प्रधानमंत्री ने डॉ. भूपेन हजारिका की 100वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की

नई दिल्ली(राजीव शर्मा):प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने महान गायक-संगीतकार और गीतकार डॉक्टर भूपेन हजारिका को उनकी 100वीं जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की है।

प्रधानमंत्री ने कहा है कि डॉ. भूपेन हजारिका के सुरों ने असम की आत्मा और पूर्वोत्तर की भावना को पूरे देश तक पहुंचाया। उन्होंने कहा कि डॉ. हजारिका ने अपने संगीत के माध्यम से अनगिनत लोगों के विचारों और भावनाओं को अत्यंत खूबसूरती से व्यक्त किया और लोगों को करीब लाये।

श्री मोदी ने विगत वर्ष गुवाहाटी में डॉ. हजारिका की जन्म शताब्दी समारोह के शुभारंभ में भाग लेने की यादें भी ताजा कीं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भूपेन दा का जीवन और कार्य आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।

प्रधानमंत्री ने एक्‍स पर लिखा;

“मैं प्रसिद्ध व्यक्तित्व डॉ. भूपेन हजारिका जी को उनकी 100वीं जयंती पर याद कर रहा हूं।”

उनकी आवाज ने असम की आत्मा और पूर्वोत्तर की भावना को पूरे देश तक पहुंचाया।

अपने संगीत के माध्यम से उन्होंने अनगिनत लोगों के विचारों और भावनाओं को खूबसूरती से व्यक्त किया। उनके गीतों लोगों को करीब लाये।

मैं पिछले वर्ष गुवाहाटी में उनके जन्म शताब्दी समारोह के शुभारंभ में शामिल हुआ था। उसकी यादें मेरे मन में बनी हुई हैं। भूपेन दा का जीवन और कार्य आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।
प्रधानमंत्री ने पोषण पहलों और आंगनवाड़ी व्यवस्था को मजबूत करने से संबंधित एक लेख साझा किया

नई दिल्ली(राजीव शर्मा):प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने केंद्रीय मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी द्वारा लिखे गए एक लेख को साझा किया है।

मातृ वंदना योजना और पोषण माह के 10 वर्ष पूर्ण होने पर लिखा गया यह लेख आंगनवाड़ी प्रणाली को एक जन आंदोलन बनाने के संदेश को स्‍पष्‍ट रूप से दर्शाता है। यह रेखांकित करता है कि डीबीटी, सामाजिक लेखापरीक्षा और पौष्टिक भोजन बच्चों, महिलाओं और किशोरियों को किस प्रकार सहायता कर रहे हैं। लेख में बताया गया है कि “हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी” के दृष्टिकोण से निर्देशित ये प्रयास कुपोषण मुक्त और विकसित भारत की दिशा में मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने एक्‍स पर पोस्‍ट में लिखा;

“मातृ वंदना योजना के 10 वर्ष और पोषण माह पर, केंद्रीय मंत्री श्रीमती @Annapurna4BJP जी का यह आलेख आंगनवाड़ी व्यवस्था को जन-आंदोलन बनाने का संदेश देता है। वे रेखांकित करती हैं कि कैसे डीबीटी, सोशल ऑडिट और पौष्टिक आहार से बच्चों, महिलाओं और किशोरियों को संबल मिल रहा है। यह प्रयास ‘हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ के विजन से कुपोषण-मुक्त और विकसित भारत के निर्माण की राह प्रशस्त कर रहा है।”

By Rajeev Sharma

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