धूरी(गुरप्रीत सिंह): मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने बुधवार को कहा कि पंजाब ने लाल लकीर के भीतर बने घरों के स्वामित्व अधिकारों के लिए दशकों से चली आ रही प्रतीक्षा समाप्त कर दी है। उन्होंने ‘मेरा घर मेरे नाम’ योजना के तहत परिवारों को संपत्ति स्वामित्व प्रमाणपत्र सौंपे। इसके साथ ही कानूनी रूप से दर्ज स्वामित्व, संपत्ति की सीमाओं के मानचित्रण और संस्थागत ऋण तक पहुंच उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू हुई है।
उन्होंने कहा कि इस पहल से विशेष रूप से गरीब, दलित और भूमिहीन परिवारों को लाभ मिलेगा, जिनके घर पहले सरकारी रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं थे। सटीक नक्शे और राजस्व रिकॉर्ड लंबे समय से चले आ रहे संपत्ति विवादों को सुलझाने में भी मदद करेंगे। धूरी में संपत्ति स्वामित्व कार्ड वितरित करने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य ने पंजाब को लाल लकीर से मुक्त करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। करीब 4,000 गांवों में जल्द ही उचित पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।




‘एक्स’ पर मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “धूरी रैली में उमड़ी विशाल भीड़ ने साबित कर दिया है कि हमारे काम की गूंज पंजाब के हर घर तक पहुंच रही है। परिवार-केंद्रित राजनीति को समाप्त करके हमने पंजाब को ‘लाल लकीर’ से मुक्त करने की दिशा में ऐतिहासिक शुरुआत की है। करीब 4,000 गांवों में जल्द ही उचित संपत्ति पंजीकरण शुरू होंगे। हमने धूरी को 47 करोड़ रुपये की जल परियोजना की सौगात दी है। नहरी पानी 88 प्रतिशत कृषि भूमि के अंतिम छोर तक पहुंचने से हमारे किसानों की फसल उपज बढ़ी है। पंजाब का शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा में नंबर एक होना तथा बिजली के शून्य बिल अब हकीकत हैं। हम केंद्रीय एजेंसियों की धमकियों से डरने वाले नहीं हैं। हमारा एकमात्र उद्देश्य निस्वार्थ भाव से पंजाब की सेवा करना है और पंजाबी किसी की धमकी बर्दाश्त नहीं करते। इंकलाब जिंदाबाद।”
सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “’मेरा घर मेरे नाम’ योजना का उद्देश्य प्रत्येक पात्र परिवार को उसके घर का स्पष्ट स्वामित्व अधिकार और दस्तावेजी मान्यता प्रदान करना है। हमारा संकल्प है कि हर पात्र परिवार के घर को आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज किया जाए और परिवार को उसके स्वामित्व को मान्यता देने वाला दस्तावेज मिले। यह पहल लोगों के अधिकारों, सम्मान और भविष्य की सुरक्षा को मजबूत करेगी।”
मुख्यमंत्री ने कहा, “धूरी रैली में उमड़ी विशाल भीड़ ने साबित कर दिया है कि हमारे काम की गूंज पंजाब के हर घर तक पहुंच रही है। परिवार-केंद्रित राजनीति समाप्त करके हमने पंजाब को लाल लकीर से मुक्त करने की दिशा में ऐतिहासिक शुरुआत की है। करीब 4,000 गांवों में जल्द ही उचित संपत्ति पंजीकरण शुरू होंगे।”
