नई दिल्ली (राजीव शर्मा): विदेश मंत्रालय (MEA) ने सोशल मीडिया पर किए जा रहे उन दावों को खारिज कर दिया है, जिनमें कहा जा रहा था कि नई दिल्ली में ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में भाग लेने के बाद कई विदेशी नेता अस्वस्थ हो गए थे। मंत्रालय ने इन पोस्टों को भ्रामक करार दिया और उपयोगकर्ताओं को असत्यापित जानकारी फैलाने से बचने की चेतावनी दी है।
मंत्रालय की फैक्ट-चेक टीम ने गुरुवार को ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट के जरिए इन दावों पर प्रतिक्रिया दी। टीम ने सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे इन संदेशों को फर्जी (फेक) बताया और लोगों से ऑनलाइन साझा की जा रही सामग्री को लेकर सतर्क रहने की अपील की।
यह विवाद तब गहराया जब दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने भारत से लौटने के बाद अपने सार्वजनिक कार्यक्रमों से कुछ समय के लिए दूरी बना ली।
दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति कार्यालय के अनुसार, रामाफोसा के अस्वस्थ होने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें आराम करने की सलाह दी थी। वह सोमवार को ब्रिक्स बैठक से वापस लौटे थे और तभी से आराम कर रहे हैं, जबकि सरकारी कामकाज अन्य अधिकारियों के माध्यम से जारी है।
राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा कि रामाफोसा ने आवश्यकता पड़ने पर अपनी जगह कुछ कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए मंत्रियों से अनुरोध किया था।
यह स्थिति दक्षिण अफ्रीका के उप-राष्ट्रपति पॉल माशातिले की अनुपस्थिति के साथ भी मेल खा गई, जो एक मामूली मेडिकल प्रक्रिया (इलाज) के बाद स्वास्थ्य लाभ ले रहे थे। माशातिले ने कहा कि वह डॉक्टरी सलाह का पालन करना जारी रखेंगे, जबकि उनका कार्यालय और सरकारी सहयोगी मौजूदा जिम्मेदारियों को संभालेंगे।
बाद में यह पूरा घटनाक्रम ऑनलाइन अटकलों का विषय बन गया, जहां कुछ पोस्टों में इन स्वास्थ्य समस्याओं को नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन से जोड़ने का प्रयास किया गया।
सोशल मीडिया पर अलग से ऐसे दावे भी सामने आए जिनमें आरोप लगाया गया कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने स्वास्थ्य कारणों से शिखर सम्मेलन में अपनी भागीदारी को बीच में ही छोड़ दिया था और एक विशेष विमान से वापस चीन लौट गए थे। इन दावों की भी स्वतंत्र रूप से कोई पुष्टि नहीं हुई है।
शी 12 सितंबर को नई दिल्ली शिखर सम्मेलन में उपस्थित थे और अपनी इस यात्रा के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक भी की थी। सोशल मीडिया पर चल रहे दावों और शिखर सम्मेलन में उनकी भागीदारी के बीच कोई संबंध स्थापित करने वाली कोई भी सत्यापित जानकारी मौजूद नहीं है।
भारत ने 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी की थी। इस बैठक में विस्तारित 11 सदस्यीय समूह के नेता अंतरराष्ट्रीय मामलों, आर्थिक सहयोग, वैश्विक शासन और सदस्य देशों से जुड़े अन्य मुद्दों पर चर्चा के लिए एकजुट हुए थे।
शिखर सम्मेलन का समापन ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ को अपनाने के साथ हुआ। अन्य मुद्दों के अलावा, इस दस्तावेज में अंतरराष्ट्रीय विवादों को सुलझाने के लिए बातचीत और कूटनीति पर बल दिया गया तथा मजबूत बहुपक्षीय सहयोग के प्रति समर्थन दोहराया गया।
नेताओं ने एकतरफा और संरक्षणवादी उपायों का भी विरोध किया, जिनके बारे में उन्होंने कहा कि वे अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप नहीं हैं।
घोषणापत्र में सशस्त्र संघर्षों और परमाणु जोखिमों से जुड़ी चिंताओं को भी रेखांकित किया गया, साथ ही वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए अधिक अंतरराष्ट्रीय समन्वय का आह्वान किया गया।
विदेश मंत्रालय का यह ताजा स्पष्टीकरण सोशल मीडिया पर साझा किए जा रहे दावों की बढ़ती जांच-पड़ताल के बीच आया है, विशेष रूप से तब जब वे विदेशी नेताओं की यात्राओं और बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों से जुड़े हों। मंत्रालय की यह चेतावनी इस बात पर जोर देती है कि ऐसे घटनाक्रमों का आकलन करते समय निराधार पोस्टों के बजाय सत्यापित जानकारी पर भरोसा करना अत्यंत आवश्यक है।
