चंडीगढ़(गुरप्रीत सिंह): दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ की सार्वजनिक स्क्रीनिंग पंजाब के कई हिस्सों में जारी है, ऐसे में राज्य के आम आदमी पार्टी (AAP) अध्यक्ष अमन अरोड़ा ने कहा है कि फिल्म पर रोक लगाने का निर्णय राज्य प्रशासन नहीं बल्कि केंद्र सरकार के पास है।
मामले पर बोलते हुए अरोड़ा ने बताया कि गाँवों और कस्बों में हो रही स्क्रीनिंग निजी व्यक्तियों और स्थानीय संगठनों द्वारा आयोजित की जा रही हैं। उनके अनुसार, जब तक कोई विशेष कानूनी प्रावधान लागू न किया जाए, पंजाब सरकार के पास ऐसे आयोजनों में हस्तक्षेप करने की सीमित शक्ति है।
उन्होंने कहा कि वही प्राधिकरण जो किसी OTT प्लेटफ़ॉर्म से फिल्म हटवा सकता है, आवश्यकता पड़ने पर व्यापक प्रतिबंध लगाने की शक्ति भी रखता है। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान या अन्य कैबिनेट सहयोगियों से इस मसले पर चर्चा नहीं की है और यह केवल उनकी निजी राय है।
‘सतलुज’, जो मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन और कार्य पर आधारित है, के इर्द‑गिर्द चल रही बहस ने पंजाब में तीखी राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ पैदा की हैं। जबकि कई लोगों ने फिल्म को बिना प्रतिबंध देखने की मांग की है, अन्य लोग मानते हैं कि राज्य के उग्रवाद‑काल के घटनाक्रम को सिनेमा के माध्यम से दोबारा देखना दर्दनाक यादें ताज़ा कर सकता है और मौजूदा फूट को गहरा कर सकता है।
अरोड़ा ने चेतावनी दी कि किसी फिल्म को दबाने के प्रयास का अक्सर उल्टा असर होता है और यह सार्वजनिक जिज्ञासा बढ़ा देता है। उनके मत में, अति प्रतिबंधित कदम अनजाने में और विवाद खड़ा कर सकते हैं बजाय इसके कि समस्या सुलझे।
उन्होंने ज़ोर दिया कि पंजाब ने वर्षों तक हिंसा और संघर्ष सहा है, इसलिए सभी राजनीतिक दलों के लिए ज़िम्मेदारी से काम करना महत्वपूर्ण है। उग्रवाद के दौर की मानव कीमत याद करते हुए अरोड़ा ने कहा कि बहुत से मासूम लोग मारे गए—चाहे आतंकवादियों के हाथों या सुरक्षा कार्रवाइयों के दौरान। उन्होंने राजनीतिक नेताओं से अपील की कि सार्वजनिक बहसों में ऐसे भावनात्मक मुद्दों को भड़काने या पुराने जख्म खोलने से बचना चाहिए।
संयम की अपील करते हुए AAP नेता ने कहा कि सांप्रदायिक सौहार्द और सामाजिक शांति बनाए रखना हर राजनीतिक दल की शीर्ष प्राथमिकता होनी चाहिए।
बातचीत के दौरान अरोड़ा ने कांग्रेस पर भी निशाना साधा और उसके आंतरिक मतभेदों पर सवाल उठाए, यह पूछते हुए कि क्या अपने ही भीतर संघर्ष कर रही पार्टी पंजाब में प्रभावी विकल्प के रूप में खुद को पेश कर सकती है। उन्होंने सुझाव दिया कि राज्य संचालन पर टिप्पणी करने से पहले आंतरिक विवाद सुलझाना कांग्रेस की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
‘सतलुज’ को लेकर चल विवाद पंजाब की राजनीतिक बहसों में छाया हुआ है, जहाँ बहसें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, ऐतिहासिक जवाबदेही और राज्य के उग्रवाद‑काल की संवेदनशील विरासत पर केन्द्रित हैं।
