चंडीगढ़(नवल किशोर): पंजाब के राज्यपाल एवं केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के प्रशासक श्री गुलाब चंद कटारिया ने आज सुखना झील पर स्कूल शिक्षा विभाग, चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा आयोजित पहले हुनर उत्सव 2026 – कौशल, संस्कृति, समृद्धि का उद्घाटन किया। इस अवसर पर चंडीगढ़ के मुख्य सचिव श्री एच. राजेश प्रसाद विशिष्ट अतिथि के रूप में तथा शिक्षा सचिव सुश्री प्रेरणा पुरी और निदेशक स्कूल शिक्षा श्री नितिश सिंगला भी उपस्थित रहे।



उत्सव के दौरान प्रशासक ने विद्यार्थियों द्वारा लगाए गए विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया, जहां उन्होंने अपने व्यावसायिक कौशल, हस्तनिर्मित उत्पादों और रचनात्मक कार्यों का प्रदर्शन किया। विद्यार्थियों को ग्राहकों से संवाद करने, अपने उत्पादों को प्रस्तुत करने और बाजार की मांग को समझने का अवसर मिला। इससे उन्हें यह समझने में मदद मिली कि व्यावहारिक कौशल को आर्थिक अवसरों में कैसे बदला जा सकता है।
हुनर उत्सव विद्यार्थियों को अपने व्यावसायिक कौशल, कलात्मक प्रतिभा और उद्यमशीलता की क्षमता प्रदर्शित करने के लिए एक मंच प्रदान करता है। इस पहल का उद्देश्य कौशल-आधारित शिक्षा, अनुभवात्मक सीखने और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना तथा कक्षा में प्राप्त ज्ञान को व्यावहारिक गतिविधियों से जोड़ना है।
उत्सव में विद्यार्थियों द्वारा संचालित विभिन्न प्रकार के स्टॉल लगाए गए हैं। ‘सुई धागा कला’ में फैशन से जुड़ी रचनात्मक वस्तुओं और कपड़ा हस्तशिल्प का प्रदर्शन किया गया है, जबकि ‘सज्जावट’ में दीये, मोमबत्तियां और तोरण सहित सजावटी उत्पाद प्रदर्शित किए गए हैं। ‘रूप निखार’ में सौंदर्य एवं वेलनेस से जुड़े कौशल, ‘मेहंदी घर’ में मेहंदी की विभिन्न डिजाइनों तथा ‘इंक एंड ग्लैम’ में नेल आर्ट और टैटू कला का प्रदर्शन किया गया है। वहीं, ‘स्वाद वाटिका’ में विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए विभिन्न व्यंजनों के माध्यम से पाक-कला का प्रदर्शन किया जा रहा है।
समावेशिता और आजीवन सीखने को बढ़ावा देते हुए ‘हम किसी से कम नहीं’ विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CWSN) की क्षमताओं और उपलब्धियों को सामने लाया, जबकि ‘उल्लास’ वयस्क शिक्षा से जुड़ी पहलों को प्रदर्शित किया। ‘सोचो, समझो, जीतो’ के माध्यम से कौशल-आधारित खेलों का आयोजन किया गया है, जो आगंतुकों में तार्किक सोच और समस्या-समाधान की क्षमता को प्रोत्साहित करते हैं।
हुनर उत्सव शैक्षणिक शिक्षा के साथ-साथ व्यावहारिक कौशल, रचनात्मकता, नवाचार और उद्यमशील सोच को विकसित करने के प्रति चंडीगढ़ प्रशासन की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह उत्सव हस्तकला और कारीगरी के प्रति सम्मान बढ़ाने तथा स्वरोजगार के अवसरों के बारे में जागरूकता फैलाने में भी सहायक है।
स्कूल शिक्षा विभाग ने शहरवासियों, अभिभावकों, विद्यार्थियों और अन्य आगंतुकों से अपील की है कि वे 28 अक्टूबर को सुबह 11:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक सुखना झील पहुंचकर प्रदर्शनी का अवलोकन करें और इसमें भाग ले रहे विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करें।
