तेहरान (राजीव शर्मा): अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य कार्रवाई के एक नए दौर ने खाड़ी में तनाव को और बढ़ा दिया है। अमेरिकी हमलों में कथित तौर पर एक व्यक्ति की मौत और कई अन्य के घायल होने के बाद तेहरान ने वाशिंगटन पर राजनयिक प्रयासों को कमजोर करने का आरोप लगाया है।
ईरानी अधिकारियों ने कहा कि ताजा हमले में माशशहर (Mahshahr) शहर में एक कृषि पंपिंग स्टेशन को निशाना बनाया गया। उन्होंने इस हमले को पूरी तरह से अनुचित और तनाव बढ़ाने वाला कदम बताया। सरकार ने रुख अपनाया है कि अमेरिका द्वारा बार-बार की जा रही सैन्य कार्रवाइयों ने बातचीत के जरिए मतभेदों को सुलझाने की संभावना को काफी कमजोर कर दिया है।
यह नया टकराव होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में बढ़ते तनाव के बीच हुआ है, जो एक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण शिपिंग कॉरिडोर है और जहां से दुनिया के कच्चे तेल के निर्यात का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। इस क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों (commercial vessels) की सुरक्षा को लेकर चिंताएं पिछले कुछ दिनों में काफी तेज हो गई हैं।
अमेरिका ने मिसाइल और ड्रोन ठिकानों को बनाया निशाना
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि उसकी सेना ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर सटीक हमले (precision strikes) किए हैं, जिनमें मिसाइल बुनियादी ढांचे, तटीय निगरानी प्रणाली, हवाई रक्षा संपत्तियां और ड्रोन लॉन्च सुविधाएं शामिल हैं। अमेरिकी सेना के अनुसार, इस अभियान का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात को खतरा पहुंचाने की ईरान की क्षमता को कम करना था।
अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी पुष्टि की कि इस समन्वित अभियान के दौरान लड़ाकू विमानों, नौसैनिक जहाजों और मानवरहित हवाई व समुद्री प्रणालियों (ड्रोन) सहित उन्नत सैन्य प्लेटफॉर्मों का उपयोग किया गया।
वाशिंगटन ने इन हमलों को खाड़ी में वाणिज्यिक जहाजों पर ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) द्वारा हाल ही में किए गए कथित हमलों से जोड़ा है। तेहरान ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इस बात पर जोर दिया कि अमेरिका राजनयिक चैनलों को काम करने देने के बजाय सैन्य दबाव का इस्तेमाल कर रहा है।
सैन्य संघर्ष का यह दौर ईरान द्वारा क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमलों की जिम्मेदारी लेने के कुछ दिनों बाद आया है, जो दोनों पक्षों के बीच जवाबी कार्रवाई के निरंतर जारी चक्र का संकेत देता है।
वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर संकट का खतरा
विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि इस ताजा तनाव के परिणाम युद्ध के मैदान से कहीं आगे जा सकते हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी व्यवधान से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने, शिपिंग लागत बढ़ने और अंतरराष्ट्रीय तेल बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव आने की आशंका है।
कई देशों ने संयम बरतने की अपील की है और वाशिंगटन तथा तेहरान दोनों से आगे किसी भी सैन्य टकराव से बचने और फिर से राजनयिक बातचीत शुरू करने का आग्रह किया है। हालांकि, दोनों पक्षों की ओर से एक-दूसरे पर आरोप लगाने और जवाबी कार्रवाई करने का सिलसिला जारी रहने के कारण, फिलहाल तनाव कम होने की उम्मीदें अनिश्चित बनी हुई हैं।
