नई दिल्ली (राजीव शर्मा): कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) और छात्र संगठनों द्वारा जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन के मद्देनजर राष्ट्रीय राजधानी में बड़े पैमाने पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, जबकि प्रशासन ने कई इलाकों में आम लोगों की आवाजाही, परिवहन सेवाओं और मोबाइल इंटरनेट पर पाबंदियां लागू कर दी हैं।
पुलिस द्वारा प्रस्तावित सभा की अनुमति देने से इनकार किए जाने के बावजूद समर्थकों के दिल्ली पहुंचने की खबरें हैं। अधिकारियों ने अनधिकृत सभाओं को रोकने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रमुख स्थानों पर हजारों सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया है।
यह प्रदर्शन चुनाव आयोग के कामकाज में जवाबदेही की मांगों पर केंद्रित है। प्रदर्शनकारी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई, मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर रोक लगाने और जनवरी 2025 में प्रकाशित मतदाता सूची को बहाल करने की मांग कर रहे हैं। वे एक स्वतंत्र जांच और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित 2023 के कानून को निरस्त करने की भी मांग कर रहे हैं।
35,000 से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात
दिल्ली पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी है। सुरक्षा व्यवस्था में पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती के साथ-साथ जंतर-मंतर की ओर जाने वाली सड़कों पर व्यापक बैरिकेडिंग शामिल है।
सामने आई व्यवस्था के अनुसार, दिल्ली पुलिस, सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के 35,000 से अधिक जवानों को तैनात किया गया है। संवेदनशील स्थानों पर वाटर कैनन और वज्र दंगा-रोधी वाहन भी तैनात किए गए हैं। अधिकारी प्रवेश बिंदुओं, परिवहन केंद्रों और प्रदर्शन स्थल के आसपास कड़ी निगरानी रख रहे हैं।
चुनिंदा इलाकों में मोबाइल इंटरनेट निलंबित
दूरसंचार पाबंदियों ने राजधानी भर में लागू किए जा रहे उपायों को और कड़ा कर दिया है। नई दिल्ली जिले के जनपथ और कर्तव्य पथ के आसपास चार किलोमीटर के दायरे सहित कई क्षेत्रों में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी गई हैं। यह पाबंदी शुक्रवार रात 10 बजे शुरू हुई और 24 घंटे तक लागू रहने की योजना है।
अधिकारियों ने यह चेतावनी भी दी है कि प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली में प्रवेश करने का प्रयास करने वाले समर्थकों को हिरासत में लिया जा सकता है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सीजेपी को शहर में किसी भी स्थान पर विरोध प्रदर्शन आयोजित करने की अनुमति नहीं दी गई है।
मेट्रो नेटवर्क पर बड़ा असर
यात्रियों को मेट्रो यात्रा पर भी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ रहा है। दिल्ली मेट्रो के कुल 57 स्टेशनों को शुक्रवार रात 9 बजे से बंद कर दिया गया है, और स्थिति सामान्य होने पर ही इन स्टेशनों पर सेवाएं फिर से शुरू होने की उम्मीद है। नमो भारत कॉरिडोर के सराय काले खां और न्यू अशोक नगर स्टेशन भी शनिवार रात 10 बजे तक बंद रहेंगे। हालांकि, आनंद विहार और मोदीपुरम के बीच नमो भारत सेवाएं अपने सामान्य कार्यक्रम के अनुसार चलने की उम्मीद है।
यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे अपनी यात्रा शुरू करने से पहले अद्यतन जानकारी जरूर जांच लें।
224 से अधिक ट्रेनें रद्द
रेलवे संचालन पर भी अतिरिक्त प्रतिबंधों का असर पड़ा है और शनिवार के लिए 224 से अधिक ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं। प्रभावित सेवाओं में राजधानी, शताब्दी और वंदे भारत ट्रेनों के साथ-साथ 179 लोकल ट्रेनें शामिल हैं।
घोषित व्यवस्था के तहत, नई दिल्ली, हजरत निजामुद्दीन और तिलक ब्रिज स्टेशनों से शुक्रवार दोपहर 2 बजे के बाद रवाना होने वाली ट्रेनों को रद्द कर दिया गया था। शनिवार तड़के 4 बजे से दोपहर 2 बजे के बीच इन स्टेशनों पर पहुंचने वाली सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं। यह व्यवधान 2020 के किसान आंदोलन के दौरान रद्द हुई ट्रेनों की याद दिलाता है।
पुलिस ने 35 हिरासत केंद्र चिह्नित किए
दिल्ली पुलिस ने उभरती स्थिति के सिलसिले में आम आदमी पार्टी (आप), सीजेपी और वामपंथी संगठनों से जुड़े लगभग 200 व्यक्तियों को हिरासत में लिया है। अधिकारियों ने हिरासत में लिए गए लोगों को रखने के लिए 35 निर्दिष्ट केंद्र बनाए हैं। पुलिस ने यह भी चेतावनी दी है कि हवाई अड्डे, रेलवे स्टेशनों या पड़ोसी राज्यों की सीमाओं से निजी वाहनों में आने वाले सीजेपी समर्थकों को हिरासत में लिया जा सकता है।
संयुक्त पुलिस आयुक्त (नई दिल्ली रेंज) नूपुर प्रसाद ने कहा कि सीजेपी प्रतिनिधि सौरभ दास ने 10 अक्टूबर के प्रदर्शन की अनुमति के लिए 7 अक्टूबर को आवेदन जमा किया था। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के आवेदनों को आम तौर पर लगभग 10 दिन पहले प्रस्तुत किए जाने की उम्मीद होती है, और यह अनुरोध उस समय-सीमा को पूरा नहीं करता था।
राजनीतिक मांगों के इर्द-गिर्द केंद्रित प्रदर्शन
यह प्रस्तावित सभा चुनावी प्रक्रियाओं में बदलाव और चुनाव आयोग से अधिक जवाबदेही की आयोजकों की मांगों के बीच हो रही है। एसआईआर कवायद को रोकना और जनवरी 2025 की मतदाता सूची को बहाल करना प्रदर्शनकारियों द्वारा उठाए गए केंद्रीय मुद्दों में शामिल हैं।
इस बीच, व्यापक सुरक्षा तैनाती और परिवहन व कनेक्टिविटी पर पाबंदियों ने दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में सामान्य आवाजाही को प्रभावित किया है। अधिकारी स्थिति के अनुसार इन व्यवस्थाओं की समीक्षा कर रहे हैं, और यात्रियों को आधिकारिक परामर्श का पालन करने की सलाह दी गई है।