उन्होंने कहा, “घर का स्वामित्व हर परिवार की भावनाओं, आकांक्षाओं और भविष्य की उम्मीदों से गहराई से जुड़ा होता है। अपने घर के स्वामित्व का स्पष्ट रिकॉर्ड परिवार को सुरक्षा और आत्मविश्वास देता है। ‘मेरा घर मेरे नाम’ योजना का प्रमुख उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पंजाब का कोई भी पात्र परिवार अपने घर के स्वामित्व अधिकारों को लेकर असुरक्षित महसूस न करे।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “कई गांवों में परिवार पीढ़ियों से लाल लकीर के भीतर बने अपने घरों में रह रहे हैं, लेकिन औपचारिक स्वामित्व रिकॉर्ड न होने के कारण उन्हें अक्सर कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। जिस घर में परिवार की कई पीढ़ियां रह चुकी हों, उसका स्पष्ट स्वामित्व दस्तावेज अत्यंत महत्वपूर्ण है। ‘मेरा घर मेरे नाम’ योजना का मुख्य उद्देश्य पात्र परिवारों को उनके घरों पर स्वामित्व अधिकारों की कानूनी मान्यता देना है।”
योजना को जन-केंद्रित पहल बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “लोगों को उनके घरों के स्वामित्व दस्तावेज उपलब्ध कराकर यह योजना औपचारिक संपत्ति रिकॉर्ड में लंबे समय से बनी कमी को दूर करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। संपत्ति कार्ड परिवार को यह भरोसा देता है कि उसके घर की पहचान और स्वामित्व से जुड़ी जानकारी आधिकारिक रूप से दर्ज हो चुकी है।”
मुख्यमंत्री ने कहा, “इस योजना के तहत संपत्तियों के सीमांकन और मानचित्रण के लिए ड्रोन सर्वेक्षण तथा आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। सर्वेक्षण के माध्यम से घरों की स्थिति और सीमाओं की पहचान की जा रही है और स्वामित्व से जुड़े रिकॉर्ड तैयार किए जा रहे हैं। इस प्रक्रिया का उद्देश्य लोगों के अधिकारों को स्पष्ट रूप से स्थापित करना और संपत्ति रिकॉर्ड में पारदर्शिता बढ़ाना है, जिससे भविष्य में स्वामित्व को लेकर भ्रम कम हो सके।”
उन्होंने कहा, “संपत्ति कार्ड जारी होने से पात्र लाभार्थियों को अपने घरों के स्वामित्व से संबंधित दस्तावेजी मान्यता और कानूनी सुरक्षा मिलेगी। घर की सीमाओं और स्वामित्व के स्पष्ट रिकॉर्ड से संपत्ति के स्वामित्व से जुड़े गलतफहमियों और विवादों को कम करने में मदद मिलेगी। औपचारिक संपत्ति रिकॉर्ड उपलब्ध होने से बैंकों से ऋण लेने की प्रक्रिया भी आसान हो सकती है, लेकिन किसी भी ऋण की मंजूरी संबंधित बैंक के नियमों और पात्रता मानदंडों के अधीन रहेगी।”
उन्होंने कहा कि इस पहल से लोगों को अपने घरों के रखरखाव और सुधार तथा परिवार के भविष्य की योजना बनाने में अधिक आत्मविश्वास मिलेगा। उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि योजना का लाभ हर पात्र परिवार तक पहुंचे और उनके घरों से संबंधित स्वामित्व रिकॉर्ड स्पष्ट रूप से स्थापित हों।”
लाभार्थियों से भावनात्मक अपील करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “मैं सभी लाभार्थियों से अपील करता हूं कि वे अपने संपत्ति कार्ड में दर्ज नाम, घर का विवरण और अन्य जानकारी को ध्यानपूर्वक जांच लें। किसी भी गलती या अस्पष्टता की स्थिति में संबंधित अधिकारियों के ध्यान में यह मामला लाएं।”
चरणबद्ध वितरण की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “पहले चरण में पंजाब के 2,295 गांवों में संपत्ति कार्ड वितरित किए जाने का प्रस्ताव है, जिसमें संगरूर जिले के 221 गांव शामिल हैं। दूसरे चरण में पंजाब के 1,668 गांवों में संपत्ति कार्ड वितरित किए जाएंगे। तीसरा चरण नवंबर और चौथा चरण दिसंबर में आयोजित किया जाएगा।”
