‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को गति देने के सुझावों के साथ राष्ट्रीय शहरी सम्मेलन 2026 संपन्न

नई दिल्ली(राजीव शर्मा):विकसित भारत 2047’ की दिशा में शहरी प्रशासन, योजना और सेवाओं की आपूर्ति को मजबूत करने संबंधी व्यावहारिक सुझावों के साथ आज भुवनेश्वर में ‘राष्ट्रीय शहरी सम्मेलन 2026’ संपन्न हुआ।

समापन भाषण देते हुए, केन्द्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्री श्री मनोहर लाल ने भारत के शहरी विकास की ऐतिहासिक यात्रा और शहरी बुनियादी ढांचे एवं सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में भारत सरकार के निरंतर प्रयासों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि “इस सम्मेलन का उद्देश्य हमारे शहरों के सामने आने वाली भविष्य की चुनौतियों पर विचार-विमर्श करना है।” उन्होंने ‘अमृत’, ‘स्वच्छ भारत मिशन-शहरी’ और ‘पीएम स्वनिधि’ सहित विभिन्न राष्ट्रीय मिशनों के जरिए हुई प्रगति का उल्लेख किया। इन राष्ट्रीय मिशनों से जल एवं स्वच्छता संबंधी सेवाओं का विस्तार हुआ है, अपशिष्ट प्रबंधन बेहतर हुआ है, शहरी आवागमन सुदृढ़ हुआ है और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिला है। उन्होंने रोजगार केन्द्रों और सार्वजनिक परिवहन के निकट किफायती आवास की उपलब्धता, निर्माण कार्यों में चक्रीय दृष्टिकोण अपनाने, और पुराने कचरे के वैज्ञानिक तरीके से निपटान के महत्व पर जोर दिया। इस बात का उल्लेख करते हुए कि देश के आधे से अधिक पुराने कचरे का निपटान किया जा चुका है, उन्होंने इन प्रयासों को जारी रखने और नए कचरे को जमा होने से रोकने की आवश्यकता पर बल दिया ताकि भारत के शहरी बदलावों का समावेशी, टिकाऊ और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार रहना सुनिश्चित हो सके।

‘राष्ट्रीय शहरी सम्मेलन 2026’ के समापन सत्र में स्वागत भाषण देते हुए, आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के शहरी विकास विभाग के सचिव श्री सतेंद्र सिंह ने सात तकनीकी सत्रों के मुख्य निष्कर्षों पर चर्चा की। उन्होंने नीतिगत चर्चाओं को व्यावहारिक और कार्यान्वयन योग्य शहरी समाधानों में बदले जाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि “सफलता को केवल परियोजना पूरी होने के बजाय सेवाओं की गुणवत्ता के आधार आंका जाना चाहिए।” यह सेवाओं की आपूर्ति को बेहतर बनाने हेतु संस्थागत क्षमता को मजबूत करने, विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित करने, नगर निकायों की वित्तीय स्थिति को सुधारने और जवाबदेही तय करने के महत्व की ओर इशारा करता है। ‘सहकारी संघवाद’ की भावना को रेखांकित करते हुए, उन्होंने इस सम्मेलन के सुझावों को आगे बढ़ाने और ‘विकसित भारत 2047’ के विजन को साकार करने हेतु विभिन्न राज्यों, शहरों एवं सहयोगी संस्थानों के साथ मिलकर काम करने के मंत्रालय के संकल्प को दोहराया।

अपने विशेष संबोधन में, नीति आयोग के सदस्य श्री राजीव गौबा ने भारत के शहरों में तेजी से हो रहे बदलावों को दिशा देने हेतु शहरी प्रशासन, योजना और नगर निकायों की वित्तीय स्थिति में व्यापक सुधारों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि, “हम शहरों को अपने राज्यों की राजधानियों से नहीं चला सकते। हमें अपने छोटे शहरों को सशक्त बनाने की जरूरत है।” उन्होंने शहरी स्थानीय निकायों को अधिक शक्तियां एवं वित्तीय अधिकार सौंपने, सशक्त शहरी नेतृत्व और नगर निगमों की जवाबदेही को मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने अपने स्वयं के राजस्व स्रोतों को मजबूत करने, पारंपरिक भूमि-उपयोग की योजना में सुधार करने और आवास को किफायती बनाने तथा आर्थिक उत्पादकता बढ़ाने हेतु उच्च घनत्व व मिश्रित-उपयोग वाले विकास और परिवहन-केन्द्रित विकास को बढ़ावा देने के महत्व पर जोर दिया। ‘अर्बन चैलेंज फंड’ और ‘सिटी इकोनॉमिक रीजन्स’ जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए, उन्होंने राज्यों से संरचनात्मक सुधार करने का आग्रह किया। साथ ही, उन्होंने राष्ट्रीय शहरी मिशनों के तहत मिलने वाली फंडिंग को इन सुधारों के क्रियान्वयन से जोड़ने का सुझाव दिया, ताकि शहर ‘विकसित भारत 2047’ की दिशा में विकास के वाहक के रूप में अपनी पूरी क्षमता का दोहन कर सकें।

