प्रधानमंत्री ने साहस और सुदृढ़ता की शक्ति का महत्व बताते हुए संस्कृत सुभाषितम् साझा किया

नई दिल्ली(राजीव शर्मा):प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि साहस किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने कहा कि साहस देश को कठिन चुनौतियों का सामना करते हुए भी एकजुट रहने और प्रगति, समृद्धि तथा आत्मनिर्भरता की ओर निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है।

प्रधानमंत्री ने संस्कृत में सुभाषितम् साझा किया।

“चलन्ति गिरयः कामं युगान्तपवनाहताः।

कृच्छ्रेऽपि न चलत्येव धीराणां निश्चलं मनः।। ”

यह सुभाषितम बताता है कि प्रलय के समय तूफानी हवाओं से घिरे पहाड़ भी कांप उठते हैं और गतिमान हो जाते हैं, फिर भी सबसे गंभीर परीक्षाओं के बीच भी दृढ़ व्यक्ति का मन अविचल और स्थिर रहता है।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखाः

“धैर्य किसी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति है। इससे कठिन चुनौतियों के बीच भी देश को एकजुट रहने के साथ ही प्रगति, समृद्धि और आत्मनिर्भरता की दिशा में निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।”

चलन्ति गिरयः कामं युगान्तपवनाहताः।

कृच्छ्रेऽपि न चलत्येव धीराणां निश्चलं मनः।”

By Rajeev Sharma

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