पठानकोट के लधपालवां टोल पर हंगामा: माइनिंग चेकिंग के दौरान ट्रक ड्राइवरों ने बैरियर तोड़े, जबरदस्ती निकाले टिप्पर; मौके पर पहुंची पुलिस

जिला पठानकोट में अवैध खनन और माइनिंग को लेकर अक्सर तनाव की स्थिति देखने को मिलती है। इसी तरह का एक मामला पठानकोट के लधपालवां टोल प्लाजा पर सामने आया, जहां माइनिंग विभाग द्वारा वाहनों की चेकिंग के दौरान अचानक स्थिति तनावपूर्ण हो गई।

टिप्परों की चैकिंग को लेकर चालकों और माइनिंग विभाग के अधिकारियों के बीच कहासुनी हुई। जिसके बाद टिप्पर चालकों ने बैरियर तोड़कर तेज रफ्तार में टिप्परों को टोल प्लाजा से भगा लिया। मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की।

लेकिन, आक्रोशित टिप्पर चालकों ने विभागीय अधिकारियों पर जबरन वसूली के आरोप लगाकर गाड़ियों को भगा लिया। वाहन इतनी तेज गति से निकले कि अगर कोई सामने आता तो कुचला जाता। हालांकि टोल पर मौजूद पुलिस टीम की सूचने के बाद डीएसपी रूरल सुखजिंदर सिंह मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित किया।

पुलिस और माइनिंग विभाग के अधिकारियों ने कहा कि कानून हाथ में लेने वाले ट्रांस्पोर्टरों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

टिप्पर चालकों ने लोगों का परवाह किए बिना तेज गति से निकाले टिप्पर।

टिप्पर चालकों ने लोगों का परवाह किए बिना तेज गति से निकाले टिप्पर।

टोल बैरियर तोड़कर भागे ट्रक, मचा हड़कंप

जानकारी के मुताबिक, माइनिंग विभाग की टीम टोल प्लाजा पर क्रशर मटेरियल (रेत-बजरी) लेकर जा रहे ट्रकों के बिलों की जांच कर रही थी। चेकिंग के दौरान ट्रक ड्राइवरों और माइनिंग कर्मचारियों के बीच तीखी बहस हो गई।

देखते ही देखते कुछ ट्रक ड्राइवर टोल प्लाजा के बूम बैरियर तोड़कर अपने वाहन भगा ले गए। मौके पर मौजूद पुलिस टीम ने वाहनों को रोकने का प्रयास किया, लेकिन कई ट्रक वहां से निकलने में कामयाब रहे, जिससे मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

ट्रक चालकों का माइनिंग विभाग पर गंभीर आरोप

माइनिंग विभाग की कार्रवाई से नाराज ट्रांस्पोर्टरों संजय, नीरज और अनुज ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा:

पक्षपात का आरोप: बड़ी फर्मों और क्रशरों के ट्रकों को कथित तौर पर बिना किसी रोक-टोक के जाने दिया जाता है, जबकि एकाध (छोटे) ट्रांस्पोर्टरों को रोककर भारी-भरकम चालान काटे जाते हैं।

अवैध वसूली का दावा: ड्राइवरों ने आरोप लगाया कि रास्ते में नाका लगाकर बिना बिल के गाड़ियां निकालने के एवज में ₹500 से ₹1500 तक की मांग की जाती है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों पर उठे सवाल

घटना के दौरान एक और गंभीर लापरवाही सामने आई कि सड़क पर दौड़ रहे कई ट्रकों पर नंबर प्लेट्स ही नहीं थीं। स्थानीय लोगों और प्रतिनिधियों ने सवाल उठाया कि यदि बिना नंबर प्लेट की इन गाड़ियों से कोई सड़क दुर्घटना या वारदात होती है, तो इन्हें ट्रेस करना बहुत बड़ी चुनौती होगा। इस पर संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

किसान नेता इंदरपाल सिंह बैंस ने उठाए सवाल

भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) के यूथ पंजाब अध्यक्ष इंदरपाल सिंह बैंस ने कहा कि जब मानसून और सरकारी नियमों के चलते पोर्टल बंद हैं, तो क्रशरों से बिना बिल के माल कैसे भरा जा रहा है? उन्होंने मांग की कि केवल ड्राइवरों पर कार्रवाई करने के बजाय अवैध खनन करवाने वाले क्रशर मालिकों पर आपराधिक पर्चे (मामले) दर्ज किए जाएं।

डीएसपी रूरल सुखजिंदर पाल सिंह ने मौके पर पहुंच हालात पर पाया काबू।

डीएसपी रूरल सुखजिंदर पाल सिंह ने मौके पर पहुंच हालात पर पाया काबू।

माइनिंग अधिकारी और पुलिस प्रशासन का पक्ष

माइनिंग जेई भानू प्रताप का बयान: आरोपों को खारिज करते हुए जेई भानू प्रताप ने कहा कि विभाग की टीम केवल गाड़ियों के बिल जांच रही थी। जिनके पास वैध बिल पाए गए, उन्हें जाने दिया गया और बिना बिल वाले वाहनों को रोका गया।

डीएसपी रूरल सुखजिंदर सिंह की चेतावनी: स्थिति बिगड़ने पर पहुंचे डीएसपी (दिहाती) सुखजिंदर सिंह ने खुद मोर्चा संभाला। उन्होंने क्रशर मटेरियल से भरे वाहनों को रुकवाकर सख्त चेतावनी दी कि “कानून का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”

By Gurpreet Singh

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