जम्मू(राजीव शर्मा): ZEE5 से फिल्म ‘सतलुज’ हटाए जाने के बाद शुक्रवार शाम जम्मू के नानक नगर स्थित गुरुद्वारा श्री गुरु नानक देव जी में इसकी विशेष सामुदायिक स्क्रीनिंग की गई। कार्यक्रम जिला गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (DGPC), जम्मू द्वारा आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न समुदायों के लोगों ने भाग लिया और फिल्म देखी।
DGPC के कोषाध्यक्ष सरदार जगपाल सिंह ने कहा कि बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति इस बात का संकेत है कि फिल्म को लेकर जनमानस में काफी रुचि है। उन्होंने बताया कि आगामी दिनों में 16 जुलाई तक जम्मू के अन्य गुरुद्वारों में भी स्क्रीनिंग जारी रहेगी।
उन्होंने दावा किया कि कार्यक्रम में हिंदू, सिख, मुस्लिम समेत विभिन्न समुदायों के लोग शामिल हुए। उनका कहना था कि सरकार द्वारा फिल्म हटाने के फैसले ने लोगों में जिज्ञासा और बढ़ा दी है।
यह स्क्रीनिंग ऐसे समय पर हुई जब अभिनेता दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ रिलीज़ के सिर्फ दो दिन बाद ZEE5 से हटा दी गई थी, जिसके बाद फिल्म को लेकर राजनीतिक एवं सामाजिक स्तर पर बहस तेज हो गई है।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, फिल्म के निर्माताओं ने थिएटर रिलीज़ के लिए आवश्यक प्रमाणन नहीं प्राप्त किया था। मंत्रालय का कहना है कि निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के बजाय फिल्म का शीर्षक बदलकर उसे सीधे ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज़ किया गया, जो सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश एवं डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के प्रावधानों के अनुरूप नहीं था।
वहीं, फिल्म के समर्थकों का आरोप है कि इसे हटाने का फैसला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सवाल उठाता है, जबकि सरकार का कहना है कि कार्रवाई केवल कानूनी और नियामकीय प्रक्रियाओं के अनुपालन से जुड़ी है।
फिल्म ‘सतलुज’ मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित है। खालड़ा ने पंजाब में उग्रवाद-काल के दौरान कथित अवैध हत्याओं और अज्ञात शवों के गुप्त अंतिम संस्कार के मामलों को उजागर किया था। वर्ष 1995 में उनका कथित रूप से अपहरण कर हत्या कर दी गई थी और बाद में उनका शव हरिके पुल के निकट सतलुज नदी से बरामद हुआ था।
हनी त्रेहान निर्देशित इस फिल्म का निर्माण RSVP Movies और MacGuffin Pictures ने किया है। प्रमुख भूमिकाओं में अर्जुन रामपाल, कंवलजीत सिंह, सुविंदर विक्की और गीतिका विद्या ओहल्यान हैं।
