चंडीगढ़(गुरप्रीत सिंह): आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने पंजाब भाजपा प्रधान सुनील जाखड़ के ड्रग्स के मुद्दे पर की गई टिप्पणी पर पलटवार किया और उन्हें पंजाबियों को संबोधित करने से पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के रिकॉर्ड का जवाब देने की चुनौती दी। उन्होंने नेहा शौरी मर्डर केस और राजजीत सिंह विवाद के दौरान सुनील जाखड़ की चुप्पी पर सवाल उठाया और कांग्रेस लीडरशिप से श्री गुटका साहिब की शपथ लेकर किए गए अधूरे वादों पर जवाब मांगा।
भगवंत मान सरकार की ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ मुहिम का ज़िक्र करते हुए, आप पंजाब के मीडिया इंचार्ज ने ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई में पंजाब के लोगों की भागीदारी पर ज़ोर दिया और सवाल किया कि भाजपा सिर्फ़ पंजाब को ही क्यों निशाना बना रही है, जबकि गुजरात, बिहार, हरियाणा और राजस्थान जैसे दूसरे राज्य भी इस समस्या का सामना कर रहे हैं। उन्होंने राहुल गांधी को भी अपनी संगरूर रैली से पहले कांग्रेस के रिकॉर्ड पर सफाई देने की चुनौती दी।
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आप पंजाब के मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने कैप्टन अमरिंदर सिंह के समय में कांग्रेस प्रधान के तौर पर सुनील जाखड़ के रिकॉर्ड पर सवाल उठाते हुए कहा: “सुनील जाखड़ एक बार में 45 मिनट बोल सकते हैं, लेकिन पंजाब को भाषण नहीं, जवाब चाहिए। जब वह कांग्रेस प्रधान थे और कैप्टन अमरिंदर सिंह मुख्यमंत्री थे, तो आज जिन मुद्दों पर वह बोल रहे हैं, उन पर उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस कहां थीं? वह पंजाब को एक भी प्रेस कॉन्फ्रेंस दिखाएं जिसमें उन्होंने इन विवादों पर जवाबदेही मांगी हो।”
2019 में इंस्पेक्टर नेहा शौरी की हत्या का ज़िक्र करते हुए बलतेज पन्नू ने कहा, “मौजूदा सरकार परिवार की सीबीआई जांच की मांग मान गई है। सुनील जाखड़ को कांग्रेस प्रधान के तौर पर अपने समय में की गई ऐसी किसी भी मांग या मुहिम को सार्वजनिक करना चाहिए। क्या उन्होंने उस समय सीबीआई जांच की मांग करते हुए कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी या सार्वजनिक रूप से जवाबदेही की मांग की थी?”
ड्रग तस्करी से जुड़े आरोपों में फंसे पंजाब पुलिस के पूर्व अधिकारी राजजीत सिंह से जुड़े विवाद पर सुनील जाखड़ के रिकॉर्ड पर सवाल उठाते हुए उन्होंने आगे कहा, “सुनील जाखड़ को पंजाब को बताना चाहिए कि जब राजजीत सिंह के खिलाफ आरोप सामने आए तो उन्होंने क्या किया? क्या उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस की? क्या उन्होंने कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार पर सवाल उठाए? क्या उन्होंने जवाबदेही की मांग की? अगर की थी तो आज भाषण देने की बजाए वह रिकार्ड जनता के सामने रखें।
कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार पर निशाना साधते हुए बलतेज पन्नू ने कहा, “कांग्रेस नेताओं ने नशा खत्म करने और रोजगार देने के बड़े-बड़े वादे किए थे, लेकिन पंजाब के लोग आज भी उस समय किए गए वादों के जवाब का इंतजार कर रहे हैं। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने चुनाव से पहले श्री गुटका साहिब की कसम खाकर ‘हर घर नौकरी’ का वादा किया था। किसानों में कर्ज माफी के फॉर्म और पर्चियां बांटी गई थीं। राहुल गांधी और कांग्रेस नेतृत्व को जवाब देना चाहिए कि इन वादों का क्या हुआ।”
