कैलगरी में पानी के बिलों का बड़ा झटका: आम घरों के बिलों में 74% और कारोबारों के लिए 95% तक की बढ़ोतरी — लीकेज की जिम्मेदारी किसकी?

कैलगरी (राजीव शर्मा): कैलगरी के निवासियों और व्यवसायों को पानी के बिलों में भारी बढ़ोतरी का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि शहर को अपनी जल अवसंरचना (वाटर इंफ्रास्ट्रक्चर) के लिए दीर्घकालिक रूप से 6.5 अरब डॉलर की भारी आवश्यकता का अनुमान है। वर्ष 2025 में उपचारित (ट्रीटेड) पानी का लगभग 23% हिस्सा लीकेज की भेंट चढ़ जाने के बाद, नगर निगम के अधिकारी लीकेज वाली पाइपलाइनों को ठीक करने और पानी के नुकसान को कम करने के लिए चार वर्षों में 342 मिलियन डॉलर खर्च करने का प्रस्ताव कर रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, 2019 से वार्षिक जल हानि लगातार 20% से 24% के बीच बनी हुई है।

मेयर जेरोमी फारकास और उनका समर्थन करने वाले पार्षदों ने दलील दी है कि पिछले एक दशक में पानी की दरें जनसंख्या वृद्धि और मुद्रास्फीति (महंगाई) की गति के साथ तालमेल नहीं बिठा सकीं, जिसके चलते फंड की कमी हुई और रखरखाव का काम टलता गया। लेकिन अब जब आम घरों और कारोबारियों पर बढ़ी हुई लागत का बोझ डाला जा रहा है, तो जनता यह स्पष्ट जवाब पाने की हकदार है कि यह समस्या इतने लंबे समय तक क्यों बनी रही और इसे कितनी जल्दी ठीक किया जाएगा।

प्रस्तावित दरों के अनुमान के तहत, प्रति माह 19 क्यूबिक मीटर पानी की खपत करने वाले एक सामान्य परिवार का बिल 2026 में $119.21 से बढ़कर 2030 तक $206.94 हो सकता है—यानी लगभग 74% का सीधा इजाफा। वहीं कारोबारों को लगभग 86% से 95% तक की वृद्धि झेलनी पड़ सकती है; उदाहरण के तौर पर प्रति माह 400 क्यूबिक मीटर पानी खर्च करने वाले एक मध्यम आकार के व्यवसाय को 2026 के $1,661.33 की तुलना में 2030 तक $3,093.19 चुकाने पड़ सकते हैं।

शहर का लक्ष्य 2030 तक पानी के इस वार्षिक नुकसान को घटाकर 15% पर लाना है। हालांकि, भारी-भरकम बिलों के साथ केवल खोखले वादे नहीं, बल्कि ठोस और मापने योग्य परिणाम भी सामने आने चाहिए। नगर परिषद को खर्चों, पूरी की गई मरम्मतों, पानी के रिसाव में आई कमी और लक्ष्यों की दिशा में हुई प्रगति का ब्योरा देते हुए स्वतंत्र सत्यापन के साथ त्रैमासिक सार्वजनिक रिपोर्टें जारी करनी चाहिए। यदि तय समय-सीमा चूक जाती है, तो अधिकारियों को इसकी वजह स्पष्ट करनी चाहिए और अपनी सुधारात्मक योजना का खुलासा करना चाहिए।

कैलगरी के नागरिकों से यह दिखाए बिना भारी रकम नहीं वसूली जानी चाहिए कि उनके पैसे से क्या हासिल हो रहा है। फिलहाल यह प्रस्तावित बजट और दरों में बढ़ोतरी नगर परिषद के अंतिम फैसले पर निर्भर करेगी।

By Rajeev Sharma

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