नई दिल्ली(राजीव शर्मा): भारतीय सेना की शूटर नायब सूबेदार नीरू ढाँडा ने लोनातो, इटली में महिला ट्रैप इवेंट में ISSF वर्ल्ड कप का स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। वे इस इवेंट में स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय शूटर बन गईं।
आर्मी मार्क्समैनशिप यूनिट (AMU) का प्रतिनिधित्व कर रहीं 26 साल की नीरू ने फ्रांस, इटली, स्पेन, अमेरिका, स्वीडन और यूनाइटेड किंगडम सहित विश्व स्तरीय प्रतिद्वंद्वियों के बीच शानदार प्रदर्शन किया। कोटा राउंड में उन्होंने 125 में से 121 निशाने लगाए और फाइनल में भी शांत प्रदर्शन दिखाया। फाइनल में उन्होंने 30 में से 27 लक्ष्य भेदकर स्वर्ण पदक सुनिश्चित किया, जिससे वे फ्रांस और स्पेन की अनुभवी शूटरों से आगे रहीं।
भारतीय सेना ने नीरू को बधाई दी और उनके इस उपलब्धि को सैन्य खेलों के लिए मील का पत्थर व आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं—जिसमें एशियाई खेल भी शामिल हैं—के प्रति आत्मविश्वास बढ़ाने वाला बताया। हरियाणा के जिंद जिले की निवासी नीरू ने तब सेना में शामिल होकर करियर शुरू किया जब रैंक और फाइल में महिलाओं की भर्ती के लिए अवसर खोले गए थे। बाद में उन्होंने मव्हौ (इन्फैंट्री स्कूल) के आर्मी मार्क्समैनशिप यूनिट में प्रशिक्षण लेकर शूटरिंग में निपुणता हासिल की, जो राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर के एलीट शूटर तैयार करने के प्रमुख केंद्रों में से एक है।
यह नीरू की पहली अंतरराष्ट्रीय सफलता नहीं है। उन्होंने पहले 2025 में एशियन शूटिंग चैंपियनशिप में महिला ट्रैप में स्वर्ण जीता था, जिसने उन्हें भारत के प्रमुख शॉटगन शूटरों में स्थापित कर दिया था।
ISSF के अनुसार, फाइनल के दौरान नीरू लगातार शीर्ष दावेदारों में रहीं और निर्णायक क्षणों में दबाव को शानदार तरीके से संभाला। उन्होंने 27 सफल शॉट्स के साथ अपना पहला ISSF वर्ल्ड कप खिताब जीता और फ्रांस की कैरोल कॉरमेनियर तथा इटली की एरिका सेसा को पछाड़ा।
ट्रैप शूटिंग एक शॉटगन प्रतियोगिता है जिसमें खिलाड़ी छिपी मशीनों से अलग‑अलग कोणों और गति से छोड़े जाने वाले क्ले टार्गेट्स को निशाना बनाते हैं। यह इवेंट तेज़ रिफ्लेक्स, ध्यान और सही समय‑निर्धारण की मांग करता है ताकि गतिशील लक्ष्यों को लगातार हिट किया जा सके।
नीरू की जीत भारतीय शॉटगन शूटिंग के लिए एक महत्वपूर्ण सफलता मानी जा रही है और यह देश की अंतरराष्ट्रीय शूटरिंग सफलताओं में एक और मील का पत्थर जोड़ती है। उनका यह ऐतिहासिक स्वर्ण नई पीढ़ी के शूटरों को प्रेरित करेगा और भविष्य के वैश्विक आयोजनों में भारत की संभावनाओं को मजबूत करेगा।
