यमुनानगर में जिला कष्ट निवारण समिति (ग्रीवेंस कमेटी) की बैठक वीरवार को लघु सचिवालय के सभागार स्थित कमरा नंबर-203 में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता उपायुक्त प्रीति ने की। बैठक में कुल 15 शिकायतें रखी गईं, जिनमें से 10 शिकायतों का मौके पर ही समाधान कर दिया गया, जबकि 5 शिकायतों को आगामी बैठक तक लंबित रखा गया।
बैठक के दौरान बिजली विभाग से संबंधित एक शिकायत पर सुनवाई करते हुए उपायुक्त ने विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई। मामले में एक महिला के घरेलू बिजली मीटर में करीब पांच लाख रुपए की बकाया राशि जोड़ दी गई थी। जांच के दौरान विभाग ने अपनी गलती स्वीकार की। इसके बाद डीसी ने संबंधित सीई और जेई को चार्जशीट करने के आदेश दिए।

जम्मू कॉलोनी निवासी बिमला रानी अपने बेटे के साथ शिकायत रखती हुई।
पांच साल तक चलती रही फैक्ट्री, नहीं भरा बिजली बिल
जम्मू कॉलोनी निवासी बिमला रानी ने शिकायत में बताया कि उनकी एक दुकान है, जिसे उन्होंने वर्ष 2017 में किराये पर दिया था। दुकान के ऊपर वाले फ्लोर पर वह स्वयं रहती हैं, जबकि ग्राउंड फ्लोर पर बनी दुकान में कुल्फियां बनाने की फैक्ट्री संचालित की जा रही थी। उनके घर और दुकान के लिए अलग-अलग बिजली मीटर लगे हुए थे और दोनों मीटर उनके पति के नाम पर थे।
बिमला रानी के अनुसार, वर्ष 2017 में दुकान किराये पर देते समय फैक्ट्री संचालक को स्पष्ट रूप से कहा गया था कि वह समय-समय पर बिजली के बिल का भुगतान करता रहे। आरोप है कि फैक्ट्री संचालक ने वर्ष 2017 से 2022 तक करीब पांच साल तक फैक्ट्री चलाई, लेकिन इस दौरान बिजली के बिल का भुगतान नहीं किया और न ही उन्हें इसकी जानकारी दी।
बैठक से पहले विभाग ने सुधारी गलती
फैक्ट्री संचालक द्वारा दुकान खाली करने के बाद बिजली का मीटर उतार दिया गया। इसके बाद बिजली विभाग ने फैक्ट्री के पीडीसीओ खाते में बकाया राशि को महिला के घरेलू बिजली मीटर से जोड़ दिया। यह राशि 4 लाख 99 हजार 76 रुपए थी।
महिला ने इस संबंध में बिजली विभाग के अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन उसे उचित समाधान नहीं मिला। इसके बाद उसने जिला कष्ट निवारण समिति के समक्ष शिकायत रखी। बैठक से पहले ही विभाग ने गलती को सुधारते हुए घरेलू मीटर से जोड़ी गई राशि हटा दी।

ग्रीवांस कमेटी की बैठक में उपस्थित अधिकारी।
डीसी ने पूछा- किसकी गलती से जुड़ा बिल
बैठक में उपायुक्त प्रीति ने बिजली निगम के अधिकारियों से पूछा कि महिला के घरेलू बिजली बिल में करीब पांच लाख रुपए की राशि आखिर किसकी गलती से जोड़ी गई। इस पर विभागीय अधिकारियों ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए बताया कि यह गलती संबंधित सीई और जेई स्तर पर हुई थी।
मामले को गंभीरता से लेते हुए डीसी ने दोनों अधिकारियों को चार्जशीट करने के आदेश दिए। उन्होंने कहा कि विभागीय गलती के कारण पीड़ित परिवार को मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा है। ऐसे मामलों में विभाग के साथ-साथ संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए।

संत नगर निवासी बरखा रानी बैंक संबंधित शिकायत रखती हुई।
बैंक अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश
बैठक में एक अन्य शिकायत पर सुनवाई करते हुए उपायुक्त ने एक निजी बैंक के अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई के आदेश दिए। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि बैंक अधिकारी जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं और बार-बार बुलाए जाने के बावजूद संबंधित समिति के समक्ष उपस्थित नहीं होते।
संत नगर निवासी बरखा रानी ने शिकायत में बताया कि उसके पति की मृत्यु के बाद बैंक की ओर से पॉलिसी की राशि जारी करने में देरी की गई। पिछली बैठक में मामले की सुनवाई के दौरान देरी की अवधि का ब्याज भी पीड़िता को देने के आदेश दिए गए थे। इस मामले की जांच के लिए एडीसी की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई थी।

बैठक के दौरान सुनवाई करते हुए डीसी प्रीति, एसपी कमलदीप गोयल व अन्य अधिकारी।
एसपी को सौंपी जांच, कार्रवाई के निर्देश
जांच के दौरान कमेटी की ओर से बैंक अधिकारियों को कई बार बुलाया गया, लेकिन आरोप है कि उन्होंने जांच में सहयोग नहीं किया। अधिकारियों ने न तो समय पर उपस्थित होकर अपना पक्ष रखा और न ही मांगे गए दस्तावेज उपलब्ध करवाए। बताया गया कि पुलिस के हस्तक्षेप के बाद ही बैंक अधिकारी जांच में शामिल हुए।
मामले को गंभीरता से लेते हुए उपायुक्त प्रीति ने शिकायत को पुलिस अधीक्षक के पास भेजने के आदेश दिए। साथ ही संबंधित बैंक अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में उपायुक्त ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि ग्रीवेंस कमेटी में आने वाली शिकायतों का गंभीरता से निपटारा किया जाए और शिकायतकर्ताओं को अनावश्यक रूप से परेशान न होना पड़े। उन्होंने विभागीय स्तर पर हुई गलतियों के लिए जिम्मेदारी तय करने और समयबद्ध तरीके से शिकायतों का समाधान सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
