पंजाब के मानसा में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या के मामले में जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अपने हाथ में ले ली है। परिवार की मांग पर पंजाब सरकार ने केस की जांच CBI को सौंपने का फैसला किया। इसके बाद एजेंसी ने चंडीगढ़ यूनिट में FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। झोटा के शव का पोस्टमार्टम चंडीगढ़ स्थित PGI में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम करेगी, जबकि मजिस्ट्रेट की निगरानी में कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
परविंदर सिंह झोटा की 13 अक्टूबर को मानसा के एक मेडिकल स्टोर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। रिपोर्टों के मुताबिक, वह मेडिकल स्टोर संचालक अश्वनी कुमार से एक बुजुर्ग को कथित तौर पर नशीली दवाएं बेचने को लेकर सवाल कर रहे थे। इसी दौरान गोलीबारी हुई, जिसमें झोटा की मौत हो गई और चार अन्य लोग घायल हुए। घटना के समय झोटा फेसबुक लाइव भी कर रहे थे।
हत्या के बाद से ही झोटा के परिवार और समर्थक मामले की CBI जांच की मांग कर रहे थे। परिवार ने पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार कराने से भी इनकार कर दिया था। उनकी प्रमुख मांगों में PGI के विशेषज्ञ डॉक्टरों से पोस्टमार्टम कराना और मामले की निष्पक्ष जांच शामिल थी। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 20 अक्टूबर को केस CBI को सौंपने की घोषणा की थी। इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी मानसा में झोटा के परिवार से मुलाकात की।
CBI की टीम मानसा पहुंचकर स्थानीय पुलिस से केस से जुड़े दस्तावेज और जब्त किए गए साक्ष्य अपने कब्जे में ले चुकी है। जांच टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और वारदात के घटनाक्रम को समझने के लिए मौके का मुआयना किया। फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने भी घटनास्थल से नमूने जुटाए। एजेंसी मामले के विभिन्न पहलुओं की जांच करेगी। इसके लिए फॉरेंसिक विशेषज्ञों, ड्रग कंट्रोल से जुड़े अधिकारियों और अन्य विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है।
मामले में मेडिकल स्टोर संचालक अश्वनी कुमार को मुख्य आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने उसे राजस्थान के सालासर से हिरासत में लिया था। उसकी पत्नी नीलम रानी और दो अन्य लोगों को भी आरोपी की मदद करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। CBI की FIR में अश्वनी कुमार के साथ अन्य अज्ञात लोगों के नाम भी शामिल हैं। हालांकि, आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निकलेगा।
झोटा की हत्या के बाद मानसा में विरोध प्रदर्शन हुए और 15 अक्टूबर को पंजाब बंद का आह्वान किया गया था। परिवार और समर्थक लगातार न्याय की मांग कर रहे हैं। अब CBI जांच और PGI में प्रस्तावित पोस्टमार्टम के बाद परिवार को उम्मीद है कि मामले की जांच आगे बढ़ेगी और घटना से जुड़े तथ्यों का पता चल सकेगा।
