नई दिल्ली (राजीव शर्मा): अहमदाबाद में दुर्घटनाग्रस्त हुए एयर इंडिया के बोइंग 787 विमान से जुड़े तकनीकी रिकॉर्ड्स के रखरखाव और संचालन पर सवाल उठने लगे हैं। अमेरिका स्थित एक विमानन सुरक्षा संगठन ने आरोप लगाया है कि जांचकर्ताओं को विमान प्रणालियों में बार-बार आने वाली खराबी को रेखांकित करने वाला व्यापक डेटा मिला था, लेकिन इन निष्कर्षों को अब तक सार्वजनिक नहीं किया गया है।
‘फाउंडेशन फॉर एविएशन सेफ्टी’ का कहना है कि बोइंग 787 विमान (पंजीकरण: VT-ANB) से जुड़े सैकड़ों दस्तावेजों में इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक और फ्लाइट-कंप्यूटर सिस्टम में बार-बार आ रही समस्याओं की जानकारी दर्ज है। संगठन का तर्क है कि यह सामग्री जांचकर्ताओं को जून 2025 के हादसे से पहले विमान की स्थिति और उसके संचालन इतिहास को फिर से समझने में मदद कर सकती है।
हालांकि, इन दावों से यह साबित नहीं हुआ है कि सामने आई तकनीकी समस्याओं में से किसी के कारण ही यह दुर्घटना हुई थी।
जून 2025 में एयर इंडिया की उड़ान AI-171 के इस अहमदाबाद हादसे में 260 लोगों की जान चली गई थी। विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) हादसे से जुड़ी परिस्थितियों की जांच कर रहा है।
फाउंडेशन के कार्यकारी निदेशक एड पियर्सन ने सवाल उठाया है कि ब्यूरो द्वारा सार्वजनिक रूप से जारी जांच सामग्री में इस तकनीकी जानकारी को शामिल क्यों नहीं किया गया और इन निष्कर्षों के आधार पर कोई अंतरिम सुरक्षा सिफारिश क्यों जारी नहीं की गई।
एएआईबी ने तकनीकी सामग्री मिलने की पुष्टि की
एएआईबी (AAIB) ने स्वीकार किया है कि फाउंडेशन द्वारा उपलब्ध कराई गई तकनीकी जानकारी 10 जून को यूके एएआईबी विशेषज्ञ के जरिए जांच दल तक पहुंची थी। ब्यूरो ने कहा कि AI-171 जांच दल के सदस्यों द्वारा इस सामग्री की जांच की गई थी।
ब्यूरो की यह स्वीकारोक्ति ही फाउंडेशन की आलोचना का मुख्य बिंदु बन गई है। पियर्सन का तर्क है कि मुद्दा केवल यह नहीं है कि जांचकर्ताओं को दस्तावेज मिले या नहीं, बल्कि यह है कि क्या संभावित रूप से महत्वपूर्ण सुरक्षा जानकारी का पर्याप्त मूल्यांकन किया गया और उसे साझा किया गया।
फाउंडेशन ने विशेष रूप से विमान के ‘एयरक्राफ्ट कम्युनिकेशंस एड्रेसिंग एंड रिपोर्टिंग सिस्टम’ (ACARS) और ‘एयरक्राफ्ट हेल्थ मॉनिटरिंग’ (AHM) सिस्टम के जरिए दर्ज डेटा की ओर इशारा किया है। संगठन के अनुसार, इन रिकॉर्ड्स में सिस्टम की खराबी और दुर्घटना से पहले की विशिष्ट घटनाओं के समय से जुड़े विवरण हो सकते हैं।
ऐसी जानकारी संभावित रूप से विमान की स्थिति की व्यापक पड़ताल का हिस्सा बन सकती है, हालांकि इसके वास्तविक महत्व का निर्धारण केवल पूरी जांच और तकनीकी विश्लेषण के जरिए ही किया जा सकता है।
अंतरिम सुरक्षा कार्रवाई पर बहस
पियर्सन ने यह भी सवाल उठाया कि यदि जांचकर्ताओं को ऐसे किसी तत्काल जोखिम की पहचान हुई थी जो अन्य विमानों को प्रभावित कर सकता था, तो क्या इस सामग्री के आधार पर कोई अंतरिम सुरक्षा सिफारिश जारी नहीं की जानी चाहिए थी?
फाउंडेशन का मानना है कि विमानन जांचकर्ताओं को सबूत सामने आते ही सुरक्षा प्रभावों का आकलन करना चाहिए, न कि केवल अंतिम दुर्घटना रिपोर्ट के प्रकाशन का इंतजार करना चाहिए।
संगठन की चिंताएं सार्वजनिक जांच दस्तावेजों में शामिल तकनीकी जानकारी की मात्रा को लेकर भी हैं। फाउंडेशन का कहना है कि उसने जिन रिकॉर्ड्स की पहचान की है, उन्हें प्रारंभिक या बाद की अंतरिम रिपोर्टों में दर्ज नहीं किया गया।
इसलिए फाउंडेशन ने तकनीकी साक्ष्यों को लेकर अधिक पारदर्शिता बरतने की मांग की है और कहा है कि इस सामग्री को औपचारिक रूप से जांच रिकॉर्ड में शामिल किया जाए।
जांच जारी
दूसरी ओर, एएआईबी ने इस बात से इनकार किया है कि प्रासंगिक साक्ष्यों की अनदेखी की जा रही है। ब्यूरो ने कहा कि यह जांच भारत के विमान (दुर्घटनाओं और घटनाओं की जांच) नियम, 2025 के साथ-साथ आईसीएओ (ICAO) एनेक्स 13 में निर्धारित मानकों के तहत की जा रही है।
ब्यूरो ने दोहराया कि निष्पक्ष जांच के तहत सभी प्रासंगिक तथ्यों और सबूतों की पड़ताल की जा रही है।
लिहाजा, यह पूरा विवाद दुर्घटना के कारण को स्थापित करने के बजाय पारदर्शिता और खुलासे के समय पर केंद्रित है। फाउंडेशन द्वारा रेखांकित तकनीकी रिकॉर्ड जांच के लिए प्रासंगिक हो सकते हैं, लेकिन केवल उनकी मौजूदगी यह साबित नहीं करती कि विमान प्रणालियों की विफलता ही हादसे की मुख्य वजह थी।
जैसे-जैसे जांचकर्ता अपना काम आगे बढ़ा रहे हैं, नजरें इस बात पर टिकी रहेंगी कि तकनीकी सबूतों का मूल्यांकन किस तरह किया जाता है, किन निष्कर्षों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि हो सकती है और क्या कोई जानकारी अंतिम रिपोर्ट आने से पहले ही किसी सुरक्षा कदम की मांग करती है।
