वाशिंगटन (राजीव शर्मा): नासा के अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन और जेसिका मीर ने अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) के बाहर एक स्पेसवॉक को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इस दौरान उन्होंने ऐसे संरचनात्मक (स्ट्रक्चरल) कार्य किए, जो अतिरिक्त सोलर एरे (सौर पैनलों) की स्थापना का मार्ग प्रशस्त करेंगे।
यह ऑपरेशन ऑर्बिटल लैब (अंतरिक्ष स्टेशन) के पावर चैनल को अपग्रेड करने पर केंद्रित था और यह स्टेशन की बिजली उत्पादन क्षमताओं को मजबूत करने के नासा के निरंतर प्रयासों का हिस्सा है।
अंतरिक्ष स्टेशन के बाहर किया गया काम
मेनन और मीर ‘क्वेस्ट एयरलॉक’ (Quest airlock) के जरिए ISS से बाहर निकले और उन्होंने स्टेशन के बाहरी हिस्से में काम करते हुए कई घंटे बिताए। उनका मुख्य कार्य स्टेशन के पावर चैनल से जुड़े एक ‘मॉडिफिकेशन किट’ को असेंबल करना था।
यह नया स्थापित हार्डवेयर भविष्य में अतिरिक्त सौर पैनलों को जोड़ने में मदद करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो ISS को अधिक बिजली-उत्पादन क्षमता प्रदान करेंगे।
यह स्पेसवॉक गुरुवार को सुबह 8:33 बजे EDT (भारतीय समयानुसार शाम 6:03 बजे) शुरू हुई और दोपहर 3:00 बजे EDT (शुक्रवार को भारतीय समयानुसार मध्यरात्रि 12:30 बजे) समाप्त हुई। अंतरिक्ष यात्रियों ने स्टेशन के बाहर कुल 6 घंटे और 27 मिनट का समय बिताया।
अनिल मेनन की पहली स्पेसवॉक
यह मिशन अनिल मेनन के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण था, जिन्होंने अपने जीवन की पहली स्पेसवॉक की।
वहीं जेसिका मीर के लिए यह छठी स्पेसवॉक थी।
अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के समर्थन में की गई यह 281वीं स्पेसवॉक थी, जो ऑर्बिटल लैब को चालू रखने के लिए आवश्यक व्यापक रखरखाव (मेंटेनेंस) और अपग्रेड कार्यों को दर्शाती है।
ISS को मजबूत करेगा सोलर अपग्रेड
अंतरिक्ष यात्रियों द्वारा पूरे किए गए यह बदलाव ISS पावर सिस्टम को आधुनिक बनाने के एक व्यापक कार्यक्रम का हिस्सा हैं।
अतिरिक्त सौर पैनल स्टेशन की बिजली आपूर्ति का विस्तार करने में मदद करेंगे, जिससे गतिविधियों, अनुसंधान, जीवन-सहायता प्रणालियों (लाइफ-सपोर्ट सिस्टम) और अन्य उपकरणों को मदद मिलेगी। इन सुधारों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना भी है कि यह पुराना होता अंतरिक्ष स्टेशन वैज्ञानिक और तकनीकी मिशनों को आगे भी जारी रख सके।
इसलिए, यह नवीनतम स्पेसवॉक केवल एक नियमित रखरखाव नहीं है, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के बुनियादी ढांचे और परिचालन क्षमता को बढ़ाने के दीर्घकालिक प्रयास में एक और महत्वपूर्ण कदम है।
