नई दिल्ली (राजीव शर्मा): प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने मंगलवार को दक्षिण-पश्चिम मानसून और मौसम से जुड़े संभावित व्यवधानों से निपटने के लिए देश की तैयारियों की एक व्यापक समीक्षा की। अधिकारियों ने बताया कि जुलाई के पहले सप्ताह के दौरान बेहतर बौछारें पड़ने के बाद देश भर में बारिश की कमी में काफी कमी आई है।
प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पी.के. मिश्रा की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में वर्तमान सीजन के दौरान ‘अल नीनो’ (El Niño) के संभावित प्रभाव को देखते हुए मानसून की उभरती स्थिति का आकलन करने और आकस्मिक उपायों की जांच करने के लिए कई मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
समीक्षा के दौरान, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने पीएमओ को सूचित किया कि हालांकि मानसून कई पश्चिमी और मध्य राज्यों में सामान्य से देरी से पहुंचा, लेकिन हाल के दिनों में बारिश की गतिविधियां मजबूत हुई हैं। इसके परिणामस्वरूप, अखिल भारतीय (देश भर में) बारिश की कमी घटकर दीर्घकालिक औसत (long-period average) से 12 प्रतिशत कम रह गई है।
मानसून में देरी और अल नीनो का प्रभाव
आईएमडी के अनुसार, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में मानसून के आगमन में करीब 10 दिनों की देरी देखी गई थी। हालांकि, इसके बाद से मौसम प्रणाली अधिक सक्रिय हो गई है, जिससे जुलाई के शुरुआती सप्ताह में कई क्षेत्रों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है।
मौसम अधिकारियों ने बैठक में प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति के बारे में भी जानकारी दी और बताया कि अगले दो महीनों में इसके कमजोर से मध्यम तीव्रता के रहने की उम्मीद है। इसके साथ ही, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अल नीनो की स्थिति का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि पूरे भारत में बारिश की कमी ही होगी। बदलते वायुमंडलीय हालातों के आधार पर पूर्वानुमानों को लगातार अपडेट किया जाता रहेगा।
कृषि की तैयारी और आकस्मिक योजनाएँ
इस चर्चा में कृषि संबंधी तैयारियां एक मुख्य हिस्सा थीं। कृषि मंत्रालय ने पीएमओ को सूचित किया कि ‘क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप’ के माध्यम से लगातार निगरानी की जा रही है, जो राज्य सरकारों के समन्वय से बारिश के रुख, बुआई की प्रगति, जलाशयों के भंडारण, कीटों के प्रकोप और फसलों की स्थिति की नियमित समीक्षा करता है।
| तैयारियों के मुख्य बिंदु | विवरण |
| संवेदनशील जिले | बारिश के अनिश्चित होने पर त्वरित प्रतिक्रिया के लिए 260 से अधिक संवेदनशील जिलों में जिला-स्तरीय आकस्मिक योजनाओं (contingency plans) को अपडेट किया गया है। |
| किसानों को सलाह | खरीफ सीजन के दौरान किसानों को मौसम से जुड़े जोखिमों के प्रबंधन में मदद करने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) द्वारा तैयार किए गए परामर्श दस्तावेजों को कृषि विज्ञान केंद्रों में भेजा गया है। |
मंत्रालय ने आगे रेखांकित किया कि जलवायु-अनुकूल फसल किस्मों (climate-resilient crop varieties) में प्रगति, बेहतर सिंचाई प्रथाओं और उन्नत कृषि प्रौद्योगिकियों ने उन पिछले वर्षों में भी खाद्यान्न उत्पादन बनाए रखने में मदद की है, जब मानसून की बारिश असमान रही थी।
पीएमओ के निर्देश: पीएमओ ने सभी विभागों को आपस में कड़ा समन्वय बनाए रखने, मौसम के घटनाक्रमों की निगरानी जारी रखने और आवश्यकता पड़ने पर किसानों तथा प्रभावित क्षेत्रों तक समय पर सहायता पहुंचना सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। अधिकारियों ने जोर दिया कि कृषि उत्पादन को सुरक्षित रखने और किसी भी प्रतिकूल मौसम की स्थिति के प्रभाव को कम करने के लिए पूरे मानसून सीजन में नियमित समीक्षा जारी रहेगी।
