तमिलनाडु(राजीव शर्मा): विधानसभा ने एक प्रस्ताव एकमत से पारित कर के राज्य के सरकारी कार्यक्रमों में पहले गाए जाने वाले गीत के रूप में ‘तमिल थाई वज़्थु’ को लागू करने का फैसला किया है, जिससे राज्य की तमिल भाषा और सांस्कृतिक पहचान पर ज़ोर दिया गया है।
यह प्रस्ताव मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने रखा और इसमें सत्तापक्ष व विपक्ष दोनों का समर्थन मिला, जिसमें डीएमके और एआईएडीएमके भी शामिल हैं। सरकार ने कहा कि आधिकारिक कार्यक्रमों में गीतों के क्रम में राज्य गीत को पहले स्थान पर रखा जाना चाहिए।
विधानसभा में बोलते हुए विजय ने कहा कि तमिल नाडु अपनी भाषाई व सांस्कृतिक अधिकारों की रक्षा जारी रखेगा। उन्होंने तमिल को सिर्फ संपर्क का साधन नहीं बल्कि लोगों की भावनाओं और पहचान से गहराई से जुड़ा हुआ बताया।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य गीत को प्राथमिकता देने का मतलब राष्ट्रीय एकता के खिलाफ कुछ नहीं है। उन्होंने कहा कि तमिल थाई वज़्थु का सम्मान भारत के “एकता में विविधता” के सिद्धांत के अनुरूप है और इसे राजनीतिक विवाद नहीं बनाना चाहिए।
राज्य गीत आधिकारिक कार्यक्रमों से पहले गाया जाएगा
प्रस्ताव के अंतर्गत तमिल थाई वज़्थु को तमिल नाडु में शैक्षणिक संस्थान, विश्वविद्यालय, सरकारी विभाग, सार्वजनिक उपक्रम और अन्य सार्वजनिक संगठनों द्वारा आयोजित कार्यक्रमों की शुरुआत में गाया जाएगा।
विधानसभा प्रस्ताव में याद दिलाया गया कि राज्य ने 1970 में एक आदेश जारी किया था जिसमें आधिकारिक समारोहों की शुरुआत में तमिल थाई वज़्थु गाने का निर्देश दिया गया था। यह गीत दिसंबर 2021 में औपचारिक रूप से राज्य-गीत का दर्जा दिया गया था, और कार्यक्रमों की शुरुआत से पहले इसे गाने के निर्देश दिए गए थे।
यह गीत 1891 के तमिल नाटक ‘मनोनमीयम’ से लिया गया है, जिसे मनोनमीयम् सुंदरनार ने लिखा था। प्रस्ताव ने तमिल की लंबी साहित्यिक व सांस्कृतिक परंपरा को उजागर किया और भाषा को विश्व की प्राचीन शास्त्रीय परंपराओं में से एक बताया।
निर्णय उस समय आया जब गीतों के क्रम पर बहस चल रही है
विधानसभा की यह पहल उस समय आई है जब गृह मंत्रालय ने राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों से कहा है कि वे अपने पहले निर्देश के अनुसार राष्ट्रीय गान से पहले ‘वंदे मातरम्’ बजाने पर विचार करें।
ऐसे संदर्भ में तमिल नाडु सरकार ने दोहराया है कि राज्य के भीतर आयोजित कार्यक्रमों की शुरुआत में राज्य गीत को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
स्पीकर जे सी डी प्रकाशकर ने कहा कि प्रस्ताव एकमत से पारित हो गया है और इसके कार्यान्वयन के लिए किसी बाहरी प्राधिकरण की मंजूरी की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि विधानसभा का यह निर्णय तमिल नाडु और उसके लोगों की सामूहिक आवाज़ का प्रतिनिधित्व करता है।
