नई दिल्ली/चंडीगढ़: शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद पंजाब की राजनीति में एक बार फिर SAD-BJP गठबंधन की संभावित वापसी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, दोनों दलों की ओर से अभी तक गठबंधन को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
सुखबीर बादल और प्रधानमंत्री मोदी की यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दल अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं। दोनों नेताओं की मुलाकात को करीब छह साल बाद राजनीतिक संपर्क के लिहाज से अहम माना जा रहा है। SAD और BJP का पुराना गठबंधन 2020 में कृषि कानूनों के मुद्दे पर टूट गया था।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, बैठक का आधिकारिक एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया है। हालांकि, राजनीतिक हलकों में इसे दोनों दलों के बीच रिश्तों में संभावित नरमी के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। कुछ रिपोर्टों में इसे ‘आइस-ब्रेकर’ बैठक भी बताया गया है।
पंजाब में इस संभावित राजनीतिक समीकरण का असर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी समेत अन्य दलों की चुनावी रणनीति पर भी पड़ सकता है। अगर SAD और BJP दोबारा साथ आते हैं, तो राज्य में चुनावी मुकाबले का गणित बदल सकता है। वहीं, फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि दोनों दल वास्तव में गठबंधन की ओर बढ़ रहे हैं, क्योंकि इस संबंध में कोई औपचारिक फैसला सामने नहीं आया है।
SAD और BJP पहले लंबे समय तक पंजाब में गठबंधन सहयोगी रहे हैं। 2020 में अलग होने के बाद दोनों पार्टियों ने अलग-अलग चुनावी रणनीति अपनाई। अब सुखबीर बादल और PM मोदी की मुलाकात ने पुराने राजनीतिक समीकरणों की वापसी की संभावनाओं को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