उन्होंने कहा कि चरणबद्ध वितरण की योजना यह सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है कि अधिकतम संख्या में पात्र लाभार्थियों तक संपत्ति कार्ड सुचारु और व्यवस्थित तरीके से पहुंचें। उन्होंने कहा, “मैं लोगों से अपील करता हूं कि सर्वेक्षण, रिकॉर्ड के सत्यापन और संपत्ति कार्ड वितरण के दौरान संबंधित टीमों के साथ सहयोग करें। यह जनहितैषी योजना मिशन मोड में लागू की जा रही है और इस वर्ष के अंत तक पूरे राज्य को इसके दायरे में लाया जाएगा।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे विकास कार्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, “हमने धूरी को 47 करोड़ रुपये की जल परियोजना की सौगात दी है। नहरी पानी 88 प्रतिशत कृषि भूमि के अंतिम छोर तक पहुंचने से किसानों की फसल उपज बढ़ी है। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा में पंजाब का नंबर एक होना तथा बिजली के शून्य बिल अब हकीकत हैं।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “हम केंद्रीय एजेंसियों की धमकियों से डरने वाले नहीं हैं। हमारा एकमात्र उद्देश्य निस्वार्थ भाव से पंजाब की सेवा करना है और पंजाबी किसी की धमकी बर्दाश्त नहीं करते।”
परिवारों को सुरक्षित स्वामित्व अधिकार देने की पारदर्शी प्रक्रिया
‘मेरा घर मेरे नाम’ योजना का महत्व केवल संपत्ति कार्ड सौंपने तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य उन घरों का आधिकारिक और सत्यापन योग्य अधिकार रिकॉर्ड तैयार करना है, जो ऐतिहासिक रूप से औपचारिक राजस्व रिकॉर्ड से बाहर रहे हैं।
इस प्रक्रिया के तहत अधिसूचित आबादी क्षेत्र में आने वाले प्रत्येक घर और भूखंड का आधुनिक तकनीक, जिसमें ड्रोन मैपिंग भी शामिल है, के माध्यम से सर्वेक्षण और मानचित्रण किया जाता है। ग्राम स्तरीय समिति की मौजूदगी में पटवारी या सर्वे अधिकारी घर-घर जाकर मालिक की पहचान करता है।
प्रारंभिक नक्शा और स्वामित्व संबंधी विवरण गांव में सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किए जाते हैं और पंचायत के साथ साझा किए जाते हैं। इसके अलावा, मालिकों को उनके विवरण व्हाट्सऐप के माध्यम से भेजे जाते हैं, ताकि वे रिकॉर्ड की जांच कर सकें और अंतिम रूप दिए जाने से पहले सुधार के लिए अनुरोध कर सकें। यह पारदर्शी सत्यापन प्रक्रिया परिवारों को अंतिम अधिकार रिकॉर्ड में शामिल होने से पहले अपने स्वामित्व विवरण की जांच करने का अवसर देती है।
रिकॉर्ड अंतिम रूप से तैयार होने के बाद उसका औपचारिक सत्यापन किया जाता है और उसी आधार पर संपत्ति कार्ड तैयार किया जाता है। कार्ड में सर्वे इकाई संख्या, जीपीएस लोकेशन, ड्रोन नक्शा और ऑनलाइन सत्यापन के लिए क्यूआर कोड दर्ज होता है। इससे परिवार को अपनी संपत्ति का दस्तावेजी और सत्यापन योग्य रिकॉर्ड प्राप्त होता है।
यह सुविधा गरीब और अनुसूचित जाति के उन परिवारों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जिनके पास आबादी क्षेत्र के बाहर कोई भूमि नहीं है और जिनका घर ही उनकी एकमात्र संपत्ति हो सकता है। औपचारिक मान्यता से स्वामित्व की सुरक्षा बढ़ेगी, संपत्ति की सीमाएं स्पष्ट होंगी और विवाद कम होंगे। इसके अलावा, व्यापार, खेती, शिक्षा या स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों के लिए संपत्ति को बैंक ऋण की गारंटी के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकेगा।
यह रिकॉर्ड पंजीकरण, हस्तांतरण और विरासत की प्रक्रिया में भी मदद कर सकता है, क्योंकि इसमें प्रत्येक सह-स्वामी का हिस्सा दर्ज किया जाएगा। ग्राम पंचायतों को गांव के विकास की योजना बनाने के लिए घरों, सड़कों, नालियों और सार्वजनिक स्थानों के सटीक नक्शे मिलेंगे। वहीं प्रशासन को डिजिटाइज्ड और सटीक गांव रिकॉर्ड उपलब्ध होंगे।