‘राष्ट्रीय शहरी सम्मेलन 2026’ के दूसरे और अंतिम दिन का मुख्य फोकस नीतिगत चर्चाओं को ऐसे व्यावहारिक सुझावों में बदलने पर रहा जिनसे शहरी प्रशासन, योजना, बुनियादी ढांचे और सेवाओं की आपूर्ति को मजबूत किया जा सके। सात तकनीकी सत्रों में हुई चर्चाओं को आगे बढ़ाते हुए, इस सम्मेलन में केन्द्र और राज्य सरकारों, शहरी स्थानीय निकायों, उद्योग जगत, शिक्षाविदों एवं ज्ञान संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भारत की बदलती शहरी चुनौतियों का व्यावहारिक समाधान खोजने और ‘विकसित भारत 2047’ के विजन को आगे ले जाने के बारे में विचार-विमर्श किया।

तकनीकी विचार-विमर्श की मुख्य बातें

‘चलने के अधिकार’ (राइट टू वॉक) पर आयोजित सत्र में पैदल चलने वालों के लिए बिखरी हुई जगह, खराब सुलभता, योजना निर्माण में समन्वय की कमी, अस्पष्ट संस्थागत जिम्मेदारियां और धन की कमी जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई। इस सत्र में वैधानिक योजनाओं में ‘चलने के अधिकार’ को शामिल करने, पैदल चलने वालों के लिए सुरक्षित रास्ते सुनिश्चित करने, शहरी स्थानीय निकायों की क्षमता एवं जवाबदेही को मजबूत करने, बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता एवं रखरखाव को प्राथमिकता देने, समावेशी एवं समुदाय के नेतृत्व वाले डिजाइन को अपनाने, सड़क से जुड़ी सभी परियोजनाओं में पैदल चलने वालों से जुड़ी सुविधाओं को शामिल करने और इसके लिए विशेष वित्तीय व्यवस्था बनाने जैसे सुझाव दिए गए।

‘जल, अपशिष्ट और संसाधन संबंधी दक्षता’ विषय पर आयोजित सत्र में जल, अपशिष्ट जल एवं ठोस अपशिष्ट की योजनाओं का समावेश करने; परिणाम-आधारित सेवाओं की आपूर्ति की दिशा में बढ़ने; प्रदर्शन की निगरानी एवं जीवन-चक्र संबंधी रखरखाव को मजबूत करने; जल के पुन: उपयोग एवं संसाधनों की चक्रीय पुनर्प्राप्ति को बढ़ावा देने; पुनर्प्राप्त संसाधनों के लिए बाजार विकसित करने; संस्थागत जवाबदेही में सुधार करने; और सार्वजनिक-निजी भागीदारी, नगर निकाय बॉन्ड एवं जलवायु परिवर्तन संबंधी वित्तपोषण के जरिए टिकाऊ वित्तपोषण की व्यवस्था करने जैसे विभिन्न सुझाव दिए गए।

‘किफायती आवास – मांग और आपूर्ति के पहलू’ विषय पर हुए सत्र में कई सुझाव दिए गए। इनमें किफायती आवास के लिए जमीन आरक्षित करना, आवास को परिवहन एवं रोजगार केन्द्रों के साथ जोड़ना, किराए के आवास और परिवहन-केन्द्रित आवासन के व्यावहारिक मॉडल विकसित करना, एकल-खिड़की मंजूरी प्रणाली लागू करना, क्रॉस-सब्सिडी के लिए एफएआर व टीडीआर संबंधी प्रोत्साहनों का उपयोग करना, हाउसिंग बोर्ड और सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से सरकारी भागीदारी को मजबूत करना, तथा गुणवत्तापूर्ण निर्माण और रखरखाव के जरिए लंबे समय तक आवास को किफायती बनाए रखना शामिल है।