‘आप’ पंजाब के मीडिया इंचार्ज ने पिछली सरकार द्वारा नशे के मुद्दे से निपटने के तरीके और सुनील जाखड़ के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा: “क्या सुनील जाखड़ ने नशे की समस्या से निपटने के तरीके पर कैप्टन अमरिंदर सिंह को चुनौती दी थी? क्या उन्होंने सार्वजनिक तौर पर पंजाबियों से किए गए वादे पूरे करने की मांग की थी? जो नेता अपनी सरकार के समय चुप रहे, उन्हें अब पंजाब को भाषण देने का कोई हक नहीं है।”
पिछले शासनकाल के दौरान पुलिस तबादलों पर एक विदेशी महिला के प्रभाव से जुड़े विवादों का जिक्र करते हुए बलतेज पन्नू ने आगे कहा, “सुनील जाखड़ को स्पष्ट करना चाहिए कि वे इस मामले के बारे में क्या जानते थे और क्या उन्होंने कभी सार्वजनिक तौर पर सरकार से सवाल किए थे। जो नेता अपनी सरकार के समय खामोश रहे, वे अब पंजाब के लोगों को उपदेश नहीं दे सकते।”
नशे से निपटने के मामले में भाजपा के रवैये पर सवाल उठाते हुए उन्होंने पूछा, “अगर अमित शाह को पंजाब की नशा समस्या के हल के रूप में पेश किया जा रहा है, तो बिहार, गुजरात, हरियाणा और राजस्थान के बारे में उनका क्या विचार है? क्या इन राज्यों में नशा चिंता का विषय नहीं है? यह जिम्मेदारी सिर्फ पंजाब के लिए ही क्यों तय की जा रही है? क्या आपका मकसद हर जगह इस समस्या को हल करना है या सिर्फ पंजाब पर दाग लगाकर रखना है?”
बलतेज पन्नू ने इस बात पर जोर दिया कि पंजाब को दिल्ली के राजनेताओं की जरूरत नहीं है, जो यह बताएं कि राज्य को नशे की बीमारी से कैसे लड़ना चाहिए। “भगवंत मान सरकार, कानून लागू करने वाली एजेंसियां, विलेज डिफेंस कमेटियां और आम नागरिक ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान के जरिए मिलकर काम कर रहे हैं।”
उन्होंने आगे दावा किया, “पंजाब अपनी लड़ाई खुद लड़ना जानता है। हमारे लोग नशे के खिलाफ एकजुट होकर खड़े हैं, और सरकार इसे प्रचार का जरिया बनाने के बजाय समुदायों को प्रेरित कर रही है। हमारा मकसद इस कोढ़ को जड़ से खत्म करना और अपने युवाओं के भविष्य की रक्षा करना है।”
बिहार के डीजीपी के बयान ने पंजाब के जन-आंदोलन मॉडल को दी मान्यता
बिहार में नशे की समस्या के संबंध में एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बलतेज पन्नू ने कहा: “बिहार के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ने कथित तौर पर पंजाब को एक ऐसे राज्य के रूप में पेश किया है जिससे नशे के खिलाफ लड़ने के लिए समुदायों को एकजुट करने के सबक सीखे जा सकते हैं। पंजाब के इस जन-आंदोलन मॉडल में 1 लाख से ज्यादा विलेज डिफेंस कमेटी और वार्ड डिफेंस कमेटी के सदस्य शामिल हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि बिहार भी नशे की समस्या से जूझ रहा है। जब किसी अन्य राज्य का शीर्ष पुलिस अधिकारी पंजाब के मॉडल को अध्ययन के योग्य मानता है, तो राजनीतिक विरोधियों को राज्य को बदनाम करते रहने के बजाय ऐसे प्रयासों की सराहना करनी चाहिए।
बलतेज पन्नू ने आगे कहा, “बिहार भी नशे की गंभीर समस्या का सामना कर रहा है, फिर भी वहां के डीजीपी ने पंजाब को एक उदाहरण के तौर पर पेश किया है कि इस समस्या से लड़ने के लिए लोगों को कैसे एकजुट किया जा सकता है। अगर बिहार जैसा राज्य सबक लेने के लिए पंजाब के जन-आंदोलन की तरफ देख रहा है, तो यहां के कुछ नेता पंजाब को सिर्फ नकारात्मक रूप में पेश करने पर क्यों उतारू हैं?”
