नई दिल्ली(राजीव शर्मा) : करीब तीन दशक तक कानून की आंखों में धूल झोंकने वाला हरियाणा पुलिसकर्मी की हत्या का आरोपी आखिरकार पुलिस के शिकंजे में आ गया। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 28 वर्षों से फरार चल रहे राजिंदर बैरागी को मध्य प्रदेश के अशोक नगर जिले से गिरफ्तार किया है। आरोपी ने अपनी पहचान बदलकर न केवल नया नाम अपना लिया था, बल्कि शिक्षक, प्रॉपर्टी कारोबारी और कथित डॉक्टर के रूप में सामान्य जीवन भी जी रहा था।
पुलिस के मुताबिक, 53 वर्षीय आरोपी राजिंदर बैरागी कई नामों से रह रहा था, जिनमें राजेंद्र सिंह यादव और डॉ. झटका प्रमुख हैं। वह वर्ष 1999 में उत्तर प्रदेश पुलिस की हिरासत से फरार हो गया था। उस समय उसे गाजियाबाद जेल से सोनीपत अदालत ले जाया जा रहा था। गन्नौर रेलवे स्टेशन के पास उसने पुलिस को चकमा देकर फरार होने में सफलता हासिल की थी।
पुराने मामलों की जांच में खुला राज
दिल्ली पुलिस की उत्तरी रेंज-1 (NR-1) क्राइम ब्रांच लंबे समय से ऐसे घोषित अपराधियों की तलाश कर रही थी, जो वर्षों से फरार थे। इसी अभियान के दौरान वर्ष 1997 के दो पुराने मामलों की जांच शुरू की गई। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि राजिंदर न केवल हत्या के प्रयास के मामलों में वांछित है, बल्कि हरियाणा पुलिस के एक कर्मचारी की हत्या का भी मुख्य आरोपी है। रोहिणी अदालत ने उसे वर्ष 2008 में उद्घोषित अपराधी घोषित किया था।
नई पहचान बनाकर बसाया नया ठिकाना
जांच एजेंसियों के अनुसार, फरारी के बाद आरोपी ने सबसे पहले महाराष्ट्र के कोलाबा में कुछ समय तक केंद्रीय विद्यालय में शारीरिक शिक्षा शिक्षक के रूप में काम किया। बाद में वह मध्य प्रदेश के मुंगावली में जाकर बस गया। यहां उसने अपना नाम बदल लिया और स्थानीय दस्तावेज बनवाकर पूरी तरह नई पहचान स्थापित कर ली।
पुलिस का कहना है कि उसने आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस और डोमिसाइल प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज भी तैयार करा लिए थे। इलाके में वह “डॉ. झटका” के नाम से जाना जाने लगा और बिना पंजीकरण के छोटा क्लीनिक चलाने के साथ-साथ प्रॉपर्टी डीलिंग तथा ठेकेदारी का काम भी करता रहा।
शादी समारोह में हुई थी हत्या
पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह पहले कबड्डी खिलाड़ी था और इसी दौरान उसका संपर्क अपराधियों से हुआ। पुलिस के अनुसार, 10 मई 1998 को सोनीपत के सैयां खेड़ा गांव में एक शादी समारोह के दौरान विवाद के बाद उसने अपने साथियों के साथ फायरिंग कर दी थी। इस गोलीबारी में हरियाणा पुलिस के जवान जय भगवान, जो दुल्हन के चाचा थे, की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि एक अन्य व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया था।
परिवार बनाकर सामान्य जिंदगी जी रहा था
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी ने वर्ष 2003 में ममता यादव से शादी की थी, जो वर्तमान में सरकारी अस्पताल में एएनएम के पद पर कार्यरत हैं। दोनों के दो बच्चे हैं, जिनमें एक बेटा 12वीं और बेटी 11वीं कक्षा में पढ़ रही है। स्थानीय लोगों के बीच उसकी पहचान एक सम्मानित व्यक्ति के रूप में थी और किसी को उसके आपराधिक अतीत का अंदाजा नहीं था।
ऐसे पहुंची पुलिस आरोपी तक
क्राइम ब्रांच के अधिकारियों ने तकनीकी विश्लेषण, खुफिया सूचनाओं और जमीनी स्तर पर की गई जांच के जरिए आरोपी की असली पहचान की पुष्टि की। इसके बाद मध्य प्रदेश के मुंगावली में छापेमारी कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया। स्थानीय अदालत से ट्रांजिट रिमांड लेने के बाद आरोपी को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए दिल्ली लाया गया।
पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि फरारी के दौरान आरोपी ने फर्जी पहचान बनाने में किसकी मदद ली और क्या वह इस अवधि में किसी अन्य आपराधिक गतिविधि में भी शामिल रहा।
