नई दिल्ली (राजीव शर्मा): भारत के विभिन्न हिस्सों में स्थित शिव मंदिरों में भक्ति का माहौल चरम पर देखने को मिला, जहाँ श्रद्धालुओं ने सावन के तीसरे सोमवार के साथ-साथ नाग पंचमी का पर्व मनाया। पूजा-अर्चना करने और आशीर्वाद लेने के लिए श्रद्धालु सुबह-सवेरे से ही मंदिरों में पहुँचना शुरू हो गए थे।
इन दो शुभ अवसरों के एक साथ पड़ने से धार्मिक उत्साह और बढ़ गया, तथा कई मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना के अनुष्ठान आयोजित किए गए।
सुबह की पूजा और अभिषेक
श्रद्धालुओं ने भगवान शिव और नाग देवता की पूजा की। मंदिरों में जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक, पुष्प और बेलपत्र अर्पित करने सहित पारंपरिक अनुष्ठान किए गए।
कई भक्तों ने अपनी सावन सोमवार की परंपरा के तहत उपवास भी रखा। प्रमुख तीर्थस्थलों पर दिनभर उमड़ती भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए विशेष प्रबंध किए थे।
इस दिन का धार्मिक महत्व क्यों है?
सावन के सोमवार को पारंपरिक रूप से शिव पूजा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण समय माना जाता है। इस पूरे महीने में श्रद्धालु अक्सर मंदिरों में जाते हैं, अभिषेक करते हैं और अच्छे स्वास्थ्य, सुख एवं समृद्धि की प्रार्थना करते हुए उपवास रखते हैं।
नाग पंचमी नाग देवताओं के सम्मान में मनाई जाती है और यह सुरक्षा व कल्याण की प्रार्थनाओं से जुड़ी है। इस त्योहार को विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है।
राज्यों में दिखा धार्मिक उल्लास
देशभर के शिव मंदिरों में उत्सव का माहौल दिखाई दिया, जहाँ श्रद्धालु विशेष प्रार्थनाओं और अनुष्ठानों में शामिल हुए। इस अवसर पर मंदिरों को सजाया गया था, वहीं धार्मिक मंत्रोच्चार और भजनों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
सावन के तीसरे सोमवार को नाग पंचमी पड़ने से श्रद्धालुओं को एक साथ दो महत्वपूर्ण अवसरों को मनाने का संयोग मिला, जिससे भारत भर के मंदिरों और तीर्थस्थलों पर धार्मिक गतिविधियों में भारी इजाफा देखा गया।
