दो-दिवसीय ICMR-शाइन 2026 संपन्न, हजारों युवाओं में वैज्ञानिक जिज्ञासा को मिला बढ़ावा

नई दिल्ली(राजीव शर्मा):स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग – भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (डीएचआर- आईसीएमआर) ने 11-12 अगस्त 2026 को आईसीएमआर-शाइन (अगली पीढ़ी के खोजकर्ताओं के लिए विज्ञान एवं स्वास्थ्य संबंधी नवाचार) के दूसरे संस्करण का सफलतापूर्वक आयोजन किया। इस कार्यक्रम ने देश भर के स्कूली विद्यार्थियों को जैवचिकित्सा एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य से संबंधित अनुसंधान की दुनिया से जोड़ा। प्रधानमंत्री के “एक दिन वैज्ञानिक के तौर पर बिताने” के आह्वान को आगे बढ़ाते हुए, इस देशव्यापी संपर्क कार्यक्रम ने कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए आईसीएमआर के प्रयोगशालाओं के दरवाजे खोले, जिससे उन्हें सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े विज्ञान को देखने, अनुभव करने और सीधे बातचीत करने का अवसर मिला।

यह पहल 31 राज्यों और केन्द्र-शासित प्रदेशों की 83 अलग-अलग स्थानों पर चलाई गई। यह बड़े शहरों से आगे बढ़कर जम्मू एवं कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, असम, अंडमान और झारखंड, ओडिशा व मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाकों की शांत घाटियों तथा दूर-दराज के इलाकों तक पहुँची। जिन हजारों विद्यार्थियों ने पहले कभी अनुसंधान का माहौल नहीं देखा था, उनके लिए आईसीएमआर-शाइन ने जैवचिकित्सा से संबंधित अनुसंधान की दुनिया में कदम रखने का एक बढ़िया अवसर दिया। संवादात्मक वीडियो, पोस्टर और कट-आउट में दिखने वाले मित्रवत आधिकारिक शुभंकर, डॉ. क्यूरियो के मार्गदर्शन में, इस माहौल को ऐसा बनाया गया कि जटिल विज्ञान भी आकर्षक, आसान और मजेदार लगे।

नागपुर और गोरखपुर में, विद्यार्थी पहियों पर बनी अत्याधुनिक चलंत बीएसएल-3 प्रयोगशाला का निकट से अवलोकन किया और यह देखा कि कैसे उच्च-निरोधक अनुसंधान (हाई-कंटेनमेंट रिसर्च) सीधे जमीनी स्तर तक पहुंचती है। दूसरे केन्द्रों में, युवा आगंतुकों ने पोस्टर वॉक, सजीव वैज्ञानिक प्रदर्शनों और बॉडी मास इंडेक्स की गणना व प्रयोगशाला में स्वच्छता जैसी व्यावहारिक गतिविधियों में हिस्सा लिया। उन्होंने सीखा कि दैनिक स्वास्थ्य से जुड़े निर्णय किस तरह राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य की बड़ी तस्वीर से जुड़े होते हैं। दिल्ली में, युवाओं में नवाचार का उत्साह साफ दिखा। वहां विद्यार्थियों ने नीति आयोग के तहत अटल टिंकरिंग लैब्स में तैयार किए गए रचनात्मक समाधानों को प्रदर्शित किया। इससे साबित हुआ कि बेहतरीन वैज्ञानिक विचारों के लिए उम्र की कोई सीमा नहीं होती।

इस पहल के एक हिस्से के रूप में, आईसीएमआर ने आधिकारिक शाइन वेबसाइट (https://shine.icmr.org.in/) लॉन्च की है, जो विद्यार्थियों को स्वास्थ्य संबंधी अनुसंधान से जुड़े संसाधनों, प्रोग्राम अपडेट और मौकों तक पहुंच प्रदान करती है। आईसीएमआर ने एक देशव्यापी शाइन स्कूल प्रतियोगिता की घोषणा भी की है, जिसमें विद्यार्थियों को वास्तविक दुनिया की सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों की पहचान करने, अनुसंधान से जुड़े प्रश्न तैयार करने और संभावित समाधान सुझाने के लिए आमंत्रित किया गया है। यह प्रतियोगिता “एक दिन वैज्ञानिक के तौर पर बिताने” के विचार को एक कदम आगे ले जाएगी और विद्यार्थियों को वैज्ञानिक जांच और नवाचार के दृष्टिकोण से अपने आस-पास की स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों को देखने के लिए प्रोत्साहित करेगी। इसके लिए आवेदन 11 सितंबर 2026 तक खुले हैं और इन्हें शाइन पोर्टल पर जमा किया जा सकता है।

इस पहल को देश भर के स्कूलों से उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली। शिक्षकों ने इस कार्यक्रम का स्वागत किया क्योंकि इससे विद्यार्थियों को कक्षाओं से बाहर वैज्ञानिक अनुसंधान तथा प्रयोगशाला के कार्यों का बहुमूल्य अनुभव मिला। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि इसे थोड़े -थोड़े अंतराल पर अक्सर आयोजित किया जाना चाहिए। स्कूल प्रतियोगिता को लेकर भी काफी उत्साह दिखा। एक स्कूल ने तो घोषणा की कि उसके सभी विद्यार्थी इसमें हिस्सा लेंगे और उनकी प्रस्तुतियों को स्कूल की परीक्षाओं के दौरान उनके इंटरनल प्रोजेक्ट असेसमेंट में शामिल किया जाएगा।

आईसीएमआर-शाइन के जरिए, हजारों विद्यार्थी विज्ञान के बारे में सिर्फ पढ़ने-लिखने से आगे बढ़कर उसे देखने, अनुभव करने और उससे जुड़े प्रश्न पूछने लगे हैं। अनुसंधान के अनुभवों को पारंपरिक केन्द्रों से निकालकर देश भर के स्कूलों और विभिन्न स्थानों तक पहुंचाकर, यह कार्यक्रम युवाओं के लिए विज्ञान को सीधे तौर पर जानने-समझने के अवसर सृजित कर रहा है। आईसीएमआर युवा विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने में मदद कर रहा है और उन्हें विज्ञान को समझने, नवाचार करने और एक स्वस्थ व विकसित भारत बनाने में योगदान देने हेतु प्रोत्साहित कर रहा है।

By Rajeev Sharma

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