‘एकीकृत शहरी विकास और बुनियादी ढांचा वितरण’ विषय पर आयोजित सत्र में साझा जीआईएस-आधारित डेटाबेस के जरिए स्थानिक एवं बुनियादी ढांचा नियोजन को एकीकृत करने; कॉरिडोर-आधारित एवं परिवहन-केन्द्रित विकास को बढ़ावा देने; विभिन्न क्षेत्रों एवं एजेंसियों के बीच निवेश संबंधी समन्वय स्थापित करने; नागरिकों की राय के अनुरूप लक्षित शहरी सुधार लागू करने; भूमि-आधारित वित्तपोषण तंत्र का लाभ उठाने; नगर निकायों की साख (क्रेडिटवर्दीनेस) को मजबूत करने; और संस्थागत समन्वय में सुधार करने जैसे विभिन्न सुझाव दिए गए।

‘शहरी सेवाओं की आपूर्ति के नए प्रतिमान’ विषय पर आयोजित सत्र में कई सुझाव दिए गए। इन सुझावों में परिसंपत्ति निर्माण के बजाय परिणाम-आधारित सेवाओं की आपूर्ति की दिशा में बढ़ना; स्पष्ट रूप से निर्धारित जिम्मेदारियों के आधार पर नगर निकायों को एकजुट करना; डिजिटल निगरानी एवं नागरिकों से फीडबैक लेने की व्यवस्था को मजबूत करना; प्रदर्शन-आधारित अनुबंधों को संस्थागत रूप देना; नगर निकायों के लिए विशेष कैडर तैयार करना; अपने स्रोतों से राजस्व जुटाने की क्षमता में सुधार करना; और जवाबदेह एवं नागरिक-केन्द्रित शहरी सेवाओं के लिए एक राष्ट्रीय ढांचा स्थापित करना शामिल है।

‘आदर्श भवन निर्माण उप-नियम’ विषय पर आयोजित सत्र में एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से भवन निर्माण संबंधी नियमों एवं मजूरियों को सरल बनाने, जोखिम-आधारित जांच एवं स्व-प्रमाणीकरण का समावेश करने, एफएआर, घनत्व एवं पार्किंग संबंधित मानदंडों को युक्तिसंगत बनाने, मिश्रित उपयोग एवं परिवहन-केन्द्रित विकास को संभव बनाने, जलवायु संबंधी सुदृढ़ता एवं आपदा सुरक्षा मानकों को शामिल करने, हरित निर्माण को प्रोत्साहित करने और नियामक संबंधी पारदर्शिता एवं व्यवसाय करने में आसानी में सुधार करने जैसे सुझाव दिए गए।

‘आदर्श नगरपालिका कानून’ विषय पर आयोजित सत्र में कई सुझाव दिए गए। इन सुझावों में महापौरों को पांच साल का कार्यकाल और स्पष्ट रूप से परिभाषित कार्यकारी शक्तियां देकर सशक्त बनाना; नगर निकायों के कार्यों के विकेंद्रीकरण को सुदृढ़ करना; अर्ध-सरकारी एजेंसियों के साथ समन्वय को बेहतर करना; वित्तीय स्वायत्तता एवं अपने स्रोतों से राजस्व को बढ़ाना; पर्याप्त तकनीकी कर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित करना; वार्ड एवं जोनल समितियों को सशक्त बनाना; तथा राज्य-स्तरीय परामर्शों और कार्यान्वयन ढांचे के जरिए ‘आदर्श नगरपालिका कानून, 2003’ में संशोधन करना शामिल है।

शुभारंभ और विमोचन

सम्मेलन के दूसरे दिन कई पहलों और प्रकाशनों का शुभारंभ किया गया:

अमृत ​​2.0 के तहत उपयोग किए गए पानी का बाजार

एक डिजिटल प्लेटफॉर्म जो शहरी स्थानीय निकायों को शोधित उपयोग किए गए पानी के इकोसिस्टम में संभावित उपयोगकर्ताओं और निवेशकों से जोड़ता है। शहरी स्थानीय निकाय बिक्री के लिए उपलब्ध शोधित पानी की मात्रा और गुणवत्ता की जानकारी दे सकते हैं, जिससे उद्योगों, संस्थानों और निजी इकाइयों को पानी खरीदने के अवसरों की पहचान करने तथा उन तक पहुंचने में मदद मिलती है।

यूसीएफ पोर्टल

यह पोर्टल एक महत्वपूर्ण डिजिटल पहल है, जो ‘अर्बन चैलेंज फंड’ को पारदर्शी, कुशल और सुव्यवस्थित तरीके से लागू करने में मदद करती है। यह राज्यों, केन्द्र-शासित प्रदेशों, शहरी स्थानीय निकायों और कार्यान्वयन एजेंसियों के लिए एक साझा डिजिटल इंटरफेस के रूप में कार्य करता है। इसके माध्यम से परियोजनाएं जमा की जा सकती हैं और उनकी ट्रैकिंग, मूल्यांकन एवं निगरानी की जा सकती है तथा निर्णय लेने की प्रक्रिया में सहायता प्राप्त की जा सकती है।

