूलों की मनमानी फीस वृद्धि पर रोक लगाने के लिए पंजाब विधानसभा ने सोमवार को ‘पंजाब रेगुलेशन ऑफ फीस ऑफ अनएडेड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस (अमेंडमेंट) बिल, 2026’ को ध्वनिमत से सर्वसम्मति से पारित कर दिया। बिल के पारित होने से छात्रों और अभिभावकों को अत्यधिक एवं अस्पष्ट फीस वसूली के खिलाफ मजबूत सुरक्षा मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
नए कानून के तहत निजी स्कूल नए शैक्षणिक सत्र में 5 प्रतिशत से अधिक फीस नहीं बढ़ा सकेंगे। किसी भी मद के तहत अभिभावकों से वसूली गई हर राशि को फीस माना जाएगा और उसे नियमन के दायरे में लाया जाएगा। पंजाब सरकार निजी स्कूलों का फॉरेंसिक ऑडिट भी कराएगी, ताकि अतिरिक्त वसूली की पहचान की जा सके और यह सुनिश्चित किया जा सके कि अतिरिक्त राशि अभिभावकों को वापस मिले।
कानून का उल्लंघन करने पर पहली बार 50 हजार रुपये, दूसरी बार एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा, जबकि तीसरी बार उल्लंघन होने पर स्कूल की मान्यता रद्द करने की कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षा को कारोबार नहीं बनने देंगे: भगवंत मान
बिल पर चर्चा का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने पिछली कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कोविड के दौरान जब स्कूल बंद थे और स्कूल वाहन भी नहीं चल रहे थे, तब भी अभिभावकों को ट्रांसपोर्ट फीस देने के लिए मजबूर किया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पंजाब में अब ऐसी लूट की अनुमति नहीं दी जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार न तो शिक्षा को व्यापार बनने देगी और न ही राज्य में शिक्षा माफिया को पनपने देगी। उन्होंने कहा कि शिक्षा एक नेक और पवित्र कार्य है तथा इसे मुनाफा कमाने का जरिया नहीं बनाया जाना चाहिए।
मान ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार शैक्षणिक संस्थान अलग-अलग मदों में फीस वसूलकर शिक्षा के नाम पर अंधी कमाई नहीं कर सकते। निजी संस्थानों द्वारा किसी भी माध्यम से वसूली गई फीस का पता लगाने के लिए फॉरेंसिक ऑडिट कराया जाएगा।
5 फीसदी से अधिक फीस वृद्धि के लिए पूर्व मंजूरी जरूरी
मुख्यमंत्री ने कहा कि नया बिल सालाना फीस वृद्धि की सीमा 5 प्रतिशत तय करता है। इससे अधिक फीस बढ़ाने के लिए नियामक संस्था की पूर्व मंजूरी लेना अनिवार्य होगा।
इसके अलावा जिन निजी स्कूलों ने पिछले तीन वर्षों में कुल मिलाकर 15 प्रतिशत से अधिक फीस बढ़ाई है, उन्हें अभिभावकों से वसूली गई अतिरिक्त राशि वापस करनी होगी। सरकार के मुताबिक, इस कदम से निजी स्कूलों की फीस व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी तथा 32 लाख से अधिक छात्रों और उनके परिवारों को अनुचित वित्तीय बोझ से बचाया जा सकेगा।
ट्रांसपोर्ट, बिल्डिंग फंड समेत सभी शुल्क फीस के दायरे में
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि छात्रों से वसूले जाने वाले सभी खर्च, जिनमें ट्रांसपोर्टेशन, बिल्डिंग फंड और अन्य विविध शुल्क शामिल हैं, उन्हें नियमन के उद्देश्य से ट्यूशन फीस का हिस्सा ही माना जाएगा।
उन्होंने कहा कि अभिभावकों द्वारा दिया जाने वाला एक-एक पैसा फीस माना जाएगा और पिछले तीन वर्षों में वसूली गई कोई भी अतिरिक्त फीस वापस करनी होगी।
फीस वृद्धि के सभी प्रस्तावों की जांच और नियमन के लिए डिप्टी कमिश्नर की अध्यक्षता में जिला रेगुलेटरी कमेटी गठित की जाएगी।
करीब 7,800 निजी स्कूलों के 32 लाख से अधिक छात्रों को मिलेगा लाभ
मुख्यमंत्री ने बताया कि पंजाब में करीब 7,800 निजी स्कूलों में 32 लाख से अधिक छात्र पढ़ रहे हैं। इस बिल का उद्देश्य इन छात्रों और उनके परिवारों के हितों की रक्षा करना है। इससे छात्रों और अभिभावकों को मनमानी फीस वृद्धि से सुरक्षा मिलेगी और निजी शिक्षण संस्थानों के कामकाज में पारदर्शिता आएगी।
मान ने कहा कि उनकी सरकार ने राज्य में हर गैर-कानूनी गठजोड़ पर लगाम लगाई है और शिक्षा माफिया को पनपने नहीं दिया जाएगा।
उल्लंघन पर चरणबद्ध कार्रवाई
मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि कोई निजी स्कूल कानून का उल्लंघन करता है तो पहली बार 50 हजार रुपये और दूसरी बार एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। तीसरी बार उल्लंघन होने पर छात्रों के हितों की रक्षा के लिए स्कूल की मान्यता रद्द करने के साथ अन्य सख्त कार्रवाई भी की जाएगी।
उन्होंने कहा कि यह फैसला शिक्षा क्षेत्र में मुनाफाखोरी पर रोक लगाने और यह सुनिश्चित करने की दिशा में निर्णायक कदम है कि निजी स्कूल व्यावसायिक लाभ के बजाय छात्रों और अभिभावकों के हित में काम करें।
सरकारी स्कूलों में सुधार का दावा
भगवंत मान ने कहा कि पहले सरकारी और निजी स्कूलों की किताबों, पाठ्यक्रम और शिक्षकों में काफी अंतर हुआ करता था। उनके मुताबिक, सरकारी स्कूल पहले केवल मिड-डे मील केंद्रों तक सीमित रह गए थे, लेकिन अब राज्य सरकार ने इन स्कूलों की स्थिति में व्यापक सुधार किया है।
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि पंजाब शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है और राज्य सरकार के प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि 2026 की NEET परीक्षा में पंजाब के 882 छात्रों ने सफलता हासिल की, जबकि 2021 में यह संख्या केवल 80 थी।
उन्होंने कहा कि राज्य के हर छात्र को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना पंजाब सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।
