नई दिल्ली(राजीव शर्मा):भारत के राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान में तीन मात्रात्मक लक्ष्य है जिसमें सकल घरेलू उत्पाद की समग्र उत्सर्जन तीव्रता में कमी, स्थापित विद्युत शक्ति क्षमता में गैर-जीवाश्म ईंधन-आधारित ऊर्जा संसाधनों की हिस्सेदारी बढ़ाना और अतिरिक्त कार्बन सिंक का सृजन करना शामिल है।
भारत ने 2022 में अपने सकल घरेलू उत्पाद की उत्सर्जन तीव्रता में 2005 के स्तर की तुलना में 37.38% की कमी थी जबकि एनडीसी का लक्ष्य 2030 तक उत्सर्जन तीव्रता में 45% की कमी करना है। गैर-जीवाश्म ईंधन-आधारित ऊर्जा स्रोतों से संचयी स्थापित विद्युत क्षमता का हिस्सा जून 2025 में 50% से ज्यादा हो गया, जिससे प्रतिबद्ध समयसीमा से पांच वर्ष पहले ही एनडीसी लक्ष्य हासिल हो गया। 30 जून 2026 तक, गैर-जीवाश्म ईंधन-आधारित ऊर्जा संसाधनों का देश की कुल स्थापित विद्युत क्षमता में 54.18% हिस्सा था। भारत ने 2005 से 2022 के दौरान 2.44 बिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य का अतिरिक्त कार्बन सिंक सृजित किया है, जबकि एनडीसी का लक्ष्य 2030 तक अतिरिक्त वन और वृक्ष आवरण के माध्यम से 2.5–3.0 बिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य का अतिरिक्त कार्बन सिंक सृजित करना है।
अप्रैल, 2026 में संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क कन्वेंशन को प्रस्तुत भारत की पहली द्विवार्षिक पारदर्शिता रिपोर्ट में बताया गया है कि आर्थिक वृद्धि और जीडीपी से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के अलगाव का श्रेय नवीकरणीय ऊर्जा की तैनाती को बढ़ावा देने वाली नीतियों और सभी आर्थिक गतिविधियों की ऊर्जा दक्षता में सुधार को दिया जा सकता है। गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित स्थापित विद्युत क्षमता में हिस्सेदारी के संबंध में एनडीसी लक्ष्य की समय से पहले उपलब्धि नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन और इसके राष्ट्रीय विद्युत ग्रिड में एकीकरण को प्रोत्साहित करने वाली नीतियों की एक विस्तृत श्रृंखला के कारण संभव हुई है। कार्बन सिंक का सृजन राष्ट्रीय और राज्य सरकारों द्वारा संरक्षण और पुनर्स्थापन को दी गई उच्च प्राथमिकता के कारण संभव हुआ है। यह दृष्टिकोण वनों और जैव विविधता के संरक्षण को सुनिश्चित करने, हरित आवरण बढ़ाने और वन-निर्भर समुदायों के अधिकारों की रक्षा करते हुए संरक्षण गतिविधियों में लोगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए नीतियों, अधिनियमों, नियमों, कार्यक्रमों और योजनाओं के ढांचे में परिलक्षित होता है।
वर्ष 2035 के लिए एनडीसी लक्ष्यों को बढ़ाया गया है, जिसमें 2005 के स्तर की तुलना में जीडीपी की उत्सर्जन तीव्रता को 47% तक कम करने, गैर-जीवाश्म ईंधन-आधारित ऊर्जा संसाधनों से 60% संचयी स्थापित विद्युत क्षमता प्राप्त करने, और वन एवं वृक्ष आवरण के माध्यम से 3.5 से 4.0 बिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य का कार्बन सिंक बनाने के मात्रात्मक लक्ष्य शामिल हैं, जबकि आधार वर्ष 2005 है। एनडीसी में पांच गुणात्मक लक्ष्य भी शामिल हैं, जिनका उद्देश्य ‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य के अनुरूप सतत जीवनशैली को बढ़ावा देना, अनुकूलन क्षमता को बढ़ाना और जलवायु-अनुकूल व स्वच्छ रास्ते को अपनाना है।
भारत की महत्वपूर्ण जलवायु प्रतिबद्धताओं को लागू करने में हुई प्रगति को अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी, खाद्य और कृषि संगठन, जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र ढांचागत सम्मेलन, संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम, विश्व बैंक, अंतर्राष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी आदि सहित कई प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय निकायों से व्यापक मान्यता मिली है।
यह जानकारी पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री कीर्ति वर्धन सिंह ने आज राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में दी।
