दिल्ली (राजीव शर्मा):प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज सोमनाथ अमृत महोत्सव में अपने संबोधन की कुछ झलकियां साझा कीं, जिसमें उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि यह महोत्सव केवल अतीत का उत्सव नहीं है, बल्कि आने वाले एक हजार वर्षों के लिए भारत के लिए प्रेरणा का त्योहार भी है।
“वर्ष 1998 में पोखरण में परमाणु परीक्षण के सा”मुझे देशभर के पवित्र तीर्थों के विकास का सौभाग्य मिला है। पवित्र सोमनाथ परिसर भी इसका एक सशक्त उदाहरण है।”
“75 वर्ष पहले जब पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा हुई, तब भारत ने एक नई यात्रा शुरू की। आज यह यात्रा और अधिक व्यापक स्वरूप में हमारे सामने है, जिसे हमें नई ऊंचाई पर लेकर जाना है।”
थ दुनिया ने भारत के वैज्ञानिकों के सामर्थ्य को महसूस किया। इसके बाद देश ने हर तरह के संकट का जिस मजबूती से मुकाबला किया, उससे दुनिया भी हैरान रह गई।”
“सरदार पटेल, डॉ. राजेंद्र प्रसाद और के. एम. मुंशी जी सहित हमारे देश में ऐसी अनगिनत महान विभूतियां हुई हैं, जिन्होंने सोमनाथ की सेवा में सर्वस्व अर्पित कर दिया। उनका पुण्य स्मरण हमें प्रेरणा देता है कि हम भारतवासियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत को निरंतर आगे बढ़ाना है।”
“हमारे सांस्कृतिक स्थल हजारों वर्षों से भारत की पहचान रहे हैं। लेकिन दुर्भाग्य से देश में आज भी ऐसे लोग हैं, जिनके लिए सोमनाथ जैसे राष्ट्रीय स्वाभिमान के विषय से ज्यादा जरूरी तुष्टिकरण है।”
