उत्तराखंड(राजीव शर्मा): उत्तराखंड में केदारनाथ ट्रेकिंग रूट पर रविवार देर रात आए भूस्खलन के बाद चिरबासा इलाके में फंसे लगभग 1,500 तीर्थयात्रियों को एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और डीडीआरएफ की संयुक्त टीमों ने सोमवार को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, अधिकारियों ने बताया।
घटनास्थल और खतरे की स्थिति
तीर्थयात्री गौरीकुंड से करीब तीन किलोमीटर आगे चिरबासा क्षेत्र में फंस गए थे, जहां रविवार देर रात भूस्खलन से रास्ता अवरुद्ध हो गया। पहाड़ी से लगातार चट्टानें गिरने लगीं, जिससे उस हिस्से से गुजरना बेहद जोखिम भरा हो गया। एसडीआरएफ के मुताबिक, सोनप्रयाग पुलिस को विपरीत छोर पर फंसे श्रद्धालुओं की सूचना मिली थी।
रेस्क्यू ऑपरेशन—कैसे हुआ बचाव
सोनप्रयाग से उप-निरीक्षक आशीष डिमरी के नेतृत्व में एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची तो चिरबासा हेलीपैड के पास भारी मलबा पाया गया। गिरते पत्थरों और अस्थिर जमीन के खतरे को देखते हुए एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और डीडीआरएफ के कर्मियों ने मिलकर तीर्थयात्रियों को प्रभावित हिस्से से पार कराया। टीमों ने उन्हें भूस्खलन ज़ोन से सावधानीपूर्वक निकाला और बाद में गौरीकुंड की ओर मार्गदर्शन किया। चूंकि रास्ता और भी चट्टान गिरने के प्रति संवेदनशील बना हुआ था, इसलिए ऑपरेशन बेहद सतर्कता से किया गया।
चार धाम यात्रा फिर स्थगित—मौसम की मार
इस बीच, लगातार भारी बारिश के कारण उत्तराखंड में चार धाम यात्रा रविवार को दूसरे लगातार दिन भी निलंबित रही। प्रतिकूल मौसम से तीर्थ मार्ग के कई हिस्सों में आवाजाही बाधित हुई और अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
प्रशासन की सलाह
अधिकारियों ने तीर्थयात्रियों से प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करने और भूस्खलन या लगातार बारिश के कारण असुरक्षित माने जा रहे क्षेत्रों में यात्रा से बचने की अपील की है
