शिमला (राजीव शर्मा): मानसून की गतिविधियों पर लगे अस्थायी ब्रेक के कारण हिमाचल प्रदेश में एक बार फिर गर्मी और उमस भरा मौसम लौट आया है, जिससे कई जिलों में दिन के तापमान में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। हालांकि निवासियों को अभी साफ आसमान देखने को मिल रहा है, लेकिन भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अनुमान जताया है कि इस सप्ताह के अंत तक बारिश का दौर फिर से शुरू हो जाएगा।
मौसम विभाग के अधिकारियों ने बताया कि राज्य में वर्तमान में दक्षिण-पश्चिम मानसून का एक कमजोर चरण चल रहा है, जिसके कारण पिछले कुछ दिनों में सीमित बारिश हुई है। इसके परिणामस्वरूप, विशेष रूप से निचले पहाड़ी इलाकों और मैदानी क्षेत्रों में तापमान में लगातार वृद्धि हुई है। ऊना में सबसे अधिक 36.2 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान दर्ज किया गया, जबकि दस से अधिक कस्बों में पारा 30 डिग्री के पार रहा।
मौसम विभाग को उम्मीद है कि अगले दो दिनों तक ऐसी ही स्थिति बनी रहेगी, जिससे दोपहर के समय गर्मी और उमस परेशानी का कारण बन सकती है। हालांकि, मौसम पूर्वानुमानकर्ताओं का मानना है कि 17 जुलाई से स्थिति में बदलाव आएगा, जब एक नया पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) मानसूनी हवाओं के साथ संपर्क करेगा।
इस सिस्टम के सक्रिय होने से 18 जुलाई से 20 जुलाई के बीच बारिश तेज होने की संभावना है। चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी और शिमला जिलों में कहीं-कहीं भारी बौछारें पड़ने का येलो अलर्ट जारी किया गया है, जहां प्रशासन ने निवासियों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
भूस्खलन और जलभराव की चेतावनी
अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि संवेदनशील क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण भूस्खलन (landslides), चट्टानों का गिरना, जलभराव और नदियों व नालों के जलस्तर में अचानक वृद्धि हो सकती है। पहाड़ी रास्तों से यात्रा करने वाले पर्यटकों और दैनिक यात्रियों से आग्रह किया गया है कि वे अपनी यात्रा शुरू करने से पहले मौसम की स्थिति की जांच अवश्य कर लें।
मौजूदा सूखे दौर (dry spell) के बावजूद, हिमाचल में इस मानसून सीजन में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। IMD द्वारा जारी आंकड़ों से संकेत मिलता है कि राज्य में 1 जुलाई से 14 जुलाई के बीच औसत से लगभग 21 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है।
हालांकि, बारिश का वितरण असमान रहा है। इस अवधि के दौरान बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा, लाहौल-स्पीति और मंडी में सामान्य से कम बारिश हुई है, जबकि किन्नौर जैसे जिलों में असाधारण रूप से भारी बारिश देखी गई है। अकेले किन्नौर में अपने मौसमी औसत की तुलना में लगभग 134 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई है।
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि इस सप्ताह के अंत में मानसून की गतिविधियों के फिर से सक्रिय होने की उम्मीद है, जिससे तापमान को नीचे लाने और राज्य भर में जारी गर्मी व उमस के दौर से बहुत राहत मिलने में मदद मिल सकती है।