जमीनी स्तर पर जनभागीदारी के महत्व पर जोर देते हुए बलतेज पन्नू ने कहा, “‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ की ताकत लोगों को जमीनी स्तर पर जोड़ने और नशे के खिलाफ सामूहिक विरोध खड़ा करने में है। यह अभियान परिवारों की रक्षा करने, युवाओं को सुरक्षित रखने और यह सुनिश्चित करने के लिए है कि समाज इस लड़ाई में सक्रिय भागीदार बने।”
राहुल गांधी और कांग्रेस को पंजाब के सवालों के जवाब देने होंगे
कांग्रेस नेता राहुल गांधी की संगरूर में ‘पंजाब मांगता जवाब’ बैनर तले प्रस्तावित रैली से पहले बलतेज पन्नू ने कहा, “राहुल गांधी जी, पंजाब यकीनन जवाब मांगता है। श्री गुटका साहिब की कसम खाकर कैप्टन अमरिंदर सिंह द्वारा किए गए वादों का क्या हुआ? हर घर नौकरी के वादे का क्या हुआ? कर्ज माफी के वादों और किसानों को दी गई पर्चियों का क्या हुआ? पंजाब कई सालों से ये सवाल पूछ रहा है।”
उन्होंने आगे कहा, “हिमाचल प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों से पंजाब में आ रही मेडिकल नशीली दवाओं पर प्रभावी अंतर-राज्यीय समन्वय और जवाबदेही के जरिए रोक लगाने की जरूरत है। राहुल गांधी को स्पष्ट करना चाहिए कि कांग्रेस इस समस्या के बारे में क्या करने का प्रस्ताव रखती है और वह अपनी सरकारों के रिकॉर्ड का हिसाब कैसे देगी।”
उन्होंने कहा, “कांग्रेस अपने पिछले शासन और जनता से किए गए वादों के सवालों से बचते हुए पंजाब में नशे का मुद्दा उठाकर राजनीतिक लाभ नहीं ले सकती।”
बलतेज पन्नू ने जोर देकर कहा कि पंजाब के लोगों को राहुल गांधी से उम्मीद है कि वे राजनीतिक बयानबाजी को दोहराने के बजाय अपने संगरूर दौरे का इस्तेमाल ठोस जवाब देने के लिए करेंगे।
पंजाब का ‘नशे के खिलाफ युद्ध’ एक सामूहिक मिशन है
भगवंत मान सरकार की इस मुहिम के प्रति प्रतिबद्धता को दोहराते हुए बलतेज पन्नू ने कहा, “‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ को कानून लागू करने, जनभागीदारी और युवाओं के लिए खेल व रचनात्मक अवसरों को प्रोत्साहित करके मजबूत किया जा रहा है। खेल गतिविधियों में युवाओं की बढ़ती भागीदारी ऐसे विकल्प बनाने के महत्व को दर्शाती है जो अनुशासन, आत्मविश्वास और एक स्वस्थ भविष्य को बढ़ावा देते हैं।”
उन्होंने समाज के सभी वर्गों से इस मुहिम का समर्थन करने की अपील करते हुए कहा, “राजनीतिक आलोचना की परवाह किए बिना पंजाब नशे के खिलाफ अपना अभियान जारी रखेगा। मैं समाज के सभी वर्गों से इस प्रयास का समर्थन करने की अपील करता हूं।”
बलतेज पन्नू ने दावा किया, “पंजाब अपनी पहचान को सिर्फ नशे की बुराई तक सीमित नहीं होने देगा। हमारे लोग मिलकर यह लड़ाई लड़ रहे हैं, हमारे युवा खेलों और सकारात्मक अवसरों की ओर बढ़ रहे हैं, और हमारी सरकार इस मुहिम को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। जो लोग हमारी आलोचना करना चाहते हैं, उनका स्वागत है, लेकिन उन्हें अपने रिकॉर्ड का जवाब भी देना पड़ेगा।”
