लोकसभा अध्यक्ष ने युवाओं से विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए संविधान से प्रेरणा लेने की अपील की

नई दिल्ली(राजीव शर्मा):लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने आज संविधान सदन के ऐतिहासिक सेंट्रल हॉल में युवा कार्य एवं खेल मंत्रालय द्वारा लोकसभा सचिवालय के संसदीय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (पीआरआईडीई) के सहयोग से आयोजित विकसित भारत युवा संसद 2026 का उद्घाटन किया। देश भर से एकत्रित युवा प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए श्री बिरला ने उन्हें याद दिलाया कि वे उसी हॉल में खड़े हैं जो भारत की महान लोकतांत्रिक परंपराओं का प्रतीक है। उन्होंने भारत के संविधान को विश्व का सबसे विशाल और सभी नागरिकों के लिए एक निर्णायक मार्गदर्शक दस्तावेज बताते हुए युवाओं से आग्रह किया कि वे विकसित भारत के रोडमैप पर विचार-विमर्श करते समय इस ऐतिहासिक स्थल से प्रेरणा लें।

भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में युवाओं की व्यापक भागीदारी पर प्रकाश डालते हुए श्री बिरला ने कहा कि 50 लाख से अधिक युवा अब युवा संसद कार्यक्रम से सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि राज्यों, भाषाओं और सांस्कृतिक पृष्ठभूमियों से परे यह विविध समूह एक ही संकल्प से एकजुट है: एक विकसित भारत के सपने को साकार करना। उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 के सपने को साकार करने की जिम्मेदारी युवाओं पर है। उन्होंने युवा मामलों और खेल मंत्रालय की सराहना करते हुए कहा कि यह मंच लोकतांत्रिक मूल्यों, संवाद और नेतृत्व के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में कार्य करता है।

लोकसभा अध्यक्ष ने इस बात पर बल देते हुए कहा कि लोकतंत्र भारत की कार्य संस्कृति और प्राचीन परंपराओं में गहराई से समाया हुआ है और देश की लोकतांत्रिक यात्रा वैश्विक स्तर पर अद्वितीय है। भारत की गतिशीलता का उल्‍लेख करते हुए उन्होंने रेखांकित किया कि कैसे असीम विविधता के बावजूद देश स्वतंत्रता के बाद विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में सफलतापूर्वक उभरा। उन्होंने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्थाएं आयातित अवधारणाएं नहीं हैं, बल्कि प्राचीन सभाओं और समितियों के माध्यम से प्राचीन काल से विकसित हुई हैं, जिन्होंने लगातार 75 वर्षों तक सार्वजनिक भागीदारी को मजबूत करने और संस्थागत विकास को सुदृढ़ बनाने का मार्ग प्रशस्त किया है।

श्री बिरला ने भारतीय संविधान के दूरदर्शी निर्माताओं की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने गणतंत्र की स्थापना के समय से ही सभी नागरिकों को समान अधिकार प्रदान किए। राष्ट्र के संस्थापक दस्तावेज़ के मूल सिद्धांतों पर चर्चा करते हुए उन्होंने इस बात पर बल दिया कि इसमें समाज के हर वर्ग के लिए समानता, न्याय और समान अवसर के सिद्धांत अंतर्निहित हैं। उन्होंने विशेष रूप से भारत द्वारा वयस्क मताधिकार को तुरंत अंगीकार किए जाने को एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्‍होंने कहा कि कई अन्य देशों के विपरीत, जहां महिलाओं को मताधिकार बहुत बाद में मिला, भारत ने शुरुआत से ही पूर्ण समानता को प्राथमिकता दी।

लोकसभा अध्‍यक्ष ने भारत के युवाओं को राष्ट्र का नवाचार का मूल इंजन बताते हुए कहा कि भावी पीढ़ी में देश को रूपांतरित करने के लिए आवश्यक अद्वितीय ऊर्जा और “नया संकल्प” विद्यमान है। उन्होंने वैश्विक और घरेलू स्तर पर नेतृत्व की भूमिकाओं में महिलाओं की तेजी से बढ़ती भागीदारी पर विशेष बल दिया। उन्‍होंने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी से लेकर कृषि और राष्ट्रीय सुरक्षा तक, महिलाएं पारंपरिक बाधाओं को तोड़कर सामाजिक परिवर्तन को गति दे रही हैं। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक और आर्थिक भागीदारी में यह समावेशी वृद्धि देश की जारी राष्ट्र निर्माण प्रक्रिया के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

श्री बिरला ने जमीनी स्तर पर शासन में हो रही भारत की मूक क्रांति की सराहना करते हुए बताया कि कई राज्यों में स्थानीय निकायों में महिलाओं की भागीदारी ऐतिहासिक रूप से 50 प्रतिशत तक पहुंच गई है। उन्होंने ऐतिहासिक नारी शक्ति वंदन अधिनियम को इस सफलता को उच्चतम विधायी स्तरों पर दोहराने की दिशा में एक निर्णायक कदम बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह अधिनियम लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को स्थायी रूप से मजबूत करेगा और भारत के राजनीतिक परिदृश्य को पूरी तरह से बदल देगा।

लोकसभा अध्‍यक्ष ने कहा कि भारत का अनूठा सामाजिक ताना-बाना—जो नैतिकता, आध्यात्मिकता और लोकतांत्रिक संवाद से ओतप्रोत है—युवा नागरिकों को सार्वजनिक जीवन के लिए स्वाभाविक रूप से तैयार करता है और उन्हें अपनी नवाचारशीलता और सेवा भावना को देश को अभूतपूर्व वैश्विक ऊंचाइयों की ओर ले जाने के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने प्रतिभागियों को याद दिलाया कि सच्चा नेतृत्व सहानुभूति और उन नागरिकों के प्रति पूर्ण जवाबदेही में निहित है जिनका वे प्रतिनिधित्व करना चाहते हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि संविधान सदन की पवित्र दीवारों के भीतर युवा नेताओं की यह सभा अगली पीढ़ी के हृदय में लोकतांत्रिक जिम्मेदारी की एक सशक्त भावना प्रज्‍ज्वलित करेगी।

इस अवसर पर युवा मामले एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया; लोकसभा महासचिव श्री उत्पल कुमार सिंह; और युवा मामले एवं खेल मंत्रालय की सचिव डॉ. पल्लवी जैन गोविल उपस्थित थे।

By Rajeev Sharma

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