चंडीगढ़ (गुरप्रीत सिंह):आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब ने कहा है कि प्रस्तावित भाजपा-अकाली गठबंधन पंजाब के हितों की कीमत पर एक राजनीतिक अस्तित्व का सौदा है, जिसमें सुखबीर सिंह बादल तीन कृषि कानूनों को वापिस लाने के प्रयासों सहित भाजपा के राजनीतिक एजेंडे का समर्थन करने के बदले में बेअदबी और गोलीबारी के मामलों से भाजपा की सुरक्षा मांग रहे हैं। आप ने कहा कि यह राजनीतिक सौदेबाजी बहुत शर्मनाक है, क्योंकि 2015 में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की चोरी और बार-बार बेअदबी के बाद कोटकपूरा और बहबल कलां में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर पुलिस गोलीकांड भाजपा-अकाली सरकार के दौरान हुई थी, जब सुखबीर सिंह बादल गृह मंत्री थे।
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आप पंजाब के विधायक मनविंदर सिंह ग्यासपुरा ने कहा, “1 जून 2015 को अकाली-भाजपा सरकार के समय श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के स्वरूप चोरी हो गए थे, लेकिन सरकार ने इस घटना को गंभीरता से नहीं लिया। उस समय गृह मंत्री रहे सुखबीर सिंह बादल ने पूछताछ में एसआईटी को बताया है कि उन्हें चोरी के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। हालांकि, इंटेलिजेंस विंग ने एक रिपोर्ट भेजी थी और सुखबीर सिंह बादल के निजी सचिव ने भी एसआईटी को बताया था कि घटना के बारे में जानकारी मौजूद थी। गृह मंत्री अनजान कैसे रह सकते हैं जब उनके अपने ऑफिस को जानकारी मिल गई थी?”
मनविंदर सिंह ग्यासपुरा ने कहा कि चोरी के बाद भी, सरकार तब कार्रवाई करने में नाकाम रही जब सितंबर 2015 में सिखों को उनके चोरी हुए गुरु को ढूंढने के लिए पोस्टर लगाए गए थे। उन्होंने कहा, “समय पर कार्रवाई न करने से अक्टूबर में बेअदबी के लिए जिम्मेदार लोगों का हौसला बढ़ा, जब श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के अंग गलियों पर बिखरे हुए मिले, जिससे दुनिया भर के सिखों का दिल टूट गया।”
उन्होंने कहा कि कोटकपूरा में लोग शांति से इकट्ठा हुए थे, जहाँ अरदास और कीर्तन हो रहा था, लेकिन प्रदर्शनकारियों पर वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया गया। मनविंदर सिंह ग्यासपुरा ने कहा कि वह भी विरोध प्रदर्शन में मौजूद थे। उन्होंने कहा, “एसआईटी ने कोटकपूरा गोलीकांड केस में पहले ही चार्जशीट फाइल कर दी है, जिसमें सुखबीर सिंह बादल, चरणजीत शर्मा, परमराज सिंह उमरानंगल और सुमेध सिंह सैनी पर केस चल रहा है और वे अभी बेल पर बाहर हैं। एसआईटी के सामने मुख्य सवाल यह है कि गोलीकांड का ऑर्डर किसने दिया और शांति से प्रदर्शन कर रहे लोगों को हटाने के निर्देश किसने दिए।”
मनविंदर सिंह ग्यासपुरा ने कहा कि 14 अक्टूबर को बहबल कलां में हुई घटनाएं और भी दुखद थीं, जब लोग शांति से विरोध कर रहे थे तब पुलिस गोलीबारी में दो नौजवान, कृष्ण भगवान सिंह और गुरजीत सिंह की मौत हो गई थी । सुखबीर सिंह बादल ने बार-बार दावा किया है कि वह उस समय पंजाब में नहीं थे। लेकिन उनकी ज़मानत से जुड़े कोर्ट के कागज़ात बताते हैं कि सुखबीर सिंह बादल पंजाब में मौजूद थे और एक फाइव-स्टार होटल में रुके हुए थे। वहीं से, चरणजीत शर्मा, परमराज सिंह उमरानंगल और सुमेध सिंह सैनी समेत बड़े पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए जा रहे थे। पंजाब के लोग जानना चाहते हैं कि गोली चलाने का आदेश किसने दिया और प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज करने के निर्देश किसने दिए। सुखबीर सिंह बादल ने खुद श्री अकाल तख्त साहिब के सामने इन घटनाओं में अपना रोल कबूल किया था।
