चंडीगढ़(गुरप्रीत सिंह): पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने मंगलवार को घोषणा की कि राज्य सरकार प्राइवेट स्कूल फीस को नियंत्रित करने और राज्य में बढ़ती हुई “स्कूल माफिया” को काबू में करने के लिए कड़े नियम लाएगी।
यह घोषणा अमृतसर की एक छात्रा की दुखद मृत्यु के बाद की गई, जिनके कथित रूप से बकाया फीस के चलते स्कूल प्रबंधन द्वारा बार-बार परेशान किए जाने के बाद उन्होंने आत्महत्या कर ली।
घटना पर शोक व्यक्त करते हुए मान ने कहा कि यह मामला उन्हें गहराई से विचलित कर गया और निजी शैक्षणिक संस्थानों में अनुचित प्रथाओं के खिलाफ कड़े कदम उठाने की तात्कालिक आवश्यकता को उजागर करता है।
“बच्ची स्कूल व्यवस्था द्वारा बनाए दबाव की शिकार हुई। ऐसे घटनाओं को अब और नजरअंदाज नहीं किया जा सकता,” मुख्यमंत्री ने मीडिया से बातचीत में कहा।
मान ने कहा कि पंजाब सरकार पंजाब रेगुलेशन ऑफ फीस ऑफ अनएडेड एजुकेशनल इंस्टिट्यूशन्स एक्ट में संशोधन करेगी ताकि राज्य में संचालित स्कूलों के फीस ढांचे पर कड़ा नियंत्रण लागू किया जा सके।
प्रस्तावित बदलावों के अन्तर्गत, जिन स्कूलों को नई शर्तों का उल्लंघन पाया जाएगा, उन्हें भारी आर्थिक दंड झेलना पड़ सकता है। बार-बार उल्लंघन पर जुर्माने बढ़ाये जाएंगे, जबकि कई बार नियम तोड़ने वाले संस्थानों की मान्यता रद्द किए जाने का जोखिम होगा।
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि बकाया फीस के कारण स्कूल छात्रों को परीक्षाओं में बैठने से रोकने, एडमिट कार्ड, डिग्री या नो-ड्यू सर्टिफिकेट रोके रखने की अनुमति नहीं देंगे।
महत्वपूर्ण बात यह है कि संशोधित कानून पंजाब में संचालित सभी प्राइवेट स्कूलों पर लागू होगा, चाहे वे पंजाब स्कूल एजुकेशन बोर्ड, CBSE या किसी अन्य शैक्षणिक बोर्ड से संबद्ध हों।
सरकार को उम्मीद है कि संशोधित विधेयक को आगामी पंजाब विधान सभा सत्र में पेश किया जाएगा।
मान ने आगे कहा कि स्कूल अब अभिभावकों को किसी विशेष विक्रेता या दुकान से किताबें, स्टेशनरी या यूनिफॉर्म खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकेंगे। इसके बजाय शैक्षणिक संस्थाओं को कई अधिकृत विक्रेताओं की सूची देनी होगी, जिससे परिवारों के पास खरीदारी की स्वतंत्रता रहेगी।
प्रस्तावित उपायों को प्राइवेट स्कूलों को नियंत्रित करने और माता‑पिता द्वारा वर्षों से की जा रही शिकायतों — बढ़ती फीस और कथित शोषण — को संबोधित करने के लिए सरकार की अब तक की सबसे सख्त पहल माना जा रहा है।
अमृतसर की यह घटना छात्रों व अभिभावकों को बढ़ती शैक्षिक खर्च और प्राइवेट संस्थानों में कड़ाई से फीस वसूली की प्रथाओं के कारण होने वाले दबाव पर व्यापक सार्वजनिक चर्चा छेड़ चुकी है।
पंजाब सरकार ने अमृतसर छात्रा की मौत के बाद प्राइवेट स्कूल फीस नियंत्रित करने का सख्त कानून लागू करने की योजना
