नई दिल्ली (राजीव शर्मा): भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने संयुक्त राज्य अमेरिका में सख्त वोटर पहचान (वोटर आईडी) नियमों के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अभियान का समर्थन किया है और तुलना के लिए भारत की विशाल चुनावी प्रक्रिया का उदाहरण दिया है।
गोर ने ट्रंप की एक पोस्ट पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारत के हालिया लोकसभा चुनावों के पैमाने को रेखांकित किया था और अमेरिकी मतदाताओं के लिए सख्त पहचान आवश्यकताओं के पक्ष में तर्क दिया था।
भारत के पिछले आम चुनावों में पड़े 64.6 करोड़ (646 मिलियन) वोटों के आंकड़े का हवाला देते हुए गोर ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “राष्ट्रपति डोनाल्ड जे. ट्रंप बिल्कुल सही हैं!” इसके साथ ही उन्होंने अमेरिकी कांग्रेस से ‘सेव अमेरिका एक्ट’ (SAVE America Act) को मंजूरी देने का भी आग्रह किया।
ट्रंप की पोस्ट भारत में वोटर आईडी के इस्तेमाल पर केंद्रित थी और उन्होंने सवाल उठाया था कि अमेरिका में एक समान फोटो पहचान पत्र की अनिवार्यता के बिना चुनाव कैसे कराए जा सकते हैं। उन्होंने तर्क दिया कि अमेरिकी चुनावी नियमों को कड़ा किया जाना चाहिए और विधायी कार्रवाई की मांग की।
गोर के इस बयान ने भारतीय और अमेरिकी चुनावी प्रणालियों के बीच की तुलना को और अधिक चर्चा में ला दिया है। भारत में भारत निर्वाचन आयोग द्वारा संचालित प्रणाली के जरिए करोड़ों मतदाताओं के लिए चुनाव आयोजित किए जाते हैं, जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका में वोटर पहचान और मतदान प्रक्रियाओं से जुड़े नियम काफी अलग हैं।
2024 के लोकसभा चुनावों में लगभग 64.6 करोड़ वोट दर्ज किए गए थे, जिससे यह दुनिया की सबसे बड़ी चुनावी प्रक्रियाओं में से एक बन गया। भारत में राष्ट्रव्यापी लोकतांत्रिक प्रक्रिया के संचालन में शामिल लॉजिस्टिकल चुनौतियों के उदाहरण के रूप में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस चुनाव के पैमाने का अक्सर उल्लेख किया जाता रहा है।
ट्रंप द्वारा समर्थित ‘सेव अमेरिका एक्ट’, संयुक्त राज्य अमेरिका में चुनाव से जुड़े नियमों को और सख्त करने के रिपब्लिकन पार्टी के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है। समर्थकों का तर्क है कि पहचान के कड़े नियम चुनावी प्रक्रिया में विश्वास बढ़ा सकते हैं, जबकि विरोधियों ने पात्र मतदाताओं के सामने आने वाली संभावित बाधाओं को लेकर चिंता जताई है।
गोर की यह टिप्पणी वाशिंगटन में चुनाव प्रक्रियाओं, वोटर पहचान और अमेरिकी चुनावों से जुड़ी सुरक्षा सावधानियों पर चल रही राजनीतिक बहस के बीच आई है। भारत के उनके इस संदर्भ ने इस चर्चा को एक अंतरराष्ट्रीय आयाम दे दिया है, विशेष रूप से इतने बड़े पैमाने पर चुनाव कराने के देश के अनुभव को देखते हुए।