ज्ञानी रघबीर सिंह के एसआईटी को दिए गए बयान का ज़िक्र करते हुए, मनविंदर सिंह ग्यासपुरा ने कहा कि सुखबीर सिंह बादल के श्री अकाल तख्त साहिब के सामने गलत काम करने की बात मानने के तथ्य रिकॉर्ड का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा, “अगर ये कबूलनामे और दूसरे सबूत पहले से ही रिकॉर्ड का हिस्सा हैं, तो उन्हें कोर्ट और एसआईटी के सामने क्यों नहीं पेश किया जाना चाहिए? ज़िम्मेदार लोगों को कड़ी सज़ा क्यों नहीं मिलनी चाहिए? पंजाब को यह जानने का हक़ है कि किसने आदेश दिए और कृष्ण भगवान सिंह और गुरजीत सिंह की मौत के लिए कौन ज़िम्मेदार था।”
आप पंजाब के प्रवक्ता रणबीर सिंह ढींडसा ने कहा कि सुखबीर सिंह बादल का बेअदबी, बहबल कलां और कोटकपूरा गोलीकांड मामलों में एसआईटी के सामने बार-बार पेश न होना दिखाता है कि अकाली दल बादल की लीडरशिप इन गंभीर मुद्दों को लेकर बिल्कुल भी सीरियस नहीं है। उन्होंने कहा कि अकाली दल-भाजपा गठबंधन अब एक्सपोज़ हो गया है, खासकर तब जब सुखबीर सिंह बादल ने पहले ही श्री अकाल तख्त साहिब के सामने अपनी ज़िम्मेदारी मान ली है। रणबीर सिंह ढींडसा ने कहा, “मैं पूछना चाहता हूं कि आपके लिए दुनियावी अदालतें ज़्यादा ज़रूरी हैं या हमारे सुप्रीम श्री अकाल तख्त साहिब? हमारे गुरु साहिब द्वारा स्थापित श्री अकाल तख्त साहिब दुनियावी अदालतों से कहीं ज़्यादा पवित्र और सुप्रीम है, और हर सिख और पंजाबी के मन में इसके प्रति बहुत श्रद्धा और सम्मान है।”
रणबीर सिंह ढींढसा ने कहा कि जब सुखबीर सिंह बादल को श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ने बुलाया था, तो उन्होंने अरदास और गुरबाणी का जाप कर रही शांतमई संगत पर गोलीबारी की ज़िम्मेदारी मानी थी, और उनकी पूरी कैबिनेट को सिख रीति-रिवाजों के अनुसार धार्मिक सज़ा भी मिली थी। उन्होंने पूछा, “अगर आपने गुरु के सुप्रीम कोर्ट के सामने अपनी ज़िम्मेदारी मान ली थी, तो अब आप एसआईटी के सामने सच बताने से कैसे मना कर सकते हैं? गुरु के प्रति आपकी भक्ति और आपका पंथक स्टैंड अब कहाँ चला गया है?”
रणबीर सिंह ढींडसा ने कहा कि गृह मंत्री रहते हुए सुखबीर सिंह बादल ने दावा किया था कि गोलीकांड की घटना वाले दिन वह विदेश में थे, जबकि फरीदकोट कोर्ट के रिकॉर्ड और सुखबीर बादल की अपनी रिट पिटीशन से पता चलता है कि वह एक फाइव-स्टार होटल में बैठे थे और रात में सीनियर पुलिस अधिकारियों के लगातार सम्पर्क में थे। उन्होंने सवाल किया, “जब गृह मंत्री रहते हुए पूरी रात बातचीत होती रही, तो इसकी ज़िम्मेदारी किसकी है?”
उन्होंने कहा कि यह अकाली दल और भाजपा के बीच मिलीभगत थी और इससे उनकी पंजाब-विरोधी, पंथ-विरोधी और सिख-विरोधी राजनीति सामने आ गई है।
रणबीर सिंह ढींडसा ने कहा कि सुखबीर सिंह बादल के एसआईटी के सामने पेश न होने की वजह दिल्ली में भाजपा लीडरशिप के साथ किया जा रहा राजनीतिक समझौता है। उन्होंने कहा कि सुखबीर सिंह बादल को भरोसा दिलाया जा रहा है कि उन्हें पेश होने की ज़रूरत नहीं है और बेअदबी के मामलों में उन्हें राजनीतिक सुरक्षा दी जाएगी। उन्होंने कहा, “इस सुरक्षा के बदले सुखबीर सिंह बादल ने पंजाब के हितों से समझौता किया है और काले कृषि कानूनों पर भाजपा का समर्थन करने के लिए सहमत हुए हैं।”
रणबीर सिंह ढींडसा ने कहा कि 2020 में दिखावे के लिए तोड़ा गया गठबंधन असल में कभी टूटा ही नहीं था। उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव में भाजपा उम्मीदवार को अकाली दल के समर्थन और संसद में बिल के लिए उनके अकेले सांसद के वोट की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा, “एमएसपी, कृषि कानूनों या सिख मुद्दों पर उनकी शर्तें आज कहां चली गईं? आज उनके लिए केवल यही मायने रखता है कि बेअदबी के मामलों में आरोपों और सजा से कैसे बचा जाए।”
आप ने कहा कि पंजाब किसान आंदोलन के दौरान दिए गए बलिदानों को नहीं भूल सकता और भाजपा-अकाली के फिर से गठबंधन के ज़रिए कृषि कानूनों को वापस लाने की कोई भी कोशिश एक बार फिर पंजाब के हितों से ऊपर राजनीतिक हितों को रखेगी।
