नई दिल्ली(राजीव शर्मा): सुप्रीम कोर्ट ने उस जनहित याचिका (पीआईएल) पर अगले सप्ताह सुनवाई करने पर सहमति जताई है, जिसमें चुनाव आयोग की निर्णय-प्रक्रिया को लेकर लगाए गए आरोपों के आधार पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद पर काम करने से रोकने की मांग की गई है।
राकेश कुमार सिंह की ओर से दायर याचिका का तत्काल सूचीबद्ध किए जाने का अनुरोध वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष किया। न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी पीठ में शामिल हैं। पीठ ने मामले को अगले सप्ताह सूचीबद्ध करने पर सहमति दी।
याचिका में उन रिपोर्टों का हवाला दिया गया है, जिनके अनुसार चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच चुनाव आयोग के नाम पर लिए गए कम से कम 14 फैसलों पर आपत्ति दर्ज की थी। याचिकाकर्ता का तर्क है कि बहुसदस्यीय चुनाव आयोग में निहित शक्तियों का इस्तेमाल मुख्य चुनाव आयुक्त एकतरफा तौर पर नहीं कर सकते।
याचिकाकर्ता के अनुसार, संविधान का अनुच्छेद 324 चुनाव संबंधी शक्तियां चुनाव आयोग को एक सामूहिक संस्था के रूप में प्रदान करता है। याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 की धारा 18 का भी हवाला दिया गया है। इसमें कहा गया है कि आयोग का कामकाज यथासंभव सर्वसम्मति से संचालित होना चाहिए और मतभेद होने पर बहुमत के आधार पर निर्णय लिया जाना चाहिए।
याचिका में मांग की गई है कि कुमार से यह स्पष्ट करने को कहा जाए कि कथित रूप से उन शक्तियों का इस्तेमाल करने का अधिकार उन्हें किस आधार पर मिला, जो याचिकाकर्ता के अनुसार सामूहिक रूप से चुनाव आयोग में निहित हैं। इसके अलावा, मामले के निपटारे तक उन्हें निलंबित करने, चुनाव आयोग के मूल रिकॉर्ड पेश करने और सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र न्यायिक जांच या विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने की मांग भी की गई है।
एसआईआर और मतदाता सूची पर सवाल
याचिका में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में किए गए बदलावों पर भी चिंता जताई गई है।
इसमें सुप्रीम कोर्ट से फॉर्म-6 में आगे किसी भी महत्वपूर्ण बदलाव पर रोक लगाने और यह सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया है कि पात्र नागरिकों को केवल विवादित कॉलम में मांगी गई जानकारी उपलब्ध नहीं कराने के आधार पर मतदाता सूची में शामिल होने से वंचित न किया जाए, जब तक कि इस आवश्यकता की वैधता पर फैसला नहीं हो जाता।
याचिकाकर्ता ने मतदाता सूची से जुड़े डेटा और डिजिटल प्रणालियों, जिनमें ईआरओनेट और ईसीआईनेट शामिल हैं, की सुरक्षा की भी मांग की है। याचिका में कहा गया है कि मौजूदा मतदाता सूची रिकॉर्ड को मूल स्वरूप में बनाए रखा जाए और आगे के आदेश तक केवल एसआईआर प्रक्रिया के आधार पर किसी नाम को हटाने, बाहर करने, बहाल करने या रिकॉर्ड में बदलाव की कार्रवाई न की जाए।
आंतरिक आपत्तियों से जुड़े आरोपों का चुनाव आयोग ने खंडन किया है। आयोग के अधिकारियों ने कहा है कि एसआईआर से जुड़े फैसलों समेत सभी निर्णयों को तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी प्राप्त थी और वे सर्वसम्मति से लिए गए थे।
रिपोर्ट की गई आपत्तियां फॉर्म-6 में बदलाव, मतदाता सूची के डेटाबेस तक पहुंच, मतदाता नाम हटाने के खिलाफ अपील और आयोग की आईटी प्रणालियों से जुड़े कुछ पहलुओं पर थीं।
मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ दूसरी याचिका
ज्ञानेश कुमार के मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में कामकाज को लेकर सुप्रीम कोर्ट में हाल में दायर की गई यह दूसरी याचिका है। यह मामला एसआईआर विवाद के बीच सामने आया है।
पिछले सप्ताह एक अन्य पीआईएल में मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान कथित उल्लंघनों को लेकर आपराधिक मुकदमा चलाने और न्यायिक जांच या एसआईटी जांच की मांग की गई थी। उस याचिका में भी आरोप लगाया गया था कि मतदाता सूची और सॉफ्टवेयर में बदलाव से जुड़े फैसले अन्य दो चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए।
अगले सप्ताह होने वाली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट याचिकाकर्ता की ओर से उठाए गए कानूनी सवालों और चुनाव आयोग की निर्णय-प्रक्रिया से जुड़े आरोपों की जांच करेगा।
