ईस्टर्न कोलफील्ड्स ने खनन के कबाड़ से बनाया युद्धपोत का मॉडल, भारतीय नौसेना के प्रति जताया आभार

नई दिल्ली(राजीव शर्मा): कोल इंडिया लिमिटेड की सहायक कंपनी और कोयला मंत्रालय के अधीन आने वाली ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) ने देश की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा के प्रति भारतीय नौसेना की अटूट वचनबद्धता के सम्मान में शुक्रवार को 1 बंगाल एनसीसी नौसेना इकाई, ग्रुप मुख्यालय एनसीसी कोलकाता ‘सी’ को युद्धपोत का एक विशेष मॉडल भेंट किया। कोयला खनन मशीनों के बेकार पुर्जों से बना यह मॉडल, कोयला खनिकों एवं नौसेना कर्मियों के बीच सेवा, समर्पण और राष्ट्र-निर्माण की उस साझा भावना का प्रतीक है, जो उन्हें एक-दूसरे से जोड़ती है।

ईसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक डॉ. सतीश झा के मार्गदर्शन में तैयार किया गया यह मॉडल कंपनी में चलाए जा रहे ‘विशेष अभियान 6’ के तहत ‘कचरे से कंचन’ पहल का हिस्सा है। इसे ईसीएल की नियामतपुर केंद्रीय कार्यशाला में बेहद बारीकी से डिजाइन और तैयार किया गया है। यह कलाकृति ईसीएल के कर्मचारियों की तकनीकी दक्षता और कारीगरी को दर्शाती है। इसके माध्यम से औद्योगिक कबाड़ को राष्ट्रीय गौरव के प्रतीक में बदलने के साथ-साथ संसाधनों के पुनः उपयोग और पर्यावरणीय स्थिरता को भी बढ़ावा दिया गया है।

ईसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक, कार्यात्मक निदेशकों और पूरे ईसीएल परिवार की ओर से कंपनी के सुरक्षा प्रमुख मेजर एस. तिवारी ने नियामतपुर केंद्रीय कार्यशाला की प्रबंधक (मानव संसाधन) सुश्री निश्चल सोनी के साथ भारतीय नौसेना के कमोडोर सीजर बसु तथा कमांडर संजीव सरन को यह मॉडल भेंट किया। यह प्रतिकृति राष्ट्र की सेवा में सशस्त्र बलों के समर्पण और योगदान के लिए आभार व्यक्त करने के प्रतीक के रूप में दी गई।
यह युद्धपोत मॉडल उन 10 विशिष्ट मॉडलों में से एक है, जिन्हें ईसीएल ने ‘विशेष अभियान 6’ के दौरान ‘कचरे से कंचन’ पहल के तहत तैयार किया है। इनमें से प्रत्येक प्रतिकृति जनहित से जुड़े किसी न किसी विषय पर प्रतीकात्मक संदेश देता है। बेकार पड़ी सामग्रियों को रचनात्मक रूप देकर तैयार किए गए ये मॉडल दर्शाते हैं कि औद्योगिक कचरे का उपयोग नवाचार और सार्थक अभिव्यक्ति के माध्यम के रूप में भी किया जा सकता है।

यह पहल कचरा प्रबंधन के नवाचारपूर्ण तरीकों, पुनर्चक्रण और संसाधनों के संरक्षण हेतु ईसीएल की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। साथ ही, यह भी बताती है कि कंपनी के कर्मचारियों का तकनीकी कौशल और रचनात्मकता किस प्रकार चक्रीय अर्थव्यवस्था के सिद्धांतों को बढ़ावा देते हुए पर्यावरण संरक्षण व सतत विकास में योगदान दे सकते हैं।

यह प्रस्तुति ईसीएल के कोयला खनिकों की ओर से भारतीय नौसेना के प्रति आभार व्यक्त करने का एक अनूठा माध्यम है। यह सेवा, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रीय गौरव के मूल्यों को एक सूत्र में पिरोती है। कोयला खदानों की गहराइयों से लेकर समुद्र के विशाल विस्तार तक, राष्ट्रसेवा की भावना दोनों को एक साझा बंधन में जोड़ती है।

By Rajeev Sharma

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