रिपोर्ट के अनुसार, मृतक की पहचान दलजीत सिंह के रूप में हुई है, जो भम्मे कलां गांव का रहने वाला था। प्रदर्शनकारी उसके शव को मानसा में चल रहे विरोध प्रदर्शन के स्थल तक ले जाना चाहते थे। यह प्रदर्शन नशे की समस्या और नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या के मामले में न्याय की मांग को लेकर किया जा रहा था।
पुलिस ने शव को प्रदर्शन स्थल तक ले जाने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग की और मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया। इसी दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते स्थिति तनावपूर्ण हो गई और धक्का-मुक्की होने की भी खबर सामने आई। इसके बाद पुलिस ने लखा सिधाना, भाना सिद्धू और मोहंजित शेरों सहित कई लोगों को हिरासत में ले लिया।
मानसा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक वैभव चौधरी ने कहा कि किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी। घटना के दौरान पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की। मामले में तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किए जाने की भी रिपोर्ट है, हालांकि उपलब्ध जानकारी से उनके नाम और उन पर लगाए गए आरोपों की पूरी पुष्टि नहीं हो सकी है।
परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद से मानसा में नशे के खिलाफ कार्रवाई और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। झोटा को 13 अक्टूबर को एक मेडिकल स्टोर के भीतर गोली मार दी गई थी। उनकी हत्या के बाद परिवार और समर्थकों ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग उठाई थी।
पंजाब सरकार ने बाद में झोटा हत्याकांड की जांच CBI को सौंपने का फैसला किया। केंद्रीय एजेंसी ने मामले में नई FIR दर्ज कर जांच शुरू की और स्थानीय पुलिस से केस के दस्तावेज हासिल किए। इस हत्याकांड में मेडिकल स्टोर संचालक अश्वनी कुमार सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
ताजा घटनाक्रम में दलजीत सिंह की संदिग्ध नशे से मौत और शव को प्रदर्शन स्थल तक ले जाने को लेकर हुआ विवाद सामने आया है। हालांकि, उनकी मौत का सटीक कारण पोस्टमार्टम या अन्य आधिकारिक जांच के निष्कर्षों के बिना निश्चित नहीं माना जा सकता। पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों की हिरासत के बाद मामले में आगे की स्थिति पर नजर बनी हुई है।
