हिमाचल में मौसम हुआ स्थिर, मानसून पर लगा छोटा सा ब्रेक; अगले हफ्ते से फिर बारिश के आसार

Himachal

शिमला (राजीव शर्मा): हिमाचल प्रदेश में आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियों में अस्थायी कमी देखने को मिलेगी। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने सप्ताह के मध्य तक केवल छिटपुट हल्की बौछारें पड़ने का अनुमान जताया है। राहत की यह खबर मानसून की एक सक्रिय झड़ी के बाद आई है, जिसने राज्य में बारिश के आंकड़ों को मौसमी औसत से काफी ऊपर पहुंचा दिया था।

मौसम कार्यालय ने 13 जुलाई से 16 जुलाई के बीच किसी भी जिले के लिए बारिश का कोई अलर्ट जारी नहीं किया है, जो अधिकांश क्षेत्रों में अपेक्षाकृत स्थिर मौसम का संकेत देता है। आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रहने की उम्मीद है, जबकि कुछ अलग-अलग इलाकों में कुछ समय के लिए हल्की बारिश हो सकती है।

मौसम वैज्ञानिकों ने कहा कि बारिश में मौजूदा गिरावट पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में मानसूनी हवाओं के कमजोर पड़ने के कारण हुई है। मानसून की ट्रफ रेखा (trough) राज्य से दूर खिसक गई है, जिससे नमी का आना कम हो गया है, वहीं किसी मजबूत पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के न होने से बारिश की गतिविधियां और सीमित हो गई हैं।

हालांकि, बारिश का यह ठहराव लंबे समय तक चलने की उम्मीद नहीं है। IMD का अनुमान है कि 17 जुलाई से एक नया पश्चिमी विक्षोभ इस क्षेत्र को प्रभावित कर सकता है, जिससे हिमाचल प्रदेश में मानसून की गतिविधियां फिर से सक्रिय हो सकती हैं। 17 जुलाई से 24 जुलाई के बीच बारिश में धीरे-धीरे बढ़ोतरी होने और व्यापक रूप से बौछारें पड़ने की संभावना जताई गई है।

अब तक सामान्य से 40 फीसदी ज्यादा बारिश

मौजूदा सूखे दौर (dry spell) के बावजूद, जुलाई महीने के बारिश के आंकड़े अभी भी एक मजबूत मानसून सीजन को दर्शाते हैं। 1 जुलाई से 12 जुलाई के बीच हिमाचल प्रदेश में लगभग 120 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो इसी अवधि के सामान्य औसत (लगभग 86 मिमी) से काफी अधिक है। यह लगभग 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी को दर्शाता है।

अधिकारियों ने बताया कि अलग-अलग जिलों में बारिश का वितरण असमान रहा है। जहां कई क्षेत्रों में सामान्य से अधिक बारिश हुई, वहीं हमीरपुर और मंडी उन चुनिंदा जिलों में शामिल रहे जहां बारिश उनके मौसमी औसत से कम दर्ज की गई।

प्रशासन ने निवासियों, विशेष रूप से संवेदनशील पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने का आग्रह किया है। हालांकि बारिश अस्थायी रूप से कम हुई है, लेकिन पानी से लथपथ पहाड़ी ढलानों और ढीली मिट्टी के कारण अभी भी भूस्खलन (landslides) का खतरा बना हुआ है, खासकर तब जब इस सप्ताह के अंत में बारिश का नया दौर शुरू होगा।

मौसम विशेषज्ञों ने पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को इस पहाड़ी राज्य में यात्रा की योजना बनाने से पहले आधिकारिक मौसम पूर्वानुमानों पर नज़र रखने की सलाह दी है, क्योंकि नए मौसम सिस्टम के आने से मानसून की स्थिति तेजी से बदल सकती है।

By Rajeev Sharma

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