ऑनलाइन संवादात्मक नगर निकाय वित्त डेटा हब

यह बहुउद्देशीय पोर्टल, ऑनलाइन चर्चा मंचों के माध्यम से नगर निकायों के वित्त से जुड़े पेशेवरों के समुदाय को आपस में बातचीत करने के लिए जोड़ेगा। साथ ही, यह नगर निकायों के राजस्व में वृद्धि करने और शहरी स्थानीय निकायों के राजस्व तथा व्यय से संबंधित वास्तविक समय में डिजिटल डेटा उपलब्ध कराने जैसे नगर निकायों से जुड़े सुधारों को भी संभव बनाएगा।

पीएम स्वनिधि के तहत स्ट्रीट फूड हब

पीएम स्वनिधि के तहत चुने गए 18 स्ट्रीट फूड हब के विकास कार्य को औपचारिक रूप से शुरू करने की एक पहल। इस फंड की पहली किस्त जारी होने का मतलब है कि परियोजना के क्रियान्वयन की औपचारिक शुरुआत हो गई है।

स्वच्छता के सुपरहीरो

बच्चों के लिए एक पुस्तक, जिसे युवा पाठकों के बीच स्वच्छता, कचरे को अलग-अलग करने और कचरे के जिम्मेदार प्रबंधन से संबंधित मूल्यों को विकसित करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

सीपीडब्ल्यूडी निर्माण

एक वेब और मोबाइल एप्लिकेशन, जिसे सीपीडब्ल्यूडी की विभिन्न परियोजनाओं की शुरुआत से लेकर उनके पूरा होने तक की डिजिटल निगरानी के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह प्लेटफॉर्म वास्तविक प्रगति पर नजर रखने, महत्वपूर्ण उपलब्धियों की निगरानी करने और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित करने में मदद करेगा। इससे पारदर्शिता, जवाबदेही और डेटा-आधारित निर्णय लेने की प्रक्रिया को बढ़ावा मिलेगा।

सीपीडब्ल्यूडीवे

यह डिजिटल क्षमता के विकास का एक मंच है, जो सीपीडब्ल्यूडी के विनिर्देशों, निर्माण पद्धतियों, प्रोजेक्ट केस स्टडी, निर्माण से जुड़ी सेवाओं और वास्तुशिल्प संबंधी नवाचारों पर छोटे-छोटे निर्देशात्मक वीडियो उपलब्ध कराता है। इसमें शामिल मूल्यांकन सरकारी इंजीनियरों तथा अन्य इंजीनियरिंग पेशेवरों के निरंतर सीखने और व्यावहारिक कौशल के विकास में सहायक होंगे।

राष्ट्रीय इंटर्नशिप पोर्टल के जरिए इंटर्नशिप योजना

यह एक ऐसी पहल है जो इंजीनियरिंग तथा आर्किटेक्चर के अंडरग्रेजुएट विद्यार्थियों को एआईसीटीई के ‘राष्ट्रीय इंटर्नशिप पोर्टल’ के माध्यम से सीपीडब्ल्यूडी में इंटर्नशिप के अवसर पाने में समर्थ बनाती है। इस योजना से विद्यार्थियों को सरकारी बुनियादी ढांचा की परियोजनाओं, निर्माण तकनीकों, परियोजनाओं के प्रबंधन और गुणवत्ता आश्वासन के क्षेत्र में व्यावहारिक अनुभव मिलेगा। इससे उद्योग जगत और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग मजबूत होगा।

जेआईसीए और सीपीएचईईओ के बीच तकनीकी सहयोग

शोधित उपयोग किए गए पानी के चक्रीय उपयोग को बढ़ावा देने हेतु तकनीकी सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से, जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (जेआईसीए) और केन्द्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण अभियांत्रिकी संगठन (सीपीएचईईओ) के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।

सम्मेलन का समापन

इस दो-दिवसीय ‘राष्ट्रीय शहरी सम्मेलन 2026’ से निकले सुझाव शहरी सुधारों के अगले चरण की दिशा निर्धारित करेंगे। इनमें मजबूत संस्थागत क्षमता, समन्वित योजना, स्थायी वित्तपोषण और सेवाओं की जवाबदेह आपूर्ति पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

By Rajeev Sharma

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *