चंडीगढ़ (गुरप्रीत सिंह): पंजाब में 29 अक्टूबर 2026 तक पराली जलाने की 1,007 घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें तरनतारन सबसे अधिक प्रभावित जिला बनकर उभरा है, जहां अकेले 397 मामले सामने आए हैं। ताजा निगरानी आंकड़ों के अनुसार, इसके बाद अमृतसर में 171 और फिरोजपुर में 104 मामले दर्ज किए गए।
इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि कुल दर्ज मामलों में से लगभग 40 प्रतिशत हिस्सेदारी अकेले तरनतारन की रही, जो कटाई के मौसम में फसल अवशेष जलाने पर अंकुश लगाने की निरंतर चुनौती को रेखांकित करता है।
राज्य भर में दर्ज 1,007 मामलों में से अधिकारियों ने 379 स्थानों पर मौके पर जाकर पराली जलाने की भौतिक पुष्टि (फिजिकल वेरिफिकेशन) की, जबकि 778 मामलों में खेतों पर इसका असर पाया गया। निगरानी आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि नियमों के उल्लंघन के संबंध में अब तक 246 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं।
पर्यावरण मुआवजा 17 लाख रुपये के पार
प्रवर्तन उपायों के तहत पराली जलाने के लिए जिम्मेदार पाए गए लोगों पर आर्थिक जुर्माना लगाया गया है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, राज्य ने 17.50 लाख रुपये का पर्यावरण मुआवजा (जुर्माना) लगाया है, जिसमें से 13.15 लाख रुपये की वसूली की जा चुकी है।
आंकड़ों में आगे बताया गया है कि 348 मामलों में पर्यावरण मुआवजा लगाया गया। निगरानी और प्रवर्तन प्रक्रिया के तहत अधिकारियों ने नोडल और पर्यवेक्षी अधिकारियों को 426 चेतावनी नोटिस भी जारी किए हैं।
जिलों में तरनतारन शीर्ष पर
जिलों की सूची में तरनतारन 397 मामलों के साथ शीर्ष पर रहा, जिसके बाद अमृतसर में 171 और फिरोजपुर में 104 मामले दर्ज हुए। गुरदासपुर में 72, कपूरथला में 63 और होशियारपुर में 12 मामले सामने आए।
कई जिलों में तुलनात्मक रूप से बेहद कम घटनाएं दर्ज की गईं। लुधियाना में छह मामले दर्ज हुए, मोगा और संगरूर में क्रमशः सात और 12 मामले सामने आए, जबकि मानसा में पराली जलाने का एक भी मामला दर्ज नहीं हुआ।
राज्य स्तरीय रिपोर्ट से यह भी सामने आया है कि 29 अक्टूबर तक कुल धान के रकबे में से 64.50 प्रतिशत हिस्से पर कटाई पूरी हो चुकी थी।
पंजाब के कई हिस्सों में कटाई का काम जारी रहने के बीच, ये ताजा आंकड़े पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने और पर्यावरण पर इसके दुष्प्रभाव को कम करने के लिए लगातार निगरानी व कड़े प्रवर्तन की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं।
