चंडीगढ़(गुरप्रीत सिंह):कर्मचारियों के हित और अधिकारों की दिशा में एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए पंजाब विधानसभा ने सोमवार को ‘पंजाब स्टेट आउटसोर्स्ड पर्सोनल (ट्रांजिशन टू कॉन्ट्रैक्चुअल एंगेजमेंट) बिल-2026’ को सर्वसम्मति से पारित कर दिया। इस दौरान मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने सरकारी रोजगार में दशकों से चली आ रही ठेकेदारी आउटसोर्सिंग व्यवस्था को खत्म करने और कर्मचारियों के शोषण पर रोक लगाने का ऐलान किया।

इस ऐतिहासिक कानून से निजी ठेकेदारों की भूमिका खत्म होगी। पहले चरण में करीब 26,000 से 28,000 आउटसोर्स कर्मचारियों को सरकार के साथ सीधे कॉन्ट्रैक्ट के तहत लाया जाएगा। पात्र कर्मचारियों को प्रोविडेंट फंड, ग्रेच्युटी, ईएसआई, मातृत्व अवकाश और आकस्मिक अवकाश जैसे लाभ मिलेंगे। इसके साथ ही आउटसोर्सिंग एजेंसियों द्वारा वसूले जाने वाले 15 से 22 प्रतिशत कमीशन की कटौती भी कर्मचारियों के वेतन से नहीं होगी।
विधानसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि ‘पंजाब स्टेट आउटसोर्स्ड पर्सोनल (ट्रांजिशन टू कॉन्ट्रैक्चुअल एंगेजमेंट) बिल-2026’ कर्मचारियों के हित में लिया गया ऐतिहासिक फैसला है। उन्होंने कहा कि यह कर्मचारियों के कल्याण और अधिकारों के लिए पंजाब के इतिहास के सबसे बड़े फैसलों में से एक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज से पंजाब में आउटसोर्सिंग की दशकों पुरानी व्यवस्था खत्म हो जाएगी। सरकारी रोजगार में निजी ठेकेदारों की भूमिका समाप्त होगी और सरकार तथा कर्मचारियों के बीच सीधा संबंध स्थापित होगा।
आउटसोर्स कर्मचारियों के योगदान का जिक्र करते हुए मान ने कहा कि पंजाब में हजारों आउटसोर्स कर्मचारी कई वर्षों से राज्य की सेवा कर रहे हैं। इन कर्मचारियों ने पंजाब की प्रगति, खुशहाली और सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
उन्होंने कहा कि आउटसोर्सिंग व्यवस्था के कारण कर्मचारियों के बीच नौकरी को लेकर हमेशा अनिश्चितता बनी रहती थी। नौकरी की असुरक्षा का असर उनके जीवन पर भी पड़ता था। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब आम आदमी पार्टी की सरकार ने इन कर्मचारियों को उनके अधिकार देने का फैसला किया है, जिसके वे वास्तव में हकदार हैं।
मान ने कहा कि ये कर्मचारी अब ‘आउटसोर्स्ड’ नहीं रहेंगे, बल्कि सरकार के ‘इन-सोर्स्ड’ कर्मचारी बनेंगे। इसका मतलब है कि वे सीधे सरकार की व्यवस्था का हिस्सा होंगे।
ठेकेदारी व्यवस्था में शोषण खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम
मुख्यमंत्री ने बिल को ठेकेदारी व्यवस्था के जरिए होने वाले शोषण को खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा कि सरकारी विभागों और सरकारी नियंत्रण वाले संस्थानों में काम कर रहे पात्र आउटसोर्स कर्मचारियों को सरकार द्वारा सीधे कॉन्ट्रैक्ट के तहत लाया जाएगा।
उन्होंने बताया कि यह बिल ग्रुप-सी और ग्रुप-डी श्रेणी के उन पात्र आउटसोर्स कर्मचारियों पर लागू होगा, जो आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं में कार्यरत हैं और निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करते हैं। पहले चरण में करीब 26,000 से 28,000 आउटसोर्स कर्मचारियों को इस पहल का लाभ मिलेगा।
कर्मचारियों को मिलेंगे कई सामाजिक सुरक्षा लाभ

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि इन कर्मचारियों को मिलने वाला वेतन उनकी मौजूदा सैलरी या कानूनी रूप से निर्धारित न्यूनतम वेतन, जो भी लागू हो, उससे कम नहीं होगा।
उन्हें प्रोविडेंट फंड और ग्रेच्युटी का लाभ मिलेगा। इसके अलावा वे ईएसआई, मातृत्व अवकाश और नियमित कर्मचारियों की तरह साल में 10 दिन की आकस्मिक छुट्टी के भी हकदार होंगे।
मान ने बताया कि इन कर्मचारियों का भी नियमित कर्मचारियों की तरह आईएचआरएमएस खाता होगा। इससे उनके सेवा रिकॉर्ड और रोजगार से जुड़ी प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।
कर्मचारियों को सीधे मिलेगा कमीशन का लाभ
मुख्यमंत्री ने कहा कि आउटसोर्सिंग एजेंसियों द्वारा अब तक वसूला जाने वाला 15 से 22 प्रतिशत कमीशन कर्मचारियों के वेतन से नहीं काटा जाएगा। इसका सीधा लाभ कर्मचारियों को मिलेगा।
उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से कर्मचारियों को आर्थिक राहत मिलेगी और सरकारी रोजगार व्यवस्था में निजी ठेकेदारों की भूमिका खत्म होने से कर्मचारियों और सरकार के बीच सीधा संबंध स्थापित होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह फैसला कर्मचारियों के सम्मान, अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ सरकारी रोजगार व्यवस्था में पारदर्शिता लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
