नई दिल्ली(राजीव शर्मा): उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आज गुवाहाटी स्थित श्रीमंत शंकरदेव स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (एसएसयूएचएस) के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए नव-स्नातक चिकित्सा पेशेवरों से करुणा, नैतिकता और वैज्ञानिक उत्कृष्टता को बनाए रखने तथा अपने ज्ञान व कौशल को मानवता की सेवा में समर्पित करने का आग्रह किया। उन्होंने वर्ष 2023, 2024 और 2025 के लिए डॉ. जॉन बेरी व्हाइट पुरस्कार भी प्रदान किए।
दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव के नाम पर स्थापित यह विश्वविद्यालय स्वास्थ्य विज्ञान शिक्षा, अनुसंधान और जन-स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण संस्थान के रूप में उभरा है। उन्होंने स्थानीय भाषाओं में चिकित्सा ज्ञान को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय के प्रयासों की सराहना की, जिसमें मेडिकल साइंस का एंग्लो-असमिया शब्दकोश और असमिया भाषा में चिकित्सा पाठ्यपुस्तकों का प्रकाशन शामिल है।
उपराष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में हुए बदलाव पर प्रकाश डाला और आयुष्मान भारत जैसी पहलों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 44 करोड़ से अधिक आयुष्मान कार्ड जारी किए गए हैं और बताया कि इस योजना ने गरीब व मध्यमवर्गीय परिवारों को चिकित्सा व्यय में अनुमानित 2 लाख करोड़ रुपये की बचत करने में मदद की है।
असम की स्वास्थ्य सेवा में प्रगति के बारे में बताते हुए श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि राज्य में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 2021 के सात से दोगुनी से अधिक होकर 15 हो गई है, और नौ अन्य कॉलेज निर्माणाधीन हैं। उन्होंने पूर्वोत्तर के पहले एम्स, यानी एम्स गुवाहाटी और असम के त्रि-स्तरीय कैंसर देखभाल नेटवर्क का भी उल्लेख किया, जिसमें राज्य का पहला प्रोटॉन बीम थेरेपी केंद्र भी शामिल है।
उपराष्ट्रपति ने स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा और असम सरकार को बधाई दी। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के बदलते परिदृश्य के कारण असम के बाहर से भी मरीज उन्नत उपचार के लिए बढ़ी संख्या में गुवाहाटी में आ रहे हैं।
युवाओं से स्वस्थ और अनुशासित जीवन अपनाने का आह्वान करते हुए, श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने उन्हें नशीले पदार्थों के सेवन से दूर रहने और ‘नशा मुक्त भारत’ के निर्माण में योगदान देने की अपील की। उन्होंने विद्यार्थियों को सोशल मीडिया का रचनात्मक उपयोग करने और इस पर अत्यधिक समय न बिताने की भी सलाह दी।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि विकसित और स्वस्थ भारत के विजन को आगे बढ़ाने में युवा चिकित्सा पेशेवरों की महत्वपूर्ण भूमिका है, और उन्होंने स्नातक विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
इस दीक्षांत समारोह में असम के राज्यपाल श्री लक्ष्मण प्रसाद आचार्य, मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा, चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान मंत्री श्री अशोक सिंघल, शिक्षा मंत्री डॉ. रनोज पेगु, मुख्य सचिव डॉ. रवि कोटा; एसएसयूएचएस के कुलपति डॉ. अनुप कुमार बर्मन सहित संकाय सदस्य, शोधकर्ता, छात्र और अभिभावक उपस्थित थे।
