मोगा में पुलिस और रवनीत बिट्टू आमने-सामने, सुरक्षा जांच के चलते कुछ देर रुका काफिला

मोगा(गुरप्रीत सिंह): गुरुवार को मोगा में एक संक्षिप्त टकराव उस समय सामने आया जब केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू का काफिला पंजाब पुलिस द्वारा रोक दिया गया, जबकि वह मोगा सदर पुलिस स्टेशन की ओर जा रहे थे। यह घटना पुलिस थाना परिसर के बाहर हुए विस्फोट के एक दिन बाद हुई, जिसने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी थी।

बुधवार के धमाके के बाद तैयार की गई सख्त सुरक्षा योजना के तहत लुधियाना‑मोगा रोड पर शहर के प्रवेश द्वार पर पुलिस ने कई बैरिकेड लगा दिए थे। इन प्रतिबंधों ने अस्थायी रूप से मंत्री के काफिले को आगे बढ़ने से रोक दिया, जिसके परिणामस्वरूप बिट्टू, उनके समर्थकों और चेकपोस्ट पर तैनात पुलिस अधिकारियों के बीच आमने‑सामने की बातचीत हुई।

सुरक्षा व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहे उप पुलिस अधीक्षक (DSP) जतिंदर सिंह गिल ने मंत्री को जानकारी दी कि हाल ही में पुलिस स्टेशन पर हुए विस्फोट के बाद यह पाबंदियाँ केवल एहतियाती तौर पर लगाई गई हैं।

कुछ मिनटों तक चर्चा जारी रहने के बाद अधिकारियों ने बैरिकेड हटाने का फैसला किया, जिससे बिट्टू और उनका काफिला पुलिस स्टेशन की ओर आगे बढ़ सका।

बुधवार को मोगा सदर पुलिस स्टेशन में हुए विस्फोट के बाद सुरक्षा अलर्ट जारी किया गया था। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, मोटरसाइकिल पर सवार दो अज्ञात व्यक्तियों ने कथित तौर पर एक विस्फोटक वस्तु—जिसे हैंड ग्रेनेड होने का संदेह है—मोगा‑फिरोज़पुर हाइवे से पुलिस स्टेशन के परिसर में फेंकी और फिर फरार हो गए।

हालांकि धमाके से स्थानीय निवासियों और सुरक्षा कर्मियों में अफरातफरी मच गई, अधिकारियों ने पुष्टि की कि कोई हताहत या बड़े स्तर पर संरचनात्मक क्षति की रिपोर्ट नहीं है।

घटना के बाद फोरेंसिक विशेषज्ञों और एंटी‑सैबोटाज टीमों ने साक्ष्य एकत्र करने के लिए क्षेत्र को सुरक्षित कर लिया। जांच अधिकारी हमले के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान के उद्देश्य से आसपास की सड़कों और हाइवे की CCTV फुटेज भी खंगाल रहे हैं।

मोगा पहुँचने के बाद बिट्टू ने पंजाब में कानून‑व्यवस्था की स्थिति के कथित रूप से बिगड़ने पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि आपराधिक गिरोह और रंगदारी नेटवर्क लगातार अधिक सक्रिय होते जा रहे हैं और राज्य की सार्वजनिक सुरक्षा बनाए रखने की क्षमता पर सवाल उठाया।

केंद्रीय मंत्री ने हाल में पुलिस प्रतिष्ठानों को निशाना बनाकर किए गए हमलों का भी उल्लेख किया और कहा कि ऐसी घटनाएँ सुरक्षा तैयारी को लेकर गंभीर चिंताएँ पैदा करती हैं। उनका कहना था कि यदि पुलिस स्टेशन ही हमलों की चपेट में आ जाएँ, तो यह संगठित अपराध से निपटने के लिए और अधिक सख़्त कदम उठाने की ज़रूरत को दर्शाता है।

By Gurpreet Singh

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