आम आदमी पार्टी (AAP) छोड़कर BJP में शामिल हुए राज्यसभा सांसद संदीप पाठक पर पंजाब में एफआईआर दर्ज हुई है या नहीं इस मामले की सुनवाई पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में आज हुई। पंजाब सरकार को इस मामले में जवाब दायर करना था, लेकिन सरकार ने फिर से जवाब के लिए कोर्ट से टाइम मांगा है।
संदीप पाठक के वकील अर्जुन श्योरान ने बताया कि सरकार की तरफ से जिस वकील को पेश होना था, वे हाजिर नहीं थे। उन्होंने जवाब दायर करने के लिए टाइम मांगा था। कोर्ट ने उनके आग्रह पर फिर से सरकार को जवाब देने का टाइम दिया है। अब अगली सुनवाई 17 अक्तूबर को होगी।
एडवोकेट अर्जुन श्योरान ने बताया कि कोर्ट ने जो आदेश पिछली तारीख पर दिए थे वो अगली तारीख तक जारी रहेंगे। उन्होंने बताया कि दो महीने से इस केस की सुनवाई चल रही है और अभी तक सरकार यह नहीं बता पाई कि संदीप पाठक पर केस दर्ज हुआ है या नहीं।
दरअसल संदीप पाठक पर पंजाब में एफआईआर दर्ज होने की बात कहकर उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस छापेमारी की खबरें सामने आई थी और पंजाब पुलिस की टीमें दिल्ली तक पहुचं गई थी। हालांकि पुलिस संदीप पाठक को गिरफ्तार नहीं कर पाई थी।
संदीप पाठक ने आठ मई को पंजाब एवं हरियाण हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी कि पुलिस उन्हें उनके खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर की जानकारी नहीं दे रही है। संदीप पाठक की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने उन पर किसी भी तरह के एक्शन पर रोक लगा दी थी।
याचिका में पाठक ने रखी है 3 दलीलें
- FIR कहां दर्ज हुई, इसकी जानकारी मांगी: पाठक ने याचिका में लिखा है कि पिछले कुछ दिनों मीडिया में अचानक खबरें आई कि पंजाब सरकार ने उनके खिलाफ दो FIR गैरजमानती धाराओं में दर्ज की हैं। उन्हें पंजाब सरकार व पुलिस ने अभी तक नहीं बताया कि एफआईआर कहां और किन धाराओं में दर्ज हुई हैं।
- मैंने कोई गलत काम नहीं किया: दो दिन बाद संदीप पाठक सामने आए और उन्होंने कहा कि उन्हें पता ही नहीं है कि उनके खिलाफ कहां पर पर्चा दर्ज हुआ है। पाठक ने कहा था कि उन्होंने ऐसा कोई काम नहीं किया है, जिसकी वजह से उनके खिलाफ एफआईआर हो। संदीप पाठक दिल्ली स्थित अपने घर में थे और जब उन्हें यह सूचना मिली तो वो घर के पिछले दरवाजे से निकल गए थे, ताकि पंजाब पुलिस उन्हें गिरफ्तार न कर सके।
- AAP सरकार के खिलाफ खोला था मोर्चा: FIR की सूचना से भाजपा समेत तमाम विरोधी दलों ने आप सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। AAP के नेताओं और मुख्यमंत्री ने यहां तक कह दिया था कि, जिसने गलत काम किए होंगे उनके खिलाफ तो कार्रवाई होगी ही। मुख्यमंत्री के बयान के बाद पाठक को लगा कि पंजाब पुलिस ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी है, लेकिन पुलिस उन्हें बता नहीं रही है। उन्होंने अब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।
24 अप्रैल को छोड़ी थी AAP
संदीप पाठक ने 24 अप्रैल 2026 को ‘आप’ छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया, जिसके तुरंत बाद 2 मई को पंजाब पुलिस ने उनके खिलाफ भ्रष्टाचार और अन्य आरोपों में दो गैर-जमानती एफआईआर दर्ज कीं।
गिरफ्तारी के डर से पाठक ने हाईकोर्ट का रुख किया, जहां उन्होंने इन एफआईआर को “सीक्रेट” बताते हुए इनकी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की। कोर्ट ने उन्हें राहत देते हुए 11 मई, 2026 तक उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है और पंजाब सरकार से इस मामले में जवाब मांगा है।
