नई दिल्ली(राजीव शर्मा): पड़ोसी देश भूटान में हिमनदी झील के फटने की खबरों के बाद असम ने आपदा के लिए तैयारी बढ़ा दी है, जिससे निचले हिस्से की नदी प्रणालियों में जल स्तर बढ़ने की संभावना को लेकर चिंता पैदा हो गई है। सावधानी के तौर पर अधिकारियों ने धुबरी और कोकराझार जिलों के कमजोर इलाकों को बारीकी से निगरानी में रखा है।
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने शुक्रवार को कहा कि राज्य सरकार स्थिति पर बारीकी से नजर रख रही है और दोनों जिलों के सभी संभावित रूप से खतरे वाले राजस्व मंडलों की निगरानी कर रही है। आपदा प्रबंधन टीमों को इस घटनाक्रम से उत्पन्न किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने का निर्देश भी दिया गया है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में सरमा ने कहा कि राज्य प्रशासन राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ लगातार समन्वय बनाए हुए है, ताकि स्थिति बिगड़ने की स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया दी जा सके।
मुख्यमंत्री ने संभावित रूप से प्रभावित क्षेत्रों के निवासियों से आधिकारिक चेतावनियों को नजरअंदाज न करने और सतर्क रहने का आग्रह किया। उन्होंने लोगों से स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करने और प्रशासन को सहयोग देने को भी कहा।
भूटान के लेमथांग में हिमनदी झील फटने की बाढ़ (GLOF) की खबरें सामने आने के बाद सावधानी के ये उपाय शुरू किए गए। खबरों के मुताबिक, झील से बाहर निकला पानी मो छू नदी से होते हुए संकोश नदी की ओर नीचे की ओर बह रहा है, जिससे निचले हिस्से के रास्ते में स्थित इलाकों पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर चिंता पैदा हो गई है।
इस बीच, पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल के अधिकारियों ने भी अपना अलर्ट स्तर बढ़ा दिया है। बढ़े हुए जल प्रवाह के संभावित प्रभाव की चिंता के बीच अलीपुरद्वार और कूचबिहार जिलों को अलर्ट पर रखा गया है।
उत्तर बंगाल के अधिकारी सावधानी के उपाय कर रहे हैं और कमजोर स्थानों पर रहने वाले लोगों के लिए जोखिम को कम करने के लिए आपातकालीन प्रतिक्रिया की व्यवस्थाओं की समीक्षा कर रहे हैं।
सीमा के दोनों ओर स्थिति पर बारीकी से नजर रखे जाने के साथ, अधिकारियों ने किसी भी संभावित बाढ़ संबंधी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयारी, समय पर जानकारी और जनता के सहयोग के महत्व पर जोर दिया है।
