राष्ट्रपति ने वडोदरा में ब्रह्माकुमारीज के कार्यक्रम का शुभारंभ किया, ग्लोबल स्पिरिचुअल पैलेस का उद्घाटन

नई दिल्ली(राजीव शर्मा): राष्ट्रपति ने कहा कि मनुष्य के भीतर परिवर्तन की संभावना रहती है। यदि किसी व्यक्ति के भीतर यह विश्वास जागे कि विचारों और कर्मों को बदलने से उसका जीवन बदल सकता है और यदि उसके जीवन में आशा और आत्मसम्मान वापस आए तो वह केवल उस व्यक्ति में नहीं, बल्कि पूरे समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बनेगा। उन्‍होंने विश्‍वास व्‍यक्‍त किया कि आज शुभारंभ होने के बाद ग्लोबल स्पिरिचुअल पैलेस एक ऐसा स्थान बनेगा, जहां समाज के विभिन्न वर्गों के लोग एक-दूसरे के साथ शांति और सद्भाव से जुड़ सकेंगे।

राष्ट्रपति ने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल की जन्मस्थली नडियाद में ‘विकसित भारत के लिए युवा: राष्ट्र निर्माण के लिए आंतरिक शक्ति की जागृति’ कार्यक्रम का वर्चुअल रूप से उद्घाटन करके अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। उन्होंने कहा कि जब युवा अपने विचारों, भावनाओं और कर्मों को सकारात्मक दिशा देते हैं, तब उसका प्रभाव परिवार, कार्यस्थल, समुदाय और अंततः पूरे राष्ट्र पर पड़ता है। इसलिए, “आंतरिक शक्ति का जागरण” केवल व्यक्तिगत विकास का संदेश नहीं है, बल्कि राष्ट्र निर्माण की एक गहरी प्रक्रिया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि युवाओं को सशक्त बनाना हम सब की जिम्मेदारी है। हमें उन्‍हें आत्मनिर्भर, शांतिपूर्ण और जिम्मेदार बनाना है।

राष्ट्रपति ने कहा कि आत्म-परिवर्तन को समाज परिवर्तन का आधार माना गया है। आज आवश्यकता इस बात की है कि हम अपनी इस महान विरासत को आधुनिक जीवन की आवश्यकताओं के साथ जोड़ें। हमारा लक्ष्य ऐसे भारत का निर्माण होना चाहिए जो आर्थिक रूप से समृद्ध हो, वैज्ञानिक रूप से उन्नत हो, सामाजिक रूप से समावेशी हो और आध्यात्मिक रूप से जागृत हो।भारत की राष्ट्रपति, श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज, 23 सितंबर 2026 को गुजरात के वडोदरा में ब्रह्माकुमारीज के कार्यक्रम ‘विश्व नवीनीकरण के लिए आध्यात्मिक जागरण’ का शुभारंभ किया और ‘ग्लोबल स्पिरिचुअल पैलेस’ रिट्रीट सेंटर का उद्घाटन किया। इस अवसर पर, राष्ट्रपति ने ब्रह्माकुमारीज नडियाद, गुजरात के ‘विकसित भारत के लिए युवा: राष्ट्र निर्माण के लिए आंतरिक शक्ति की जागृति’ कार्यक्रम का भी वर्चुअल रूप से शुभारंभ किया।

सभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि आज केवल आर्थिक विकास नहीं बल्कि मानवीय विकास की भी आवश्यकता है। हमें ऐसी शिक्षा की आवश्‍यकता है जो केवल बुद्धि को विकसित न करे, बल्कि विवेक को भी जागृत करे। हमें ऐसी प्रगति की आवश्‍यकता है जिसमें प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता हो। हमें ऐसी शक्ति चाहिए जो दूसरों पर नियंत्रण करने के बजाय स्वयं पर नियंत्रण करना सिखाए। हमें ऐसी आध्यात्मिकता चाहिए जो मनुष्य को मनुष्य से जोड़ती हो। उन्हें यह जानकर प्रसन्नता हुई कि ब्रह्माकुमारीज संस्था ने ध्यान और आध्यात्मिक ज्ञान के माध्यम से व्यक्तिगत परिवर्तन और विश्व नवीनीकरण का संदेश भारत ही नहीं, बल्कि विश्व के अनेक देशों तक पहुंचाया है।

By Rajeev Sharma

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