मनमोहन सिंह को भारत रत्न देने की मांग तेज, 94वीं जयंती पर रेवंत रेड्डी समेत कई नेताओं ने उठाई आवाज

नई दिल्ली(राजीव शर्मा): पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की 94वीं जयंती (26 सितंबर) के मौके पर उन्हें भारत रत्न दिए जाने की मांग को नया जोर मिला है, जिसमें उनके सार्वजनिक जीवन, शैक्षणिक उपलब्धियों और आर्थिक नीतियों में योगदान को आधार बनाया जा रहा है।

तेलंगाना सीएम रेवंत रेड्डी की मुखर वकालत
तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने हैदराबाद में पूर्व पीएम की प्रतिमा अनावृत करने के बाद कहा कि सिंह एक राज्यपुरुष थे जिनका योगदान देश याद रखेगा, और सवाल उठाया कि उन्हें अभी तक सर्वोच्च नागरिक सम्मान क्यों नहीं मिला। रेड्डी ने केंद्र से अपील की कि वह पार्टीगत सोच से ऊपर उठकर मनमोहन सिंह को भारत रत्न दे और दिल्ली में उनके नाम का स्मारक/ज्ञान केंद्र स्थापित करे। उन्होंने कांग्रेस सांसदों को संसद में यह मांग उठाने का निर्देश भी दिया।

सहयोगियों ने उजागर किया: शैक्षणिक पृष्ठभूमि और सार्वजनिक सेवा
उनके करीबी रहे पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री अश्विनी कुमार ने कहा कि सिंह का सार्वजनिक सेवा और शैक्षणिक रिकॉर्ड उन्हें इस सम्मान के लिए मजबूत दावेदार बनाता है; उन्होंने उनके विनम्र व्यक्तित्व और आचरण को भी रेखांकित किया। पूर्व योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने सिंह के साधारण पृष्ठभूमि से देश की सर्वोच्च राजनीतिक जिम्मेदारी तक के सफर को याद किया।

आर्थिक सुधारों की नींव: 1991 से पहले भी उदारकरण की वकालत
समर्थकों का कहना है कि 1991 के सुधारों से भी पहले सिंह आर्थिक उदारकरण की बात कर चुके थे; अहलूवालिया के हवाले से बताया गया कि 1971 के बांग्लादेश युद्ध के बाद प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के प्रधान सचिव पी.एन. हक्सर ने देश की आर्थिक दिशा पर सिंह का मत मांगा था, तब सिंह ने व्यापार उदारीकरण और निजी कारोबार पर नियंत्रण कम करने की वकालत की थी। 1971 में आर्थिक सलाहकार के तौर पर सरकार में शामिल हुए सिंह बाद में वित्त मंत्रालय में मुख्य आर्थिक सलाहकार, आरबीआई गवर्नर और वित्त मंत्री बने, फिर 2004–2014 तक प्रधानमंत्री रहे।

शैक्षणिक सफर और पीएम काल की उपलब्धियां
पंजाब यूनिवर्सिटी और कैम्ब्रिज से पढ़ाई और ऑक्सफोर्ड से डॉक्टरेट करने वाले सिंह की पीढ़ी ने अकादमिक काम को सार्वजनिक नीति के साथ जोड़ा; उनके समकालीनों में अमर्त्य सेन और जगदीश भगवती जैसे अर्थशास्त्री शामिल हैं। प्रधानमंत्री के तौर पर दो लगातार यूपीए सरकारों का नेतृत्व करने वाले सिंह के कार्यकाल में भारत-अमेरिका परमाणु समझौते जैसे बड़े कदम और बहस दोनों रहे; साथ ही आरटीई, मनरेगा और 2013 का भूमि अधिग्रहण-पुनर्वास कानून जैसे उपाय भी लागू हुए।

भारत रत्न की बहस और आगे की प्रक्रिया
भारत रत्न देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, जो किसी भी क्षेत्र में असाधारण सेवा/उच्चतम कोटि के प्रदर्शन के लिए दिया जाता है। ताजा मांग ने सिंह के आर्थिक नीति, सार्वजनिक प्रशासन और राजनीतिक नेतृत्व में योगदान पर व्यापक चर्चा फिर से खोल दी है; हालांकि, अंतिम निर्णय स्थापित प्रक्रिया के तहत सरकार का ही होगा। तेलंगाना विधानसभा पहले ही सर्वसम्मति से केंद्र को भारत रत्न देने का प्रस्ताव पारित कर चुकी है।

By Rajeev Sharma

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