चंडीगढ़(नवल किशोर):एआई के दौर में अब सिर्फ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को इस्तेमाल करना ही नहीं, बल्कि अपनी विशेषज्ञता और व्यक्तित्व का डिजिटल स्वरूप तैयार करना भी संभव हो गया है। इसी उद्देश्य से चंडीगढ़ में आयोजित दो दिवसीय ‘क्लोन द फाउंडर’ वर्कशॉप रविवार को संपन्न हुई। वर्कशॉप में सिंगापुर सहित देश-विदेश से पहुंचे प्रतिभागियों ने अपने डिजिटल एआई क्लोन तैयार करने की तकनीक सीखी।
वर्कशॉप की खास बात यह रही कि इसमें 10 वर्षीय किशोर से लेकर 65 वर्षीय रिटायर्ड व्यक्ति और आईएएस अधिकारी तक ने हिस्सा लिया। अलग-अलग क्षेत्रों से आए प्रतिभागियों ने एआई के माध्यम से अपने ज्ञान, अनुभव, बोलने की शैली और विशेषज्ञता को डिजिटल रूप में प्रस्तुत करने की प्रक्रिया को समझा।
वर्कशॉप के दौरान प्रतिभागियों को बताया गया कि एआई को केवल सवालों के जवाब देने वाले असिस्टेंट के तौर पर इस्तेमाल करने के बजाय उसे अपनी विशेषज्ञता और कार्यशैली के अनुरूप तैयार किया जा सकता है। प्रतिभागियों ने प्रैक्टिकल सेशन में अपने क्लोन तैयार किए और एआई की संभावनाओं को करीब से समझा।
वर्कशॉप के आयोजक निपुण स्याल ने कहा कि, “एआई सिर्फ असिस्टेंट नहीं, आपका ही प्रारूप होना चाहिए। जब एआई आपके ज्ञान, अनुभव और सोचने के तरीके को समझकर आपके लिए काम करने लगे, तभी आप सही मायने में एआई एक्सपर्ट बन सकते हैं।”
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में एआई का इस्तेमाल कारोबार, शिक्षा, प्रोफेशनल सेवाओं और व्यक्तिगत ब्रांडिंग सहित लगभग हर क्षेत्र में बढ़ेगा। ऐसे में लोगों के लिए एआई को सिर्फ एक टूल की तरह इस्तेमाल करने के बजाय उसकी क्षमता को अपने काम से जोड़ना जरूरी है।
दो दिवसीय वर्कशॉप में प्रतिभागियों को एआई क्लोन बनाने के साथ-साथ इसकी व्यावहारिक उपयोगिता, व्यक्तिगत ब्रांडिंग और काम को अधिक प्रभावी बनाने के तरीकों की जानकारी दी गई। देश-विदेश से आए प्रतिभागियों ने वर्कशॉप को एआई की नई तकनीक को समझने का उपयोगी मंच बताया।
