लॉस एंजिलिस मेयर चुनाव में नित्या रमन आगे, इतिहास रचने पर टिकी निगाहें

वाशिंगटन(राजीव शर्मा): भारतीय-अमेरिकी प्रत्याशी ने 3 नवंबर के चुनाव से पहले बेघरी, सार्वजनिक सुरक्षा और नेतृत्व को लेकर मौजूदा मेयर करेन बैस को चुनौती दी

केरल में जन्मीं राजनेत्री नित्या रमन लॉस एंजिलिस मेयर चुनाव में अग्रणी दावेदार के रूप में उभरी हैं और एक गर्मागर्म टेलीविजन बहस के बाद मौजूदा मेयर करेन बैस पर बढ़त बनाए हुए हैं। यदि रमन 3 नवंबर के चुनाव जीतती हैं, तो वे संयुक्त राज्य अमेरिका के सबसे बड़े शहरों में से एक लॉस एंजिलिस की पहली भारतीय-अमेरिकी मेयर बनेंगी।

45 वर्षीय रमन और 73 वर्षीय बैस दोनों डेमोक्रेट हैं और मंगलवार को हुई बहस में आमने-सामने आईं। दोनों ने शहर के बेघरी संकट, पुलिस नेतृत्व और सार्वजनिक सुरक्षा पर तीखी आलोचना की। उनकी टकराहट ने मतदाताओं के अगले मेयर चुनने से पहले शहर के शासन के प्रति दोनों प्रत्याशियों के अलग-अलग दृष्टिकोणों को उजागर किया।

डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट आंदोलन की सदस्य रमन पिछले छह वर्षों से लॉस एंजिलिस सिटी काउंसिल की सदस्य हैं। वे पहले बैस के पुनर्चुनाव के समर्थन में थीं, लेकिन बाद में स्वयं मौजूदा मेयर को चुनौती देने का निर्णय लिया।

रमन ने बैस के नेतृत्व पर सवाल उठाए
बहस के दौरान रमन ने बैस पर आरोप लगाया कि जनवरी 2025 में लॉस एंजिलिस को विनाशकारी पालिसेड्स अग्निकांड का सामना करना पड़ा, तब वे अनुपस्थित थीं। उन्होंने कहा कि आपदा के दौरान वे शहर के आपात संचालन केंद्र में रहीं और स्थानांतरित निवासियों की जरूरतों को पूरा करने में मदद कर रही थीं।

रमन ने याद किया कि आपातकाल के दौरान निवासी बार-बार पूछ रहे थे कि उनकी मेयर कहां है। उन्होंने वादा किया कि चुनी जाने पर वे शहर को प्रभावित करने वाले संकटों के जवाब में सीधे तौर पर शामिल रहेंगी।

रमन ने कहा, “अगर मैं मेयर हूं, तो आपको हमारी मेयर कहां है, यह पूछना नहीं पड़ेगा। मैं मोर्चे पर रहूंगी।”

उन्होंने यह भी तर्क दिया कि लॉस एंजिलिस उन्हें जो गिरावट, कुप्रबंधन और बहानों के रूप में वर्णित किया, उसके और चार साल बर्दाश्त नहीं कर सकता।

बैस ने जोरदार जवाब देते हुए रमन की मेयर पद के लिए तैयारी पर सवाल उठाया और उन्हें “अनावश्यक” तथा “अनिर्णायक” बताया। बहस में बेघरी से निपटने के शहर के तरीके और सार्वजनिक सुरक्षा को लेकर चिंताओं पर भी मतभेद सामने आए।

सर्वे रमन को बढ़त दे रहे हैं
कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कली के इंस्टीट्यूट ऑफ गवर्नमेंटल स्टडीज द्वारा किए गए और लॉस एंजिलिस टाइम्स द्वारा सह-प्रायोजित सर्वे में बहस से पहले रमन को बैस पर 11 अंकों की बढ़त मिली थी।

15 से 20 सितंबर के बीच किए गए इस सर्वे में पाया गया कि सर्वेक्षण में शामिल 39% मतदाताओं ने रमन का समर्थन किया, जबकि बैस के पक्ष में 28% थे। लगभग एक-तिहाई उत्तरदाता अनिर्णीत रहे, जिससे चुनाव दिवस से पहले मुकाबले में बदलाव की काफी गुंजाइश बची है।

प्रेडिक्शन मार्केट कलशी ने भी बहस के बाद प्रतिस्पर्धी मुकाबले को दर्शाया। बुधवार को रमन की जीत की संभावना 56% रखी गई, जबकि बैस के लिए यह आंकड़ा 45% था।

हालांकि ये आंकड़े रमन के लिए बढ़ती गति का संकेत देते हैं, अंतिम परिणाम मतदाता उपस्थिति और शेष चुनावी अभियान के दौरान अनिर्णीत मतदाताओं के विकल्प पर निर्भर करेगा।

केरल से अमेरिकी राजनीति तक
28 जुलाई 1981 को केरल में जन्मीं रमन छह साल की उम्र में परिवार के साथ लुइसियाना चली गईं। उन्होंने बाद में हार्वर्ड विश्वविद्यालय में पढ़ाई की, जहां उन्होंने राजनीतिक सिद्धांत में स्नातक की डिग्री अर्जित की और फिर मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से शहरी नियोजन में मास्टर डिग्री पूरी की।

शहरी नियोजन में उनकी शैक्षिक पृष्ठभूमि ने आवास, शहरी सेवाओं और लॉस एंजिलिस के निवासियों की चुनौतियों पर उनके राजनीतिक ध्यान को आकार दिया है।

रमन ने बेघरी और बढ़ती जीवन-यापन लागत को अपने चुनावी अभियान के केंद्रीय विषय बनाया है। उन्होंने बेघरी से निपटने के लिए खर्च की गई सैकड़ों करोड़ डॉलर की प्रभावशीलता पर सवाल उठाया है, जबकि यह समस्या शहर के समुदायों को प्रभावित करती जा रही है।

उन्होंने ऐसे शहर के लिए काम करने का वादा किया है, जो अधिक कार्यशील और किफायती हो, जहां निवासी बढ़ती लागत से बाहर धकेले जाने की चिंता के बिना अपनी महत्वाकांक्षाओं को पूरा कर सकें।

भारतीय-अमेरिकी समुदाय के लिए ऐतिहासिक अवसर
अमेरिकी नगरपालिका राजनीति में भारतीय-अमेरिकियों के लिए ऐतिहासिक सफलता की संभावना के कारण रमन का चुनावी अभियान लॉस एंजिलिस से परे ध्यान खींच रहा है।

बैस को उनकी चुनौती ने चुनाव को नेतृत्व, आपातकालीन तैयारी और शहर की नीतियों की प्रभावशीलता पर व्यापक बहस में भी बदल दिया है।

उद्धृत पूर्व-चुनाव सर्वे में रमन की बढ़त और मुकाबले में उनकी बढ़ती स्थिति के साथ 3 नवंबर का मतदान लॉस एंजिलिस के लिए एक महत्वपूर्ण मुकाबला बनता जा रहा है। जीत अमेरिकी सार्वजनिक जीवन में भारतीय-अमेरिकी प्रतिनिधित्व के लिए एक बड़ा मील का पत्थर होगी, साथ ही रमन को शहर की दबावपूर्ण शहरी चुनौतियों से निपटने के प्रयासों के केंद्र में ले आएगी।

By Rajeev Sharma

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