लेडी टीचर मनीषा के पिता ने आमरण अनशन खत्म किया:भिवानी SP के CBI अधिकारियों से मिलवाने के आश्वासन पर माने; एक हफ्ते का टाइम मिला

हरियाणा के भिवानी में लेडी टीचर मनीषा के पिता संजय कुमार ने SP सुमित कुमार के आश्वासन पर आमरण अनशन खत्म कर दिया। SP ने संजय को एक हफ्ते के अंदर CBI अधिकारियों से मिलवाने की बात कही है।

सोमवार सुबह संजय DC ऑफिस पर आमरण अनशन के लिए निकले थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में कुड़ल बास गांव के पास रोक लिया। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि उन्हें अनशन की अनुमति नहीं है।

इसके बाद संजय के साथ मौजूद ग्रामीणों ने हंगामा शुरू कर दिया। कुछ महिलाएं सड़क पर ही रोने लगीं। इसके बाद ग्रामीण वहीं बैठ गए। विरोध को देखते हुए कुड़ल बास गांव में पुलिस फोर्स तैनात की गई।

उधर, DC ऑफिस में पहले से मौजूद कांग्रेस के शहरी जिला अध्यक्ष प्रदीप गुलिया और अन्य समर्थकों को भी पुलिस ने वहां से हटा दिया। इस दौरान उनकी पुलिस अधिकारियों से तीखी बहस भी हुई।

मनीषा के पिता का कहना है कि बेटी की मौत को 10 महीने हो चुके हैं। CBI ने अभी तक इस मामले का खुलासा नहीं किया कि उसकी मौत कैसे हुई।

मनीषा के पिता बोले- हमने प्रशासन का ऑफर ठुकराया

आमरण अनशन शुरू करते हुए मनीषा के पिता संजय ने कहा था, “प्रशासन ने तानाशाही रवैया अपनाते हुए मुझे DC ऑफिस तक नहीं जाने दिया। इसलिए मैं कुड़ल बास गांव में ही आमरण अनशन पर बैठ गया। प्रशासन से हमारी बातचीत हुई थी। उन्होंने कहा था कि आपके पांच लोग डीसी ऑफिस आकर बात कर सकते हैं, लेकिन भीड़ को आने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसलिए हमने उनका प्रस्ताव ठुकरा दिया। देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी CBI इस मामले की जांच कर रही है, लेकिन अब तक कोई खुलासा नहीं हुआ है।”

कांग्रेस जिला अध्यक्ष बोले- सरकार किसी को बचा रही

कांग्रेस के शहरी जिला अध्यक्ष प्रदीप गुलिया ने कहा कि मनीषा को न्याय दिलाने के लिए लगातार धरने दिए जा रहे हैं, जिनमें सभी राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के लोग शामिल हो रहे हैं। सरकार गुंडागर्दी पर उतर आई है। ऐसा लगता है कि सरकार किसी को बचाना चाहती है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि वे शांतिपूर्ण तरीके से डीसी कार्यालय के बाहर बैठ रहे थे, तो इसमें आखिर क्या दिक्कत थी।

किसान नेता बोले- प्रशासन-सरकार तानाशाही कर रही

कुड़ल बास गांव में धरने पर पहुंचे किसान नेता सुरेश कौथ ने कहा, “प्रशासन और सरकार तानाशाही रवैया अपना रहे हैं। मनीषा के पिता और उनके साथियों को रोकने के कारण हमने कुड़ल बास में ही आमरण अनशन शुरू कर दिया है। यदि कोई व्यक्ति अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए भी आवाज नहीं उठा सकता, तो फिर लोकतंत्र का क्या मतलब रह जाता है? उसकी पिता न्याय के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं।”

13 अगस्त 2025 को भिवानी के सिंघानी गांव में मनीषा की लाश मिली थी।-फाइल

13 अगस्त 2025 को भिवानी के सिंघानी गांव में मनीषा की लाश मिली थी।-फाइल

11 अगस्त 2025 को लापता, 13 अगस्त को शव मिला

मनीषा 11 अगस्त 2025 को अपने ढाणी लक्ष्मण गांव से प्ले स्कूल में ड्यूटी पर गई थी। इसके बाद उसने नर्सिंग कॉलेज में एडमिशन के लिए जाने की बात कही थी, लेकिन वह घर वापस नहीं लौटी। 13 अगस्त को मनीषा का शव सिंघानी गांव के खेतों में पड़ा मिला। इसके बाद परिवार ने उसकी हत्या का आरोप लगाया।

पुलिस ने हत्या का केस दर्ज किया और मनीषा को न्याय दिलाने की मांग को लेकर लोगों ने धरना-प्रदर्शन किया। 18 अगस्त को पुलिस ने इसे आत्महत्या का मामला बताया, जिसके बाद लोगों का विरोध और बढ़ गया। बढ़ते आंदोलन को देखते हुए मनीषा का तीसरी बार दिल्ली एम्स में पोस्टमॉर्टम कराया गया। इसके बाद 26 अगस्त 2025 को मामले की जांच CBI को सौंप दी गई।

By Gurpreet Singh

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