नई दिल्ली(राजीव शर्मा): केंद्र सरकार ने असंगठित, गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्डों के गठन की अधिसूचना जारी कर भारत के अनौपचारिक कार्यबल के लिए सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक कदम उठाया है। नई संस्थागत व्यवस्था का उद्देश्य तेजी से बढ़ रही गिग अर्थव्यवस्था और अन्य अनौपचारिक क्षेत्रों में कार्यरत लाखों लोगों की कल्याण संबंधी जरूरतों को पूरा करना है।
श्रम और रोजगार मंत्रालय ने सामाजिक सुरक्षा संहिता के तहत इन बोर्डों के गठन की घोषणा की है, जिससे उन श्रमिकों के लिए कल्याण पहलों की सिफारिश और निगरानी के लिए एक औपचारिक तंत्र स्थापित होगा, जो अक्सर पारंपरिक नियोक्ता-आधारित सामाजिक सुरक्षा प्रणालियों से बाहर रहते हैं।
केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया इन बोर्डों की अध्यक्षता करेंगे। इनमें केंद्र और राज्य सरकारों, एग्रीगेटर कंपनियों, नियोक्ताओं, सिविल समाज समूहों, श्रमिक संघों तथा गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
बोर्ड मुख्य रूप से विभिन्न श्रेणियों के श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा की जरूरतों की पहचान करने और केंद्र सरकार को उपयुक्त कल्याण योजनाओं की सिफारिश करने पर ध्यान केंद्रित करेंगे। वे सामाजिक सुरक्षा संहिता के क्रियान्वयन और प्रशासन से जुड़े मामलों पर भी सलाह देंगे।
नई पहलों की सिफारिश करने के अलावा, बोर्ड केंद्र सरकार द्वारा चलाए जा रहे कल्याण कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा करने के लिए भी जिम्मेदार होंगे। वे श्रमिक संबंधी जानकारी की उचित निगरानी सुनिश्चित करने के लिए राज्य स्तर पर किए जा रहे रिकॉर्ड रखरखाव कार्यों का भी मूल्यांकन करेंगे।
सौंपी गई जिम्मेदारियों में संबंधित निधियों और खातों से हुए खर्च की जांच करना तथा केंद्र सरकार द्वारा सौंपे गए अन्य कार्य करना भी शामिल है।
अधिसूचना के तहत, बोर्डों को हर साल कम से कम तीन बार बैठक करनी होगी। उनकी कार्यवाही और कामकाज केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित प्रक्रियागत नियमों से नियंत्रित होगा।
यह कदम भारत की ऐप-आधारित रोजगार पर बढ़ती निर्भरता के पृष्ठभूमि में आया है, जिसमें भोजन डिलीवरी, राइड-हेलिंग, परिवहन और अन्य डिजिटल सेवाएं शामिल हैं। इन क्षेत्रों के श्रमिक अक्सर पारंपरिक रोजगार व्यवस्थाओं के बिना काम करते हैं, जो बीमा और सामाजिक सुरक्षा के अन्य रूपों जैसे लाभों तक पहुंच प्रदान करती हैं।
नए गठित बोर्डों के माध्यम से सरकार का उद्देश्य इन कमियों को दूर करने और देश में रोजगार की बदलती प्रकृति के अनुरूप कल्याण उपाय विकसित करने के लिए एक संरचित तंत्र बनाना है।
